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Palwal News: गांव शेषसाई में जया एकादशी पर आयोजित मेले में भक्तों का उमड़ा सैलाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 06:40 PM IST
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Crowd of devotees gathered in the fair organized on Jaya Ekadashi in village Sheshsai.
सुरक्षा में तैनात रही पुलिस की तीन कंपनियां
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संवाद न्यूज एजेंसी

होडल। गांव शेषसाई स्थित भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर पर बृहस्पतिवार को जया एकादशी के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया गया। यहां सुबह से ही भक्तों का जमावड़ा लगने लगा। मेले के दौरान सुरक्षा के लिए पुलिस ने पुख्ता इंतजाम कर सुरक्षा बलों की तीन कंपनी तैनात रही। कंपनी कमांडर डीएसपी साहिल ढिल्लो के अलावा हसनपुर थाना प्रभारी दिनेश कुमार तैनात रहे।
मेला कमेटी ने मंदिर और आसपास के स्थल को फूल मालाओं से सजाया था। मेले में दूरदराज से आने वाले भक्तों ने मंदिर में पहुंचकर पहले भगवान लक्ष्मीनारायण के दर्शन किए। उसके बाद मंदिर की परिक्रमा की। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के लिए व्यवस्था चाक-चौबंद कर रखी थी। कंपनी कमांडर डीएसपी साहिल ढिल्लों ने बताया कि मेले में भक्तों की सुरक्षा को देखते हुए हसनपुर थाने के अलावा होडल थाना सहित मुंडकटी थाना पुलिस सीआईए होडल के अलावा जिला पुलिस लाइन तीन कंपनियों में अतिरिक्त महिला व पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती रही।
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यह है दर्शन का महत्व--



गांव शेषसाई निवासी राजाराम, चैतन्य गोस्वामी, कृष्ण प्रिय उद्धव जी महाराज, रामेश्वर गोस्वामी आदि ने बताया कि जया एकादशी पर भगवान लक्ष्मीनारायण के दर्शन का विशेष महत्व है। जया एकादशी पर भगवान जगन्नाथ स्वयं आकर भक्तों को दर्शन देते हैं और उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि गांव खिरबी में दो भाई रामदास और श्यामदास थे। दोनों भाइयों को कोढ़ की बीमारी हो गई तो किसी संत ने उन्हें भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की सलाह दी। दोनों भाई भगवान जगन्नाथ के गांव से डंडोती देते हुए निकल लिए। वे दोनों भाई गांव शेषसाई में पहुंचे और विश्राम करने के लिए यहीं रुक गए। जब वे विश्राम कर रहे थे तो भगवान जगन्नाथ उनके सपने में आए और बोले, तुम मुझ तक नहीं पहुंच सकते। क्योंकि तुम्हारी आयु समाप्त होने वाली है। भगवान ने उन्हें बताया कि सुबह के वक्त जिस कदंब के पेड़ के नीचे गाय दूध दे, वहीं खोदकर देखना तुम्हें मेरी मूर्ति प्राप्त होगी। सुबह के वक्त जैसे ही गाय ने कदंब के पेड़ के नीचे दूध दिया, दोनों भाइयों ने वहीं खोदाई की और मूर्ति निकाली ली। इसके बाद वहीं मंदिर स्थापित कर दिया गया। भगवान ने उन दोनों भक्तों को दोबारा से सपने में बताया कि जया एकादशी पर स्वयं भगवान आकर मंदिर में भक्तों को दर्शन देंगे। उन्होंने बताया कि इसीलिए जया एकादशी पर मंदिर में मेले का आयोजन किया जाता है।
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