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सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने की हड़ताल
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पलवल। कोरोना के फिर से बढ़ते प्रकोप व नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की दस्तक के बावजूद सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों की हड़ताल से मंगलवार को मरीज खासे परेशान दिखाई दिए। जुकाम, बुखार व खांसी के मरीजों की संख्या अधिक थी, लेकिन उनकी जांच करने व दवाइयां लिखने को डॉक्टर ओपीडी में उपलब्ध नहीं थे। इस कारण मरीजों को बिना डॉक्टरों को दिखाए ही लौटना पड़ा। हालांकि बाद में मरीजों की भीड़ को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप सिंह व अस्पताल में कार्यरत सभी एसएमओ ने मोर्चा संभालते हुए ओपीडी सेवाएं शुरू की। उनके अलावा सिविल सर्जन ने एनएचएम व आयुष विभाग के चिकित्सकों को भी ओपीडी में मरीजों की जांच के लिए तैनात किया। बता दें कि हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को यहां जिला व उपमंडल स्तर सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने हड़ताल करते हुए ओपीडी सेवाएं नहीं दीं।
जिला नागरिक अस्पताल में सभी सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक हड़ताल पर अस्पताल परिसर में बैठे रहे। डॉक्टरों ने जमकर नारेबाजी भी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो वे आगे आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह से बंद कर देंगे। जिला नागरिक अस्पताल के अलावा हथीन व होडल उपमंडल नागरिक अस्पताल, दूधौला, सौंदहद, अलावलपुर सामुदायदिक स्वास्थ्य के अलावा अन्य सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्रों में कार्यरत चिकित्सक भी हड़ताल पर रहे।
ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़
डॉक्टरों की हड़ताल के चलते ओपीडी में मरीजों की भीड़ लग गई। सुबह से ही डॉक्टरों को दिखाने के लिए मरीज सुबह 9 बजे से ही पहुंचने शुरू हो गए। डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को नहीं देखा, जिस कारण मरीजों की भीड़ लग गई तथा काफी देर इंतजार करने के बाद मरीज लौट गए। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के दौरान डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान दिखाई दिए। बाद में सिविल सर्जन व एसएमओ ने मोर्चा संभालाते हुए ओपीडी में बैठकर मरीजों की जांच की।
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मैं मंडकौला से डॉक्टर को दिखाने के लिए आया हूं। मुझे जुकाम व बुखार है, लेकिन यहां डॉक्टरों की हड़ताल है। इस कारण मुुझे लौटना पड़ रहा है। जिस तरह से कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है, ऐसे में डॉक्टरों को अस्पताल में होना बेहद जरूरी है।
- प्रिंस मंडकौला
मैं बुखार से पीड़ित हूं तथा आज यहां जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टर जांच कराने आया हूं, लेकिन यहां आकर पता चला कि डॉक्टरों की हड़ताल है। इमरजेंसी में जांच कराई, लेकिन वहां से संतुष्टी नहीं मिली। बिना दवा लिए ही जा रहा हूं।
- श्रवण कुमार, पलवल
ये थीं डॉक्टरों की मांग
चिकित्सकों की मांगे हैं कि एसएमओ का पद सीधी भर्ती करके न भरा जाए। इस पद पर प्रमोशन देकर ही वरिष्ठता के आधार पर भरा जाए। इसके अलावा डॉक्टरों की ऐसीपी, 4,9,13 और 20 साल से मिले। विशेषज्ञों के लिए अलग से कैडर तैयार किया जाए। एसोसिएशन द्वारा इन मांगों को सरकार को दिया जा चुका है, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया है। यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो 14 जनवरी से इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर पूर्ण हड़ताल शुरू की जाएगी।
डॉक्टरों की हड़ताल थी, लेकिन अस्पताल में इसका असर नहीं पड़ने दिया गया। ओपीडी सेवाएं जारी रहीं। सिविल सर्जन तथा उनके अलावा अन्य एसएमओ व एनएचएम और आयुष के चिकित्सकों ने ओपीडी में मरीजों की जांच की। मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हुई।
- डॉ. लोकवीर सिंह, एसएमओ पलवल
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जिला नागरिक अस्पताल में सभी सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक हड़ताल पर अस्पताल परिसर में बैठे रहे। डॉक्टरों ने जमकर नारेबाजी भी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो वे आगे आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह से बंद कर देंगे। जिला नागरिक अस्पताल के अलावा हथीन व होडल उपमंडल नागरिक अस्पताल, दूधौला, सौंदहद, अलावलपुर सामुदायदिक स्वास्थ्य के अलावा अन्य सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्रों में कार्यरत चिकित्सक भी हड़ताल पर रहे।
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ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़
डॉक्टरों की हड़ताल के चलते ओपीडी में मरीजों की भीड़ लग गई। सुबह से ही डॉक्टरों को दिखाने के लिए मरीज सुबह 9 बजे से ही पहुंचने शुरू हो गए। डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को नहीं देखा, जिस कारण मरीजों की भीड़ लग गई तथा काफी देर इंतजार करने के बाद मरीज लौट गए। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के दौरान डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान दिखाई दिए। बाद में सिविल सर्जन व एसएमओ ने मोर्चा संभालाते हुए ओपीडी में बैठकर मरीजों की जांच की।
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मैं मंडकौला से डॉक्टर को दिखाने के लिए आया हूं। मुझे जुकाम व बुखार है, लेकिन यहां डॉक्टरों की हड़ताल है। इस कारण मुुझे लौटना पड़ रहा है। जिस तरह से कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है, ऐसे में डॉक्टरों को अस्पताल में होना बेहद जरूरी है।
- प्रिंस मंडकौला
मैं बुखार से पीड़ित हूं तथा आज यहां जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टर जांच कराने आया हूं, लेकिन यहां आकर पता चला कि डॉक्टरों की हड़ताल है। इमरजेंसी में जांच कराई, लेकिन वहां से संतुष्टी नहीं मिली। बिना दवा लिए ही जा रहा हूं।
- श्रवण कुमार, पलवल
ये थीं डॉक्टरों की मांग
चिकित्सकों की मांगे हैं कि एसएमओ का पद सीधी भर्ती करके न भरा जाए। इस पद पर प्रमोशन देकर ही वरिष्ठता के आधार पर भरा जाए। इसके अलावा डॉक्टरों की ऐसीपी, 4,9,13 और 20 साल से मिले। विशेषज्ञों के लिए अलग से कैडर तैयार किया जाए। एसोसिएशन द्वारा इन मांगों को सरकार को दिया जा चुका है, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया है। यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो 14 जनवरी से इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर पूर्ण हड़ताल शुरू की जाएगी।
डॉक्टरों की हड़ताल थी, लेकिन अस्पताल में इसका असर नहीं पड़ने दिया गया। ओपीडी सेवाएं जारी रहीं। सिविल सर्जन तथा उनके अलावा अन्य एसएमओ व एनएचएम और आयुष के चिकित्सकों ने ओपीडी में मरीजों की जांच की। मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हुई।
- डॉ. लोकवीर सिंह, एसएमओ पलवल