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Palwal News: बिना अनुमति बाहरी व्यक्ति के स्कूल में प्रवेश पर रोक
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फोटो-वीडियोग्राफी करने पर भी मनाही; उल्लंघन पर पुलिस को सूचना देने के निर्देश
शेरसिंह डागर
नूंह। मेवात के सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे फोटो और वीडियो के बीच जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी एक आदेश ने सवाल खड़े कर दिए हैं। 16 सितंबर को जारी कार्यालय आदेश में बिना विभागीय अनुमति किसी बाहरी अथवा अनधिकृत व्यक्ति के स्कूल परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने के साथ-साथ स्कूल भवन, कक्षा-कक्ष और स्कूल से संबंधित गतिविधियों की फोटो-वीडियोग्राफी पर भी रोक लगा दी गई है। आदेश में यहां तक कहा गया है कि यदि कोई बाहरी या अनधिकृत व्यक्ति बिना अनुमति स्कूल परिसर में आता है तो संबंधित स्कूल मुखिया तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना दें और उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराएं।
आदेश ऐसे समय जारी हुआ है, जब मेवात के कुछ युवा लगातार सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की जमीनी हकीकत, सुविधाओं की कमी, भवनों की स्थिति, सफाई, शौचालय, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े फोटो-वीडियो सार्वजनिक कर रहे हैं। इन तस्वीरों ने स्कूलों की व्यवस्था को लेकर विभाग और प्रशासन के सामने सवाल खड़े किए हैं। अब आदेश के बाद इन युवाओं के स्कूलों में जाकर व्यवस्थाओं को कैमरे में कैद करने के प्रयास पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
अनुशासन की आड़ में आदेश जारी
शिक्षा विभाग का आदेश सुरक्षा और अनुशासन के नाम पर जारी किया गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी सरकारी स्कूल में वास्तव में कोई कमी है तो उसे सामने लाने और उसके समाधान की व्यवस्था क्या होगी? सरकारी स्कूल जनता के पैसे से संचालित होते हैं और वहां पढ़ने वाले बच्चे पूरे समाज की जिम्मेदारी हैं। ऐसे में यदि किसी स्कूल की छत, भवन, शौचालय, पानी, सफाई या अन्य सुविधा में कमी दिखाई देती है तो तस्वीर या वीडियो उस समस्या का दस्तावेज बन सकता है। समस्या को कैमरे से बाहर रखने के बजाय समस्या को स्कूल से बाहर करना ज्यादा जरूरी है।
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लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से स्कूल में प्रवेश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन ऐसे आदेश की जरूरत भी है जिससे वास्तविक कमियों की शिकायत, निरीक्षण और तथ्य सामने लाने का रास्ता बंद न हो।
सीजेपी के स्कूल पहुंचने पर बुलाई थी पुलिस
पिछले सप्ताह नूंह उपमंडल के गांव सूड़ाका के सरकारी स्कूल में सीजेपी के स्थानीय नेताओं ने जाकर स्कूल की खामियों को उजागर किया था। जिस पर स्कूल प्रबंधन ने पुलिस बुला ली थी, हालांकि वह मामला वहीं समाप्त हो गया था। ऐसे में नियमित रूप से स्थानीय लोगों द्वारा व मीडिया द्वारा स्कूलों की खामियों को उजागर करने से रोकने के लिए शिक्षा विभाग के इस कदम को माना जा रहा है।
लोगों से बातचीत
मेवात में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। यदि युवा इन कमियों को सामने ला रहे हैं तो इसे केवल स्कूल में प्रवेश और फोटो खींचने का मामला मानने के बजाय उन कमियों की सत्यता जांचने का अवसर भी माना जा सकता है। - रामनारायण कौशिक
अगर तस्वीर में स्कूल की व्यवस्था ठीक दिखाई देती है तो विभाग को डर किस बात का है और अगर तस्वीर में कमी दिखाई देती है तो उस कमी को दूर करने की जरूरत है, कैमरा रोकने की नहीं। यही सवाल अब लोगों की जुबान पर है। - - ताहिर हुसैन
शिक्षा व्यवस्था की असली परीक्षा कागजों पर नहीं, बल्कि स्कूल के कमरे, शौचालय, पानी, मैदान और बच्चों को मिल रही सुविधाओं में होती है। यदि किसी स्कूल की व्यवस्था खराब है तो उसे उजागर करने वाले व्यक्ति को रोकने के बजाय जांच करनी चाहिए। - खलील अहमद एडवोके
विभाग चाहे तो स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश के लिए स्पष्ट अनुमति व्यवस्था बनाए, बच्चों की निजता की सुरक्षा के लिए नियम तय करे और फोटो-वीडियोग्राफी के लिए पारदर्शी प्रक्रिया निर्धारित करे। लेकिन व्यवस्था की कमियां सामने आने के रास्ते बंद करना सवालों को खत्म नहीं करेगा। - जगदेव एडवोकेट
कोट
छात्रों की सुरक्षा व स्कूल व्यवस्था को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यह निर्णय सभी स्कूलों में लागू होगा, ताकि स्कूल के अंदर बाहरी हस्तक्षेप ना हो। विभाग की कोशिश है जो भी समस्याएं स्कूलों के अंदर हैं उन्हें प्राथमिकता से दूर किया जाए। - राजेंद्र शर्मा, डीईओ
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शेरसिंह डागर
नूंह। मेवात के सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे फोटो और वीडियो के बीच जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी एक आदेश ने सवाल खड़े कर दिए हैं। 16 सितंबर को जारी कार्यालय आदेश में बिना विभागीय अनुमति किसी बाहरी अथवा अनधिकृत व्यक्ति के स्कूल परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने के साथ-साथ स्कूल भवन, कक्षा-कक्ष और स्कूल से संबंधित गतिविधियों की फोटो-वीडियोग्राफी पर भी रोक लगा दी गई है। आदेश में यहां तक कहा गया है कि यदि कोई बाहरी या अनधिकृत व्यक्ति बिना अनुमति स्कूल परिसर में आता है तो संबंधित स्कूल मुखिया तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना दें और उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराएं।
आदेश ऐसे समय जारी हुआ है, जब मेवात के कुछ युवा लगातार सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की जमीनी हकीकत, सुविधाओं की कमी, भवनों की स्थिति, सफाई, शौचालय, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े फोटो-वीडियो सार्वजनिक कर रहे हैं। इन तस्वीरों ने स्कूलों की व्यवस्था को लेकर विभाग और प्रशासन के सामने सवाल खड़े किए हैं। अब आदेश के बाद इन युवाओं के स्कूलों में जाकर व्यवस्थाओं को कैमरे में कैद करने के प्रयास पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
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अनुशासन की आड़ में आदेश जारी
शिक्षा विभाग का आदेश सुरक्षा और अनुशासन के नाम पर जारी किया गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी सरकारी स्कूल में वास्तव में कोई कमी है तो उसे सामने लाने और उसके समाधान की व्यवस्था क्या होगी? सरकारी स्कूल जनता के पैसे से संचालित होते हैं और वहां पढ़ने वाले बच्चे पूरे समाज की जिम्मेदारी हैं। ऐसे में यदि किसी स्कूल की छत, भवन, शौचालय, पानी, सफाई या अन्य सुविधा में कमी दिखाई देती है तो तस्वीर या वीडियो उस समस्या का दस्तावेज बन सकता है। समस्या को कैमरे से बाहर रखने के बजाय समस्या को स्कूल से बाहर करना ज्यादा जरूरी है।
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लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से स्कूल में प्रवेश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन ऐसे आदेश की जरूरत भी है जिससे वास्तविक कमियों की शिकायत, निरीक्षण और तथ्य सामने लाने का रास्ता बंद न हो।
सीजेपी के स्कूल पहुंचने पर बुलाई थी पुलिस
पिछले सप्ताह नूंह उपमंडल के गांव सूड़ाका के सरकारी स्कूल में सीजेपी के स्थानीय नेताओं ने जाकर स्कूल की खामियों को उजागर किया था। जिस पर स्कूल प्रबंधन ने पुलिस बुला ली थी, हालांकि वह मामला वहीं समाप्त हो गया था। ऐसे में नियमित रूप से स्थानीय लोगों द्वारा व मीडिया द्वारा स्कूलों की खामियों को उजागर करने से रोकने के लिए शिक्षा विभाग के इस कदम को माना जा रहा है।
लोगों से बातचीत
मेवात में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। यदि युवा इन कमियों को सामने ला रहे हैं तो इसे केवल स्कूल में प्रवेश और फोटो खींचने का मामला मानने के बजाय उन कमियों की सत्यता जांचने का अवसर भी माना जा सकता है। - रामनारायण कौशिक
अगर तस्वीर में स्कूल की व्यवस्था ठीक दिखाई देती है तो विभाग को डर किस बात का है और अगर तस्वीर में कमी दिखाई देती है तो उस कमी को दूर करने की जरूरत है, कैमरा रोकने की नहीं। यही सवाल अब लोगों की जुबान पर है। - - ताहिर हुसैन
शिक्षा व्यवस्था की असली परीक्षा कागजों पर नहीं, बल्कि स्कूल के कमरे, शौचालय, पानी, मैदान और बच्चों को मिल रही सुविधाओं में होती है। यदि किसी स्कूल की व्यवस्था खराब है तो उसे उजागर करने वाले व्यक्ति को रोकने के बजाय जांच करनी चाहिए। - खलील अहमद एडवोके
विभाग चाहे तो स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश के लिए स्पष्ट अनुमति व्यवस्था बनाए, बच्चों की निजता की सुरक्षा के लिए नियम तय करे और फोटो-वीडियोग्राफी के लिए पारदर्शी प्रक्रिया निर्धारित करे। लेकिन व्यवस्था की कमियां सामने आने के रास्ते बंद करना सवालों को खत्म नहीं करेगा। - जगदेव एडवोकेट
कोट
छात्रों की सुरक्षा व स्कूल व्यवस्था को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यह निर्णय सभी स्कूलों में लागू होगा, ताकि स्कूल के अंदर बाहरी हस्तक्षेप ना हो। विभाग की कोशिश है जो भी समस्याएं स्कूलों के अंदर हैं उन्हें प्राथमिकता से दूर किया जाए। - राजेंद्र शर्मा, डीईओ