फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Palwal News ›   Death is the least punishment for this heinous crime

Palwal News: इस क्रूर अपराध के लिए मौत ही कम से कम सजा है

Thu, 08 Jun 2023 10:42 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jun 2023 10:42 PM IST
विज्ञापन
Death is the least punishment for this heinous crime
यौन भूख मिटाने के लिए ऐसा जीवन समाप्त किया, जो अभी खिलना बाकी था
विज्ञापन

न्यायाधीश प्रशांत राणा ने फांसी की सजा सुनाते वक्त की टिप्पणी
पीड़ित परिजनों को 30 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश

प्रवीण बैंसला
पलवल। मूकबधिर बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म कर हत्या के मामले में सजा सुनाते समय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत राणा ने कहा कि अपनी यौन भूख मिटाने के लिए बेरहमी से एक ऐसा जीवन समाप्त कर दिया, जो अभी खिलना बाकी था। बोलने व सुनने में असक्षम, मानसिक रूप से कमजोर नौ साल आठ महीने की बच्ची के साथ किए गए क्रूर अपराध के लिए मौत ही कम से कम सजा है। दोषियों द्वारा अपराध करने का तरीका बेहद क्रूर था। साफी से हाथों को बांधकर तीन बार दुष्कर्म किया गया। असहनीय दर्द से पीड़िता बेहोश हो गई। आरोपियों ने बीड़ी से दोनों आंखे जला दीं। पीड़िता के गर्दन की हड्डी टूटी मिली। बेरहमी से गला व मुंह दबाया गया। गर्दन दबाकर हत्या कर दी गई। पीड़िता के शरीर पर आठ गंभीर चोटें मिलीं। अपराध का यह तरीका दोषियों की क्रूर मानसिकता को दर्शाता है।
दरअसल, अगस्त 2020 में होडल थाना अंतर्गत एक 10 साल की मूकबधिर के साथ दरिंदगी की गई। 24 अगस्त को बच्ची को ज्वार के खेत में ले जाकर दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर दी। मामले में अदालत ने 21 साल के अजय व 27 साल के पुरुषोत्तम को फांसी की सजा सुनाई है। 29 पेज की फैसले की कॉपी में न्यायाधीश प्रशांत राणा ने कई अन्य मामलों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पीड़िता बच्ची का परिवार बीपीएल की श्रेणी में है। उसके पिता 86 प्रतिशत अपाहिज हैं। मां, बहन व भाई भी मूकबधिर हैं। दिव्यांग होने के बावजूद पिता मजदूरी कर बच्चों को पालते हैं। उन्होंने कभी किसी को हानि नहीं पहुंचाई। पीड़िता का परिवार पूरी तरह से असहाय है। उसके बावजूद उसकी बेटी के साथ यह बर्बरता की गई, जोकि असहनीय है। फैसले में कहा गया कि दोषी बालिग हैं। दोषी पुरुषोत्तम शादीशुदा है, जबकि अजय अविवाहित है। दोनों दोषियों की बर्बरता के कारण एक पांचवी कक्षा की छात्रा अपनी किशोरावस्था व जवानी नहीं देख पाई है। दोनों दोषियों में इसका पछतावा नहीं दिखा।
विज्ञापन

माता-पिता को 30 लाख रुपये देने के निर्देश
फैसले में न्यायाधीश प्रशांत राणा ने कहा कि पीड़िता के माता-पिता असहाय व गरीब हैं। पीड़ित मुआवजा योजना के तहत उन्हें 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। 7.5 लाख रुपये परिजनों को दिए जा चुके हैं, बाकी 22.5 लाख रुपये जल्द दिए जाएं। माता व पिता के खाते में 11.25 लाख रुपये अलग-अलग डाले जाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed