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चौपालों पर बरसेगा रंग, हुरियारों संग होली खेलेंगी महिलाएं

Sat, 27 Mar 2021 10:35 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 27 Mar 2021 10:35 PM IST
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Colors will rain on chaupalas, women will play Holi with Hurriyas
पलवल। दुल्हैंडी के दूसरे दिन जिले के सौंदहद, बंचारी, दीघोट, खांबी आदि गांवों में लगने वाले फूलडोल मेले (हुरंगा) की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। जहां नगाड़ों को तैयार कर लिया है, वहीं गांव में चौपालों पर रंग बरसाने की तैयारी की जा रही है। इस बार सौंदहद गांव में मेले में 25 चौपालों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जहां हुरियारों द्वारा महिलाओं पर बड़ी पिचकारियों से रंग बरसाया जाएगा, वहीं महिलाएं नगाड़ों व होली के लोकगीतों पर नृत्य करते हुए पुरुषों पर रंग के अलावा लठमार होली खेलेंगी।
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फूलडोल मेला ब्रज की होली के उल्लास को संजोय हुए हैं। इसमें सभी जातियों और गांवों के परिवारों के लोग आपसी मतभेद भुलाकर हिस्सा लेते हैं। आस्था के कारण न तो इनमें किसी प्रकार का झगड़ा होता है और न ही व्यवस्था भंग होती है। बाहर से आने वाले महमानों की भी खूब खातिरदारी होती है। बंचारी व सौंदहद में बड़ी-बड़ी पिचकारियों से रंग डालने के दौरान बेशक कुछ लोगों की आंखों में हर साल दिक्कत होती है, लेकिन कोई ग्रामीण इसकी शिकायत नहीं करता। हर साल वही उल्लास और उसी जोश के साथ ग्रामीण इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। पिचकारियों को खास आर्डर देकर बनवाया जाता है। गांवों में हुरंगा से पहले और बाद में रात्रि को विभिन्न स्थानों पर होली के रसिया, चौपाइयों का कार्यक्रम होता है, लेकिन कभी आपस में खींचतान नहीं होती। नेता भी वोटबैंक के चक्कर में सभी स्थानों पर जाकर दान करके आते हैं। मेले का शुभारंभ प्राचीन मंदिरों में पूजा-अर्चना के बाद होता है।
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दीघोट में निकलती हैं झांकियां
दीघोट गांव के मेले में झांकियां निकलती हैं। आस्था का जादू इस कदर सिर चढ़कर बोलता है कि लोग झांकियों में शामिल कलाकारों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और दिल खोलकर दान भी देते हैं। साधु-संत अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों को धार्मिक प्रवृति से जोड़े रखते हैं। वहीं औरंगाबाद, मितरौल, मानपुर, बहीन आदि गांवों में चौपाई व होरी आदि कार्यक्रम होली के कई दिन बाद तक चलते रहते हैं। महिलाएं घूंघट में सिर पर थाली व बेला आदि रखकर लोकनृत्य करती हैं, जबकि बुजुर्ग और नगाड़ा पार्टी दूर से ही चौपाई गाते हैं। ग्रामीण छतों पर बैठकर इसका आनंद लेते हैं। भजनोपदेशक व रागनी गायक भी ऐतिहासिक किस्सों का वर्णन कर लोगों को अच्छाई के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। गांव खांबी में युवाओं की टोलियां ढोलक, झांझ, मंजीरा, चिमटा, हारमोनियम आदि लेकर एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले तक समूह बनाकर जाते हैं। इसमें भी भगवान कृष्ण पर आधारित गीत गाए जाते हैं।
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