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Palwal News: जिले में कम बारिश से किसान चिंतित, खरीफ फसलों पर मंडराया खतरा
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किसानों को ट्यूबवेल व अन्य साधनों से अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही, खेती की लागत भी बढ़ रही
हेमंत शर्मा
पलवल। जुलाई माह समाप्त होने को है। जिले में इस वर्ष सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। कम बारिश के चलते किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। खेतों में खड़ी खरीफ फसलों की सिंचाई प्रभावित होने लगी है और किसानों को ट्यूबवेल व अन्य साधनों से अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत भी बढ़ रही है।
किसानों का कहना है कि जुलाई तक अच्छी बारिश होने से धान, बाजरा, ज्वार और मूंग जैसी खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिल जाती है, लेकिन इस बार वर्षा कम होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक जिले में करीब 140 मिमी वर्षा हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 208 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। यानी इस बार अब तक करीब 68 मिमी कम बारिश हुई है। किसानों का कहना है कि यदि अगस्त में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसलों के साथ-साथ आगामी रबी सीजन की तैयारियां भी प्रभावित होंगी।
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पिछले साल से 68 मिमी कम बारिश
वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक जिले में कुल 233 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इनमें जनवरी से जुलाई 2025 तक 208 मिमी बारिश हुई थी। वहीं वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक केवल करीब 140 मिमी वर्षा हुई है यानी पिछले वर्ष की तुलना में अब तक लगभग 68 मिमी कम बारिश दर्ज की गई है। कम वर्षा से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
बड़े पैमाने पर होती है धान, बाजरा, ज्वार और मूंग की खेती
कम बारिश का सबसे अधिक असर खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। जिले में धान, बाजरा, ज्वार और मूंग की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इन फसलों की बुवाई जून-जुलाई में होती है और इन्हें पर्याप्त वर्षा की आवश्यकता होती है। बारिश कम होने से खेतों में नमी घट रही है और किसानों को सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
रबी फसलों की तैयारी भी होगी प्रभावित
किसानों के अनुसार कम वर्षा का असर केवल खरीफ तक सीमित नहीं रहेगा। बारिश कम होने से भूजल स्तर और खेतों की नमी प्रभावित होगी, जिससे अक्तूबर से शुरू होने वाली रबी फसलों, विशेषकर सरसों और गेहूं की बुवाई व उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों से बातचीत
इस बार मानसून कमजोर रहने और कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन से मांग है कि नहरों की सफाई कराकर उनमें पानी छोड़ा जाए।
-महेंद्र सिंह, किसान, पलवल
बारिश नहीं होने से धान और बाजरे की फसल की बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे डीजल और बिजली का खर्च काफी बढ़ गया है।
-रामबीर, किसान, औरंगाबाद
अगर अगस्त में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं है।
-रामबल, किसान, गोपालगढ़
कम बारिश के कारण ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ गई है। छोटे किसानों के लिए बार-बार सिंचाई करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो रहा है।
-सुमर, किसान, औरंगाबाद
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हेमंत शर्मा
पलवल। जुलाई माह समाप्त होने को है। जिले में इस वर्ष सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। कम बारिश के चलते किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। खेतों में खड़ी खरीफ फसलों की सिंचाई प्रभावित होने लगी है और किसानों को ट्यूबवेल व अन्य साधनों से अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत भी बढ़ रही है।
किसानों का कहना है कि जुलाई तक अच्छी बारिश होने से धान, बाजरा, ज्वार और मूंग जैसी खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिल जाती है, लेकिन इस बार वर्षा कम होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
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आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक जिले में करीब 140 मिमी वर्षा हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 208 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। यानी इस बार अब तक करीब 68 मिमी कम बारिश हुई है। किसानों का कहना है कि यदि अगस्त में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसलों के साथ-साथ आगामी रबी सीजन की तैयारियां भी प्रभावित होंगी।
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पिछले साल से 68 मिमी कम बारिश
वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक जिले में कुल 233 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इनमें जनवरी से जुलाई 2025 तक 208 मिमी बारिश हुई थी। वहीं वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक केवल करीब 140 मिमी वर्षा हुई है यानी पिछले वर्ष की तुलना में अब तक लगभग 68 मिमी कम बारिश दर्ज की गई है। कम वर्षा से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
बड़े पैमाने पर होती है धान, बाजरा, ज्वार और मूंग की खेती
कम बारिश का सबसे अधिक असर खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। जिले में धान, बाजरा, ज्वार और मूंग की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इन फसलों की बुवाई जून-जुलाई में होती है और इन्हें पर्याप्त वर्षा की आवश्यकता होती है। बारिश कम होने से खेतों में नमी घट रही है और किसानों को सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
रबी फसलों की तैयारी भी होगी प्रभावित
किसानों के अनुसार कम वर्षा का असर केवल खरीफ तक सीमित नहीं रहेगा। बारिश कम होने से भूजल स्तर और खेतों की नमी प्रभावित होगी, जिससे अक्तूबर से शुरू होने वाली रबी फसलों, विशेषकर सरसों और गेहूं की बुवाई व उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों से बातचीत
इस बार मानसून कमजोर रहने और कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन से मांग है कि नहरों की सफाई कराकर उनमें पानी छोड़ा जाए।
-महेंद्र सिंह, किसान, पलवल
बारिश नहीं होने से धान और बाजरे की फसल की बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे डीजल और बिजली का खर्च काफी बढ़ गया है।
-रामबीर, किसान, औरंगाबाद
अगर अगस्त में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं है।
-रामबल, किसान, गोपालगढ़
कम बारिश के कारण ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ गई है। छोटे किसानों के लिए बार-बार सिंचाई करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो रहा है।
-सुमर, किसान, औरंगाबाद