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धू धू कर जल गया रावण का अंहकार
अमर उजाला, तावडू
Updated Sun, 13 Oct 2013 11:31 PM IST
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रविवार को मां के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्रि की पूजा अर्चना की गई। माता का यह स्वरूप सिद्धियों को प्राप्त करने का है। माता की पूजा अर्चना कर भक्त सिद्धियों का आह्वान करते हैं।
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आखरी नवरात्र होने पर नवमी के दिन भक्तों ने माता की अर्चना कर कन्या पूजन किया। कन्याओं की मांग बढ़ने से भक्तों को दूर दराज तक कन्याओं को ढूंढने में मशक्कत करनी पड़ी।
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वहीं, कस्बा सहित पूरे मेवात में बीती रात माता के जागरणों की धूम रही, तो अगली सुबह भंडारा किया। तावड़ू, नूंह, पुन्हाना, नगीना व फिरोजपुर झिरका में कई जगह भंडारा हुआ। माता गड़जीत पथवारी मंदिर में भंडारा हुआ। प्रबंधक कमेटी से जुडे़ योगेश गेरा, कुक्की, गोसी, कालू ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार भी जागरण किया। सुबह भंडारा छकाया।
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तावड़ू सहित आसपास के क्षेत्रों में दशहरा का पर्व धूमधाम से मनाया। रावण दहन स्थल पर पहली बार 40 फुट ऊंचा रावण बनाया गया। रावण को दहन करने के लिए कस्बा में भगवान भोलेनाथ, माता शेरावाली, श्रीराम, लक्ष्मण, सीता अन्य देवी-देवताओं व सामाजिक क्षेत्र की झांकियों ने नगर परिक्रमा की।
रावण दहन देखने के लिए आसपास के गांवों से लोग बढ़ी तादाद में आए।
सुरक्षा के लिए पुलिस व रामलीला क्लब के सदस्यों ने कमान संभाली। झांकियों के आगे ढोल, नगाड़ों, बैंड बाजों पर लोग नाचते गाते चल रहे थे। देर शाम रावण वध के बाद पुतलों में आग लगाई गई।