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आज और कल को बारिश की संभावना
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पलवल। गेहूं, जौ, सरसों सहित अन्य रवि की फसलों में बालियां निकलने तथा फलिया बनने की अवस्था में खड़ी हैं। इस समय सभी फसलों को शांत व साफ मौसम चाहिए, परंतु आगामी दिनों में मौसम विभाग द्वारा वर्षा व हवा चलने की भविष्यवाणी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के अनुसार क्षेत्र में 25 व 26 फरवरी तथा दो मार्च को गरज चमक व हवाओं के साथ कहीं-कहीं बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ.महावीर सिंह मलिक ने कहा कि इस समय होने वाली बारिश से सभी फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना बनी रहती है। गेहूं, जो में बालियां बनने पर हवाओं के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी से भी इनके गिरने से फसलों की पैदावार में भारी कमी आ जाती है। सरसों फसल में फलिया व दाना बनने पर बारिश से उनके झड़ने तथा गिरने व गुणवत्ता खराब होने से काफी नुकसान हो सकता है। गन्ना फसल व चारा जई फसल गिरने से इनकी कटाई लागत बढ़ जाने से उपज में कमी आर्थिक नुकसान हो जाता है। टमाटर, आलू, बैंगन, मिर्च में रोग व कीट भी बढ़ने लगते हैं। फलदार पौधों में फूल और फल कम बनते है। डॉ. मलिक ने कहा कि किसान बारिश की संभावना को देखते हुए गेहूं,जो, गन्ना आदि फसलों में कुछ दिनों के लिए सिंचाई रोक ले। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी कुछ समय के लिए टाल दें। फसलों में सिंचाई मौसम साफ होने पर हवा बंद हो उन दिनों में करें। सब्जियों में निराई गुड़ाई कर सकते हैं। बसंत कालीन गन्ना व मूंग बिजाई के लिए खेत तैयार करें। वर्षा में हवा से फसल गिरने पर उससे छेड़छाड़ न करें। खेत में पानी खड़ा न हो निकासी का उचित प्रबंध करें।
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कृषि विशेषज्ञ डॉ.महावीर सिंह मलिक ने कहा कि इस समय होने वाली बारिश से सभी फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना बनी रहती है। गेहूं, जो में बालियां बनने पर हवाओं के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी से भी इनके गिरने से फसलों की पैदावार में भारी कमी आ जाती है। सरसों फसल में फलिया व दाना बनने पर बारिश से उनके झड़ने तथा गिरने व गुणवत्ता खराब होने से काफी नुकसान हो सकता है। गन्ना फसल व चारा जई फसल गिरने से इनकी कटाई लागत बढ़ जाने से उपज में कमी आर्थिक नुकसान हो जाता है। टमाटर, आलू, बैंगन, मिर्च में रोग व कीट भी बढ़ने लगते हैं। फलदार पौधों में फूल और फल कम बनते है। डॉ. मलिक ने कहा कि किसान बारिश की संभावना को देखते हुए गेहूं,जो, गन्ना आदि फसलों में कुछ दिनों के लिए सिंचाई रोक ले। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी कुछ समय के लिए टाल दें। फसलों में सिंचाई मौसम साफ होने पर हवा बंद हो उन दिनों में करें। सब्जियों में निराई गुड़ाई कर सकते हैं। बसंत कालीन गन्ना व मूंग बिजाई के लिए खेत तैयार करें। वर्षा में हवा से फसल गिरने पर उससे छेड़छाड़ न करें। खेत में पानी खड़ा न हो निकासी का उचित प्रबंध करें।
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