फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Palwal News ›   Attempts to burn huts, assaulting farmers in dharna

धरने में किसानों से मारपीट झोपड़ियां जलाने का प्रयास

Thu, 19 Aug 2021 06:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 19 Aug 2021 06:45 PM IST
विज्ञापन
Attempts to burn huts, assaulting farmers in dharna
ीलवल में किसानों के धरने पर जाकर किसानों से मारपीट की घटना का जायजा लेने धरना स्थल पर पहुंचे पूर्? - फोटो : Palwal
पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में केजीपी-केएमपी इंटरचेंज के पास अटोहां मोड़ पर पिछले नौ महीने से धरने पर बैठे किसानों के धरने पर कुछ असामाजिक तत्वों ने जाकर किसानों से मारपीट की। उनके हुक्के और कूलर तोड़ दिए। बैनर फाड़ दिए। इसमें एक व्यक्ति को काफी चोटें आई हैं। किसानों ने इसके खिलाफ पुलिस को शिकायत दी है। सूचना मिलने के बाद पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल धरना स्थल पर पहुंचे।
विज्ञापन

दलाल ने कहा कि ऐसे असामाजिक तत्वों का यदि पुलिस ने इलाज नहीं किया तो उनका इलाज करना आता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भाजपा के कुछ छुटभैये किसान आंदोलन को खत्म कराने के लिए इस तरह की ओछी हरकत कर रहे हैं, वे सुधर जाएं, वरना हम सुधार देंगे।
विज्ञापन

वहीं, किसान आंदोलन स्थल के नजदीक सड़क दुर्घटना में बहरौला निवासी एक युवक की मौत पर कार्यक्रम के शुरुआत में शोकसभा करते हुए दो मिनट का मौन रखकर मृतक के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई। धरने में आए किसानों को बताया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने किसानों द्वारा धरनास्थल पर बनाई गई झोपड़ियों में आग लगाने की कोशिश की गई। प्रशासन से ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

26 अगस्त को होगा किसान-मजदूर सम्मेल
उधर, राजकुमार ओहलियान द्वारा संचालित धरने की अध्यक्षता ज्ञासीराम छाता ने की। किसानों ने मिशन उत्तरप्रदेश के तहत 5 सितंबर को मुज्जफरनगर में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक किसान-मजदूर महापंचायत में भारी संख्या में भाग लेने का फैसला किया। संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 अगस्त को आंदोलन के नौ महीने पूरे होने पर धरना स्थल पर ही किसान मजदूर सम्मेलन आयोजित करने को कहा।
अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव नंदकिशोर शुक्ला व बादल सरोज ने बताया कि इन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रतिरोध का एक जबरदस्त जन उभार सामने आया है। यह आंदोलन हाल के दौर का दुनिया का सबसे बड़ा व मजबूत आंदोलन माना जा रहा है।
किसान नेताओं ने कड़ी निंदा की
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतनसिंह सौरौत व 52 पाल के मुखिया अरुण जेलदार ने कहा कि आठ महीने से ज्यादा समय से शांतिपूर्वक चल रहे किसान धरने पर इस तरह से हमला करना तथा देश के शहीदों व राष्ट्रीय नेताओं की तस्वीरों वाले बैनरों को फाड़ना तथा देशभर से आए किसान नेताओं के साथ मारपीट करना बहुत ही निंदनीय है।

उन्होंने बताया कि आज खेती व किसानी सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण गहरे संकट में फंस रही है, उसे देखते हुए किसानों को जाति धर्म के बंधन से ऊपर उठकर मुकाबला करने की जरूरत है। धरने में किसान नेता धरमचंद, राजेन्द्र बैंसला, इदरिश अलीगढ़, पलविंदर छत्तीसगढ़, उदयसिंह सरपंच, ज्ञानसिंह चौहान, अशोक तिवारी, रमेश गौडौता, किशनचंद, चेतराम मेंबर, ब्रह्मसिंह छात्रा और रूपराम तेवतिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed