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प्रदूषण को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन ने उठाए कदम
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पलवल। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बिगड़ते हालात को देखते हुए पलवल जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। फरीदाबाद सहित चार जिलों में लॉकडाउन जैसे हालात को देखते हुए जिला उपायुक्त ने सभी विभागों को कड़े निर्देश दिए हैं। निर्देशों के तहत शहर में सभी तरह के निर्माणों कार्यों व ईंट-भट्ठा पर रोक लगा दी गई है। जनरेटरों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सड़कों पर उड़ती धूल के लिए पानी का छिड़काव शुरू करा दिया गया है। साथ ही गांवों में कार्यशालाएं आयोजित कर किसानों को पराली जलाने की बजाए प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने किसानों से आह्वान किया है कि कृषक धान अवशेषों को न जलाएं, क्योंकि पराली जलाने से मानवीय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा मनुष्यों विशेषकर बच्चे व बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी आती है। पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है। भूमि के मित्र कीट नष्ट हो जाते है। साथ ही साथ पराली जलाने से उत्पन्न धुएं से सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है तथा वायुमंडल प्रदूषित हो जाता है। फसल अवशेषों को जमीन में मिलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। पराली प्रबंधन के लिए सरकार व्यक्तिगत व सीएचसी मॉडल पर 50 प्रतिशत व 80 प्रतिशत अनुदान पर एंप्लीमेंटस उपलब्ध करवा रही है, जिससे फसल अवशेष का खेत में ही प्रबंधन किया जा सकता है तथा किसान पराली की गांठ बनाकर ब्रिकी कर सकता है, जिसका उपयोग पशुचारा व भट्टियों में और पैकेजिंग मैटेरियल में किया जा सकता है। इस पर किसान को सरकार अनुदान भी दे रही है। प्रशासन ने सभी कृषकों से आह्वान किया है कि वे पराली प्रबंधन करके मानव स्वास्थ्य, भूमि की उर्वरता व स्वच्छ वातावरण प्रदान करने में सहयोग करें। इस संबंध में उच्चतम न्यायालय ने निर्देश जारी करके भी कहा गया है कि किसान किसी खेत में फसल अवशेषों को आग न लगाएं।
सड़कों पर कराया जा रहा पानी का छिड़काव
प्रदूषण को बढ़ाने में सड़कों पर उड़ती धूल भी अहम भूमिका निभाती है, जिसके लिए प्रशासन ने सड़कों पर पानी का छिड़काव कराना शुरू कर दिया। टैंकरों व फायर बिग्रेड की मदद से सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। इसके अलावा सड़क किनारे पड़ी मिट्टी का साफ कराया जा रहा है तथा ग्रीन बेल्ट की जगह में भी पानी का छिड़काव कराया जा रहा है।
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पराली जलाने पर 77 किसानों पर दो लाख जुर्माना, चार पर मुकदमा दर्ज
कृषि एंव किसान कल्याण विभाग के एसडीओ कुलदीप तेवतिया ने बताया कि पराली जलाने को लेकर हरसेक द्वारा 113 फोटो प्राप्त हुए थे, जिनमें से 81 मामले सही पाए गए। 31 मामलों की पुष्टि नहीं हुई। एक मामले में अभी कार्रवाई बाकी है। 81 में से 77 किसानों पर करीब दो लाख रुपये का जुर्माना किया गया है, जबकि चार किसानों पर मुकदमा दर्ज कराया गया। किसानों से अपील है कि अगले दो सप्ताह तक पराली न जलाएं, ताकि प्रदूषण के असल कारणों को पता लगाया जा सके।
किसान यदि पराली का खेत में ही प्रबंधन करता है तो उससे मृदा उर्वरता में बढ़ोतरी, पानी की बचत, खरपतवार नाशक दवाओं की बचत, मृदा मित्र कीटों की बचत होती है। इस प्रकार कृषक पराली प्रबंधन करके मनुष्य व पशुओं के स्वास्थ्य लाभ, वातावरण का शुद्धिकरण, भूमि का उपजाऊपन आदि लाभ समस्त मानव जाति को दे सकता है तथा पराली जलाने के कारण जुर्माने से होने वाले वित्तीय हानि से बच सकता है।
- कृष्ण कुमार, जिला उपायुक्त
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जिला प्रशासन ने किसानों से आह्वान किया है कि कृषक धान अवशेषों को न जलाएं, क्योंकि पराली जलाने से मानवीय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा मनुष्यों विशेषकर बच्चे व बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी आती है। पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है। भूमि के मित्र कीट नष्ट हो जाते है। साथ ही साथ पराली जलाने से उत्पन्न धुएं से सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है तथा वायुमंडल प्रदूषित हो जाता है। फसल अवशेषों को जमीन में मिलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। पराली प्रबंधन के लिए सरकार व्यक्तिगत व सीएचसी मॉडल पर 50 प्रतिशत व 80 प्रतिशत अनुदान पर एंप्लीमेंटस उपलब्ध करवा रही है, जिससे फसल अवशेष का खेत में ही प्रबंधन किया जा सकता है तथा किसान पराली की गांठ बनाकर ब्रिकी कर सकता है, जिसका उपयोग पशुचारा व भट्टियों में और पैकेजिंग मैटेरियल में किया जा सकता है। इस पर किसान को सरकार अनुदान भी दे रही है। प्रशासन ने सभी कृषकों से आह्वान किया है कि वे पराली प्रबंधन करके मानव स्वास्थ्य, भूमि की उर्वरता व स्वच्छ वातावरण प्रदान करने में सहयोग करें। इस संबंध में उच्चतम न्यायालय ने निर्देश जारी करके भी कहा गया है कि किसान किसी खेत में फसल अवशेषों को आग न लगाएं।
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सड़कों पर कराया जा रहा पानी का छिड़काव
प्रदूषण को बढ़ाने में सड़कों पर उड़ती धूल भी अहम भूमिका निभाती है, जिसके लिए प्रशासन ने सड़कों पर पानी का छिड़काव कराना शुरू कर दिया। टैंकरों व फायर बिग्रेड की मदद से सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। इसके अलावा सड़क किनारे पड़ी मिट्टी का साफ कराया जा रहा है तथा ग्रीन बेल्ट की जगह में भी पानी का छिड़काव कराया जा रहा है।
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पराली जलाने पर 77 किसानों पर दो लाख जुर्माना, चार पर मुकदमा दर्ज
कृषि एंव किसान कल्याण विभाग के एसडीओ कुलदीप तेवतिया ने बताया कि पराली जलाने को लेकर हरसेक द्वारा 113 फोटो प्राप्त हुए थे, जिनमें से 81 मामले सही पाए गए। 31 मामलों की पुष्टि नहीं हुई। एक मामले में अभी कार्रवाई बाकी है। 81 में से 77 किसानों पर करीब दो लाख रुपये का जुर्माना किया गया है, जबकि चार किसानों पर मुकदमा दर्ज कराया गया। किसानों से अपील है कि अगले दो सप्ताह तक पराली न जलाएं, ताकि प्रदूषण के असल कारणों को पता लगाया जा सके।
किसान यदि पराली का खेत में ही प्रबंधन करता है तो उससे मृदा उर्वरता में बढ़ोतरी, पानी की बचत, खरपतवार नाशक दवाओं की बचत, मृदा मित्र कीटों की बचत होती है। इस प्रकार कृषक पराली प्रबंधन करके मनुष्य व पशुओं के स्वास्थ्य लाभ, वातावरण का शुद्धिकरण, भूमि का उपजाऊपन आदि लाभ समस्त मानव जाति को दे सकता है तथा पराली जलाने के कारण जुर्माने से होने वाले वित्तीय हानि से बच सकता है।
- कृष्ण कुमार, जिला उपायुक्त