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किसानों के धरने को चौबीसी पाल का समर्थन
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पलवल। यहां अटोहां मोड़ पर कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसानों के धरने में लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है। किसानों ने जहां रविवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर धरना स्थल पर तिरंगा झंडा फहराया, वहीं सरकार पर उनकी आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। धरने की अध्यक्षता हेतराम लोहिना ने की। संचालन दरियाब सौरौत बनचारी ने किया। धरने में चौबीसी पाल के किसानों ने भाग लिया। महिला किसानों ने गीत संगीत के माध्यम से सरकार पर कटाक्ष किए।
इस मौके पर किसानों ने सर्वसम्मति से सिसौली घटना को लेकर जिला प्रशासन द्वारा किसानों पर दायर किए झूठे मुकदमों को रद्द करने की मांग की। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय नेता बादल सरोज व खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय नेता विक्रम सिंह ने बताया कि आजादी के 75 साल बीतने के बाद भी देश के किसानों-मजदूरों, शोषितों-पीड़ितों को उनकी अथक मेहनत के परिणाम स्वरूप प्रगति का फल नहीं मिल पाया। सार्वजनिक क्षेत्र के जरिए देश ने विर्निमाण के क्षेत्र में जो क्षमताएं तथा आत्मनिर्भरता हासिल की, उन्हें अब कमजोर किया जा रहा है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतनसिंह सौरौत ने कहा कि केंद्र सरकार को एक नीति बनाकर ऐसी बुनियादी सुविधाओं तथा उसके ढांचे की स्थापना सुनिश्चित करना चाहिए, जिससे उद्योग घराने तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां किसानों का शोषण न कर सकें। धरने में शामिल किसानों को उदयवीर सरपंच, रमेशचंद सौरौत, रूपराम तेवतिया, राजेन्द्र बैंसला, चेतराम मेंबर, जोगेंद्र मर्रौली, निसार कोट, रामबाबू जाटव, रणजीत, गोविंदराम खिरबी, पोहपसिंह डागर, अच्छेलाल, भागीरथ बैनीवाल, रघुबीरसिंह, शरफ़ुद्दीन व कुलभान कुमार छाता ने भी संबोधित किया।
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इस मौके पर किसानों ने सर्वसम्मति से सिसौली घटना को लेकर जिला प्रशासन द्वारा किसानों पर दायर किए झूठे मुकदमों को रद्द करने की मांग की। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय नेता बादल सरोज व खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय नेता विक्रम सिंह ने बताया कि आजादी के 75 साल बीतने के बाद भी देश के किसानों-मजदूरों, शोषितों-पीड़ितों को उनकी अथक मेहनत के परिणाम स्वरूप प्रगति का फल नहीं मिल पाया। सार्वजनिक क्षेत्र के जरिए देश ने विर्निमाण के क्षेत्र में जो क्षमताएं तथा आत्मनिर्भरता हासिल की, उन्हें अब कमजोर किया जा रहा है।
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतनसिंह सौरौत ने कहा कि केंद्र सरकार को एक नीति बनाकर ऐसी बुनियादी सुविधाओं तथा उसके ढांचे की स्थापना सुनिश्चित करना चाहिए, जिससे उद्योग घराने तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां किसानों का शोषण न कर सकें। धरने में शामिल किसानों को उदयवीर सरपंच, रमेशचंद सौरौत, रूपराम तेवतिया, राजेन्द्र बैंसला, चेतराम मेंबर, जोगेंद्र मर्रौली, निसार कोट, रामबाबू जाटव, रणजीत, गोविंदराम खिरबी, पोहपसिंह डागर, अच्छेलाल, भागीरथ बैनीवाल, रघुबीरसिंह, शरफ़ुद्दीन व कुलभान कुमार छाता ने भी संबोधित किया।
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