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संसद सत्र में रद्द होने तक घर वापसी नहीं करेंगे किसान
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पलवल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद भी किसानों ने धरना समाप्त नहीं किया है। किसानों ने इसे संघर्ष की जीत बताया है। किसानों का कहना है कि संसद सत्र में कानून प्रक्रिया के तहत तीनों कृषि कानूनों को रद्द करें, उसके बाद ही किसान घर वापसी करेंगे। अध्यादेश के जरिये लागू किए कृषि कानूनों को सरकार अध्यादेश के जरिये ही रद्द कर सकती थी, परंतु प्रधानमंत्री ने संसद सत्र में रद्द करने की बात कही है। उन्हें प्रधानमंत्री की बात का विश्वास नहीं है। एमएसपी पर गारंटी कानून भी किसानों के प्रमुख मांग है।
प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों की वापस लेने की घोषणा का वे स्वागत करते हैं। आज किसानों के संघर्ष जीत हुई है। पिछले 11 महीने 23 दिन से किसान दिल्ली के चारों तरफ सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान सैकड़ों किसान शहीद हो गए। इन किसानों को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए।
- मास्टर महेंद्र सिंह, किसान संघर्ष समिति पलवल
पलवल के किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के सभी आह्वानों को पूरी निष्ठा से पूरा किया। उनके संघर्ष ने आज सरकार को झुकने को मजबूर कर दिया। अभी लड़ाई पूरी नहीं हुई है। जब तक तीनों कृषि कानून पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत रद्द नहीं कर दिए जाते, तब किसान घर वापसी नहीं करेंगे।
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- रतन सिंह सौरोत, राष्ट्रीय सचिव, भारतीय किसान यूनियन
तीनों कृषि कानूनों की वापसी के साथ एमएसपी पर गारंटी कानून व बिजली अमेडमेंट बिल की वापसी प्रमुख मांगें थी, जिनके विषय में प्रधानमंत्री द्वारा कोई घोषणा नहीं की गई है। एमएसपी पर गारंटी कानून की मांग दशकों से चली आ रही है। केवल छह प्रतिशत किसानों ही फसल की एमएसपी पर बिक पाती है। इसलिए एमएसपी पर गारंटी कानून पर सरकारी की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
- धर्मचंद घुघेरा, जिला प्रधान, अखिल भारतीय किसान सभा
हरियाणा सहित पूरे देश में आंदोलनकारियों पर संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिन्हें तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। लखीमपुर खीरी में चार किसानों व एक पत्रकार की हत्या मामले में कार्रवाई की जानी चाहिए। संसद में पारित मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड्स भी रद्द करे। सभी मुद्दों को सरकार द्वारा बातचीत की जानी चाहिए, तभी किसानों के संघर्ष सही मायनों में सार्थक माना जाएगा।
- डॉ. रघुवीर सिंह, किसान सभा
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प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों की वापस लेने की घोषणा का वे स्वागत करते हैं। आज किसानों के संघर्ष जीत हुई है। पिछले 11 महीने 23 दिन से किसान दिल्ली के चारों तरफ सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान सैकड़ों किसान शहीद हो गए। इन किसानों को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए।
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- मास्टर महेंद्र सिंह, किसान संघर्ष समिति पलवल
पलवल के किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के सभी आह्वानों को पूरी निष्ठा से पूरा किया। उनके संघर्ष ने आज सरकार को झुकने को मजबूर कर दिया। अभी लड़ाई पूरी नहीं हुई है। जब तक तीनों कृषि कानून पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत रद्द नहीं कर दिए जाते, तब किसान घर वापसी नहीं करेंगे।
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- रतन सिंह सौरोत, राष्ट्रीय सचिव, भारतीय किसान यूनियन
तीनों कृषि कानूनों की वापसी के साथ एमएसपी पर गारंटी कानून व बिजली अमेडमेंट बिल की वापसी प्रमुख मांगें थी, जिनके विषय में प्रधानमंत्री द्वारा कोई घोषणा नहीं की गई है। एमएसपी पर गारंटी कानून की मांग दशकों से चली आ रही है। केवल छह प्रतिशत किसानों ही फसल की एमएसपी पर बिक पाती है। इसलिए एमएसपी पर गारंटी कानून पर सरकारी की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
- धर्मचंद घुघेरा, जिला प्रधान, अखिल भारतीय किसान सभा
हरियाणा सहित पूरे देश में आंदोलनकारियों पर संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिन्हें तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। लखीमपुर खीरी में चार किसानों व एक पत्रकार की हत्या मामले में कार्रवाई की जानी चाहिए। संसद में पारित मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड्स भी रद्द करे। सभी मुद्दों को सरकार द्वारा बातचीत की जानी चाहिए, तभी किसानों के संघर्ष सही मायनों में सार्थक माना जाएगा।
- डॉ. रघुवीर सिंह, किसान सभा