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ग्लोबल वार्मिंग के मॉडल से समझाए इसके दुष्प्रभाव
Palwal
Updated Wed, 28 Aug 2013 05:34 AM IST
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पलवल। ग्लोबल वार्मिंग से किस कदर गर्मी बढ़ती जा रही है और पर्यावरण को सीधा नुकसान हो रहा है। ये बातें बच्चों ने अपने मॉडल के जरिए समझाई। मौका था सीनियर सेकेंडरी स्कूल पलवल (बाल) में लगी विज्ञान प्रदर्शनी का दूसरा दिन। प्रदर्शनी देखने सैकड़ों बच्चे और उनके अभिभावक पहुंचे।
प्रदर्शनी में धतीर व पृथला स्कूल के बच्चों द्वारा ग्लोबल वार्मिंग पर बनाई प्रदर्शनी लोगों को सबसे अच्छी लगी। इसमें बच्चों ने ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने को रोकने के उपाय भी दर्शाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसे बढ़ने से रोका नहीं गया तो जीवन में बुरे प्रभाव पड़ेंगे। धतीर मॉडल संस्कृति स्कूल के बच्चों द्वारा बनाए आर्टिफिशियल सैटेलाइट को भी देखने के लिए बच्चों की भीड़ लगी रही। इस सैटेलाइट को घर की छत पर लगाने से वातावरण, भूकंप, बारिश, आंधी व तूफान की जानकारी समय पर मिल सकती है। इसमें किसान व समुद्र्र में मछली पकड़ने वाले और जहाज आदि पर जाने वाले लोग इसकी जानकारी लेकर अपनी यात्रा कर सकते है।
प्रदर्शनी में वाटर हार्वेस्ट सिस्टम को भी अच्छी तरह से दिखाया गया था। इसके द्वारा बारिश के पानी को जमा करके उसको पीने योग्य बनाकर उसका प्रयोग करते हुए दर्शाया गया है। इसमें बताया गया कि इस प्रकार सभी घरों में रेन हार्वेस्ट सिस्टम से पानी के संकट से बचा जा सकता है। आल्हापुर उच्च विद्यालय के बच्चों ने केमिकल पदार्थों से गैस बनाना दिखाया। कुसलीपुर उच्च विद्यालय के बच्चों ने बादल बनने और उसके बाद बारिश होने को अपनी मॉडल में दिखाया। वहीं सीनियर सेेकेंडरी स्कूल बहीन के बच्चों ने रक्त संचार को मॉडल में दिखाया।
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प्रदर्शनी में जितेंद्र गहलौत ने बताया कि पलवल व फरीदाबाद दो जिलों की इस विज्ञान प्रदर्शनी में करीब 130 बच्चे हिस्सा ले रहे है। उन्होंने बताया कि ऐसी प्रदर्र्शनी का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को विज्ञान की तरफ आकर्षित करना है। प्रदर्शनी का आयोजन जिला विज्ञान विशेषज्ञ जितेंद्र गहलौत, बीआर शर्मा व जसवीर सिंह की देखरेख में किया जा रहा है।
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प्रदर्शनी में धतीर व पृथला स्कूल के बच्चों द्वारा ग्लोबल वार्मिंग पर बनाई प्रदर्शनी लोगों को सबसे अच्छी लगी। इसमें बच्चों ने ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने को रोकने के उपाय भी दर्शाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसे बढ़ने से रोका नहीं गया तो जीवन में बुरे प्रभाव पड़ेंगे। धतीर मॉडल संस्कृति स्कूल के बच्चों द्वारा बनाए आर्टिफिशियल सैटेलाइट को भी देखने के लिए बच्चों की भीड़ लगी रही। इस सैटेलाइट को घर की छत पर लगाने से वातावरण, भूकंप, बारिश, आंधी व तूफान की जानकारी समय पर मिल सकती है। इसमें किसान व समुद्र्र में मछली पकड़ने वाले और जहाज आदि पर जाने वाले लोग इसकी जानकारी लेकर अपनी यात्रा कर सकते है।
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प्रदर्शनी में वाटर हार्वेस्ट सिस्टम को भी अच्छी तरह से दिखाया गया था। इसके द्वारा बारिश के पानी को जमा करके उसको पीने योग्य बनाकर उसका प्रयोग करते हुए दर्शाया गया है। इसमें बताया गया कि इस प्रकार सभी घरों में रेन हार्वेस्ट सिस्टम से पानी के संकट से बचा जा सकता है। आल्हापुर उच्च विद्यालय के बच्चों ने केमिकल पदार्थों से गैस बनाना दिखाया। कुसलीपुर उच्च विद्यालय के बच्चों ने बादल बनने और उसके बाद बारिश होने को अपनी मॉडल में दिखाया। वहीं सीनियर सेेकेंडरी स्कूल बहीन के बच्चों ने रक्त संचार को मॉडल में दिखाया।
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प्रदर्शनी में जितेंद्र गहलौत ने बताया कि पलवल व फरीदाबाद दो जिलों की इस विज्ञान प्रदर्शनी में करीब 130 बच्चे हिस्सा ले रहे है। उन्होंने बताया कि ऐसी प्रदर्र्शनी का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को विज्ञान की तरफ आकर्षित करना है। प्रदर्शनी का आयोजन जिला विज्ञान विशेषज्ञ जितेंद्र गहलौत, बीआर शर्मा व जसवीर सिंह की देखरेख में किया जा रहा है।