पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर नए कृषि कानूनों को निरस्त कराने की मांग के संबंध में चल रहा किसान आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। धरने में सहरावत पाल के किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों ने निर्णय लिया कि दशहरा यानी शुक्रवार को अटोहां मोड़ पलवल पर बुराई के प्रतीक प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व स्थानीय नेताओं के पुतले दहन कर प्रदर्शन किया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरौत और किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद घुघेरा ने बताया कि किसान आंदोलन सभी वर्गों की भागीदारी तथा समर्थन की व्यापकता के लिहाज से अभूतपूर्व सफलता प्राप्त कर रहा है। पिछले सभी कार्यक्रमों की सफलता से यह स्पष्ट हो चुका है कि भाजपा सरकार के सभी दुष्प्रचारों को देश की जनता ने नकार दिया है। तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के मामले में भाजपा सरकार के अड़ियल रुख को देखते हुए यह संघर्ष केवल जारी ही नहीं रहेगा, बल्कि यह और तेज गति पकड़ेगा। वर्तमान किसान आंदोलन सत्तासीन पार्टी से राजनीतिक रूप से भी मुकाबला करने के लिए तैयार हो चुका है। संयुक्त किसान मोर्चा ने मिशन उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड की शुरुआत की है। आंदोलन की सफलता से बौखलाकर ही भाजपा के केंद्रीय मंत्री ने लखीमपुर खीरी में नरसंहार कराया है। उन्होंने बताया कि सरकार इस भूल में न रहे कि ऐसी घटनाओं से किसान डर जाएगा और आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा। काले कानूनों की वापसी के बाद ही आंदोलन खत्म होगा। राजेंद्र सिंह घरौट द्वारा संचालित धरने की अध्यक्षता पंडित नंदराम सरपंच पहरा ने की। धरने को किसान नेता सोहनपाल चौहान, रघुबीर सिंह, रमेशचंद सौरौत, श्रीचंद महाशय, महेंद्र सहरावत सरपंच, शिव सिंह थानेदार, रणबीर चौहान, बीरसिंह, अच्छेलाल, समयराम, रोशनलाल, हुकम सिंह, इंद्र सिंह रावत व पोहप सिंह ने संबोधित किया।