पलवल। नए कृषि कानूनों के विरोध में अटोहां मोड़ पर चल रहा किसानों का धरना जारी रहा। इस दौरान करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की गई। साथ ही निर्णय लिया गया कि सरकार से जुड़े विधायकों और मंत्रियों को अब गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा। किसानों का कहना था कि सरकार किसानों को दबाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही है। किसानों पर लाठीचार्ज कराने से भी बाज नहीं आ रही है। धरने को चौबीसी सौरोत पाल ने रविवार को समर्थन दिया।
यहां से काफी संख्या में किसान नूंह स्थित किसान महापंचायत में हिस्सा लेने के लिए गए थे। किसानों का कहना था कि अब सरकार से वह हर तरह की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। किसान किसी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे। किसानों को सरकार जितना दबाने के लिए लाठीचार्ज जैसी घटनाओं को अंजाम देगी, किसान उतनी ही मजबूती से आंदोलन को आगे बढ़ाएगा। सरकार किसानों का हित चाहती है तो कृषि कानूनों को वापस ले। धरनास्थल पर सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। किसानों ने हाथ उठाकर पांच सितंबर को मुज्ज्फरनगर में होने वाली महापंचायत का समर्थन करते हुए ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने का संकल्प लिया। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार से डरने वाले नहीं है। किसान हित की बात करने वाली भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि वह पूरी तरह से किसान विरोधी है। किसानों ने कहा कि वे हर कीमत पर अपना हक लेकर रहेंगे। सरकार को झुकना ही पड़ेगा। इस अवसर पर भजन गायक रोशन लाल अल्लीका ने किसानों का मनोरंजन किया तथा सरकार पर जमकर कटाक्ष किए। धरने की अध्यक्षता जवां गांव के किसान महावीर सिंह मलिक ने की और संचालन लखन पाल तेवतिया ने किया। धरने को महेंद्र सिंह चौहान, सोहन लाल चौहान, किशन सिंह जवां, मुंशीराम दूधौला, ब्रजलाल सरपंच, छिद्दा चौहान, बेनामी जवां, नाहर सिंह जवां तथा भीम चौहान अटोहां ने संबोधित किया।