{"_id":"6a9f0569bbd97e115c051844","slug":"children-shaping-their-future-under-the-shadow-of-fear-palwal-news-c-25-1-mwt1001-115283-2026-09-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Palwal News: खौफ के साये में भविष्य संवार रहे बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Palwal News: खौफ के साये में भविष्य संवार रहे बच्चे
विज्ञापन
नूंह में 45 स्कूलों के 192 कमरे घोषित हैं जर्जर
दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला छात्रावास ढहने से छह की मौत के बाद उठी चिंता
शेरसिंह डागर
नूंह। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला छात्रावास ढहने से हुई मौतों ने एक बार फिर जर्जर इमारतों में रहने और पढ़ने वाले लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नूंह में ऐसे हादसे की आशंका वाले सरकारी स्कूल काफी संख्या में हैं। जिले में 45 सरकारी स्कूलों के 192 कमरे जर्जर बताए गए हैं। इनमें कई कमरों की छतों और दीवारों में दरारें हैं और प्लास्टर उखड़ चुका है।
नूंह जिले में सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में 192 जर्जर कमरों का आंकड़ा केवल भवनों की खराब स्थिति नहीं, बल्कि सीधे तौर पर विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। सबसे अधिक स्थिति पुन्हाना खंड की सामने आती है, जहां 25 स्कूलों के 96 कमरे जर्जर बताए गए हैं। इसके बाद नूंह खंड में 17 स्कूलों के 90 कमरे और तावडू खंड में तीन स्कूलों के छह कमरे जर्जर हैं।
ग्रामीण ताहिर हुसैन, अशोक कुमार, इलियास का कहना है कि कई जगह स्कूलों में कमरों की पहले ही कमी है। ऐसे में जर्जर कमरे बंद करने के बाद बच्चों को दूसरी कक्षाओं में बैठाना मुश्किल हो जाता है। इसी मजबूरी में कई स्थानों पर बच्चे ऐसे कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिनकी छत और दीवारों की हालत देखकर कभी भी हादसे की आशंका बनी रहती है।
विज्ञापन
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
नूंह में मानसून के दौरान जर्जर स्कूल भवनों की समस्या और गंभीर हो जाती है। पानी के रिसाव से पुरानी छतों और दीवारों पर दबाव बढ़ता है। कई कमरों में प्लास्टर गिरने और छत से मलबा टूटकर गिरने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद यदि ऐसे कमरों में बच्चों की कक्षाएं लगती हैं तो किसी अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है।
हादसे के बाद नहीं, पहले हो कार्रवाई
दिल्ली की घटना के बाद नूंह के अभिभावकों और ग्रामीणों की मांग है कि शिक्षा विभाग जर्जर स्कूल भवनों का तत्काल दोबारा तकनीकी सर्वे कराए। जिन कमरों की मरम्मत संभव है, उनकी तुरंत मरम्मत कराई जाए और जो कमरे पूरी तरह असुरक्षित हैं, उन्हें खाली कराकर गिराने की कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि किसी स्कूल की इमारत को जर्जर घोषित करने के बाद केवल सूची तैयार करना पर्याप्त नहीं है। जब तक बच्चों के लिए वैकल्पिक कमरों की व्यवस्था नहीं होती, तब तक खतरा बना रहता है। स्कूलों में जहां जर्जर कमरे हैं, वहां खतरा के बड़े बोर्ड लगाकर बच्चों की आवाजाही रोकने, वैकल्पिक कक्ष उपलब्ध कराने और नए कमरों के निर्माण की जरूरत है।
खंड स्कूल जर्जर कमरे
नूंह
17
90
पुन्हाना
25
96
तावडू
03
06
कुल
45
192
कोट
मेवात ही नहीं पूरे प्रदेश में आदेश जारी किए गए हैं कि जहां भी जर्जर बिल्डिंग है, वहां बोर्ड लगाया जाए तथा बच्चों को ऐसी जगह पर ना बैठाया जाए। बच्चों को दूर रखा जाए। प्रदेश में नए स्कूलों की बिल्डिंग बनाई जा रही है। जहां कहीं भी बिल्डिंग की आवश्यकता होगी वहां उन्हें बनाया जाएगा। - महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री, हरियाणा
विज्ञापन
दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला छात्रावास ढहने से छह की मौत के बाद उठी चिंता
शेरसिंह डागर
नूंह। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला छात्रावास ढहने से हुई मौतों ने एक बार फिर जर्जर इमारतों में रहने और पढ़ने वाले लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नूंह में ऐसे हादसे की आशंका वाले सरकारी स्कूल काफी संख्या में हैं। जिले में 45 सरकारी स्कूलों के 192 कमरे जर्जर बताए गए हैं। इनमें कई कमरों की छतों और दीवारों में दरारें हैं और प्लास्टर उखड़ चुका है।
नूंह जिले में सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में 192 जर्जर कमरों का आंकड़ा केवल भवनों की खराब स्थिति नहीं, बल्कि सीधे तौर पर विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। सबसे अधिक स्थिति पुन्हाना खंड की सामने आती है, जहां 25 स्कूलों के 96 कमरे जर्जर बताए गए हैं। इसके बाद नूंह खंड में 17 स्कूलों के 90 कमरे और तावडू खंड में तीन स्कूलों के छह कमरे जर्जर हैं।
विज्ञापन
ग्रामीण ताहिर हुसैन, अशोक कुमार, इलियास का कहना है कि कई जगह स्कूलों में कमरों की पहले ही कमी है। ऐसे में जर्जर कमरे बंद करने के बाद बच्चों को दूसरी कक्षाओं में बैठाना मुश्किल हो जाता है। इसी मजबूरी में कई स्थानों पर बच्चे ऐसे कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिनकी छत और दीवारों की हालत देखकर कभी भी हादसे की आशंका बनी रहती है।
विज्ञापन
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
नूंह में मानसून के दौरान जर्जर स्कूल भवनों की समस्या और गंभीर हो जाती है। पानी के रिसाव से पुरानी छतों और दीवारों पर दबाव बढ़ता है। कई कमरों में प्लास्टर गिरने और छत से मलबा टूटकर गिरने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद यदि ऐसे कमरों में बच्चों की कक्षाएं लगती हैं तो किसी अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है।
हादसे के बाद नहीं, पहले हो कार्रवाई
दिल्ली की घटना के बाद नूंह के अभिभावकों और ग्रामीणों की मांग है कि शिक्षा विभाग जर्जर स्कूल भवनों का तत्काल दोबारा तकनीकी सर्वे कराए। जिन कमरों की मरम्मत संभव है, उनकी तुरंत मरम्मत कराई जाए और जो कमरे पूरी तरह असुरक्षित हैं, उन्हें खाली कराकर गिराने की कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि किसी स्कूल की इमारत को जर्जर घोषित करने के बाद केवल सूची तैयार करना पर्याप्त नहीं है। जब तक बच्चों के लिए वैकल्पिक कमरों की व्यवस्था नहीं होती, तब तक खतरा बना रहता है। स्कूलों में जहां जर्जर कमरे हैं, वहां खतरा के बड़े बोर्ड लगाकर बच्चों की आवाजाही रोकने, वैकल्पिक कक्ष उपलब्ध कराने और नए कमरों के निर्माण की जरूरत है।
खंड स्कूल जर्जर कमरे
नूंह
17
90
पुन्हाना
25
96
तावडू
03
06
कुल
45
192
कोट
मेवात ही नहीं पूरे प्रदेश में आदेश जारी किए गए हैं कि जहां भी जर्जर बिल्डिंग है, वहां बोर्ड लगाया जाए तथा बच्चों को ऐसी जगह पर ना बैठाया जाए। बच्चों को दूर रखा जाए। प्रदेश में नए स्कूलों की बिल्डिंग बनाई जा रही है। जहां कहीं भी बिल्डिंग की आवश्यकता होगी वहां उन्हें बनाया जाएगा। - महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री, हरियाणा