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मुख्यमंत्री जी कमीशन दूंगा तभी धान खरीदा जाएगा क्या मेरा
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होडल। मुख्यमंत्री जी! क्या हमारे घर दीवाली का त्योहार नही है। जो हमारी धान की फसल को खरीदा नहीं जा रहा है। अधिकारियों की मनमानी व कमीशन न मिलने पर हमारी फसल ही नहीं खरीदी गई। इस बार आपकी सरकार में किसानों की दिवाली पूरी तरह से बेकार हो गई है। यह कहना है होडल अनाज मंडी में धान की फसल बेचने के इंतजार में 10 दिन से पड़े किसानों का। किसानों का आरोप है कि कमीशन के नाम पर पैसे दे दो तो साथ-साथ फसल की बिक्री हो जाती है, परंतु पैसे नही देने पर वारदाना नहीं मिलता। फिर उन्हें मजबूरन मंडी में फसल के साथ पड़ा रहना पड़ रहा है। यह हाल होडल, हसनपुर व अन्य मंडियों में है।
किसानों का कहना है कि प्रदेश व केंद्र की सरकार किसानों का आय दोगुना करने के लिए नित नए उपाय कर रही है, लेकिन हकीकत के धरातल पर हो कुछ और ही हो रहा है। प्रशासनिक अमले की नाकामियों का खामियाजा अन्नदाता (किसान) भुगतने को मजबूर हैं। होडल की अनाज मंडी में धान की बिक्री के समय यह देखा जा सकता है। वैसे तो मंडी में धान खरीद का आंकड़ा कागजों में दिनों दिन बढ़ रहा है, लेकिन सच यह है कि किसानों के धान क्रय केंद्र पर नहीं खरीदे जा रहे हैं। अगर किसी तरह धान किसान बेच भी पा रहा है तो इसके बदले उसे कमीशन के रूप में मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि कमीशन न देने वाले किसानों को थक-हार कर बिचौलियों के हाथों अपना धान बेचना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि विभागीय मिलीभगत से सारा खेल खेला जा रहा है। जहां पर किसानों से प्रति क्विंटल 300 रुपये कमीशन मांगा जा रहा है। रुपये न देने पर सब कुछ ठीक-ठाक होने के बाद भी तौल नहीं हो पा रही है।
हैरत की बात तो यह है कि यह स्थिति तब है जब सरकार ने एक मंडी में तीन सचिव होने के बावजूद खरीद व्यवस्था पारदर्शी होने की बात कह रहे हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता की वजह से किसान धान का वाजिब मूल्य पाने से वंचित हो रहा है। इसकी वजह से किसानों को प्रति क्विंटल 350 से 400 रुपये प्रति कुंतल का नुकसान उठाना पड़ रह है। किसानों का आरोप है कि धान खरीद की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी खरीद नहीं हो पा रही है। क्रय केंद्रों पर प्रति क्विंटल कमीशन मांगा जा रहा है। न देने पर धान में नमी व कचरा बताकर लौटा दिया जा रहा है। यही नहीं बिचौलियों के यहां कांटा लगाकर धान की खरीद कर विभाग लक्ष्य को पूरा करने में जुटा है।
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क्या कहते है किसान
मुझे मंडी में फसल को लाए हुए दस से बारह दिन बीत गए लेकिन धान की फसल की खरीद तो हो गए परन्तु कमीशन नही देने के बाद अभी तक बारदाना नही दिया जिसकी शिकायत जिला उपायुक्त से भी की लेकिन कोई सुनवाई नही हुई ।अधिकारी से लेकर कर्मचारी आपस मे मिले हुए है।
- धर्मबीर, किसान
मंडी में फसल लाते समय नियम है कि गेट पास कटना होता है, लेकिन चार दिन से मंडी के अधिकारियों के पीछे गेट पास कटाने के लिए चक्कर लगा रहा हूं । मंडी में कोई सुनवाई नही है। यहां तक पीने के पानी की व्यवस्था नही है।
- प्रकाश, किसान
दीपावली का त्योहार है, लेकिन खरीद एजेंसियों के अधिकारियों के सामने खरीद के लिए गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। अधिकारी मिलरों के माध्यम से कमीशन की बात करते है। सरकार किसी भी जांच एजेंसी से जांच कराए सब खुलासा हो जाएगा।
- शेरसिंह, किसान
इस बारे में जांच कराई जाएगी। यदि कोई भी इस मामले में दोषी मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसानों का धान पूरा और समर्थन मूल्य पर ही खरीदा जाएगा।
- वकील अहमद, एसडीएम
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किसानों का कहना है कि प्रदेश व केंद्र की सरकार किसानों का आय दोगुना करने के लिए नित नए उपाय कर रही है, लेकिन हकीकत के धरातल पर हो कुछ और ही हो रहा है। प्रशासनिक अमले की नाकामियों का खामियाजा अन्नदाता (किसान) भुगतने को मजबूर हैं। होडल की अनाज मंडी में धान की बिक्री के समय यह देखा जा सकता है। वैसे तो मंडी में धान खरीद का आंकड़ा कागजों में दिनों दिन बढ़ रहा है, लेकिन सच यह है कि किसानों के धान क्रय केंद्र पर नहीं खरीदे जा रहे हैं। अगर किसी तरह धान किसान बेच भी पा रहा है तो इसके बदले उसे कमीशन के रूप में मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि कमीशन न देने वाले किसानों को थक-हार कर बिचौलियों के हाथों अपना धान बेचना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि विभागीय मिलीभगत से सारा खेल खेला जा रहा है। जहां पर किसानों से प्रति क्विंटल 300 रुपये कमीशन मांगा जा रहा है। रुपये न देने पर सब कुछ ठीक-ठाक होने के बाद भी तौल नहीं हो पा रही है।
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हैरत की बात तो यह है कि यह स्थिति तब है जब सरकार ने एक मंडी में तीन सचिव होने के बावजूद खरीद व्यवस्था पारदर्शी होने की बात कह रहे हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता की वजह से किसान धान का वाजिब मूल्य पाने से वंचित हो रहा है। इसकी वजह से किसानों को प्रति क्विंटल 350 से 400 रुपये प्रति कुंतल का नुकसान उठाना पड़ रह है। किसानों का आरोप है कि धान खरीद की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी खरीद नहीं हो पा रही है। क्रय केंद्रों पर प्रति क्विंटल कमीशन मांगा जा रहा है। न देने पर धान में नमी व कचरा बताकर लौटा दिया जा रहा है। यही नहीं बिचौलियों के यहां कांटा लगाकर धान की खरीद कर विभाग लक्ष्य को पूरा करने में जुटा है।
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क्या कहते है किसान
मुझे मंडी में फसल को लाए हुए दस से बारह दिन बीत गए लेकिन धान की फसल की खरीद तो हो गए परन्तु कमीशन नही देने के बाद अभी तक बारदाना नही दिया जिसकी शिकायत जिला उपायुक्त से भी की लेकिन कोई सुनवाई नही हुई ।अधिकारी से लेकर कर्मचारी आपस मे मिले हुए है।
- धर्मबीर, किसान
मंडी में फसल लाते समय नियम है कि गेट पास कटना होता है, लेकिन चार दिन से मंडी के अधिकारियों के पीछे गेट पास कटाने के लिए चक्कर लगा रहा हूं । मंडी में कोई सुनवाई नही है। यहां तक पीने के पानी की व्यवस्था नही है।
- प्रकाश, किसान
दीपावली का त्योहार है, लेकिन खरीद एजेंसियों के अधिकारियों के सामने खरीद के लिए गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। अधिकारी मिलरों के माध्यम से कमीशन की बात करते है। सरकार किसी भी जांच एजेंसी से जांच कराए सब खुलासा हो जाएगा।
- शेरसिंह, किसान
इस बारे में जांच कराई जाएगी। यदि कोई भी इस मामले में दोषी मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसानों का धान पूरा और समर्थन मूल्य पर ही खरीदा जाएगा।
- वकील अहमद, एसडीएम