{"_id":"60f5b1d48ebc3e6d590d21a1","slug":"9-lakh-rupees-spent-on-cleaning-drains-palwal-news-noi5943733191","type":"story","status":"publish","title_hn":"नालों की सफाई पर खर्च 9 लाख रुपये बह गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नालों की सफाई पर खर्च 9 लाख रुपये बह गए
विज्ञापन
अनूप पाराशर
पलवल। मानसून से पहले नगर परिषद अधिकारियों द्वारा शहर के नाले और नालियों की सफाई पर 9 लाख रुपये खर्च करने के दावे एक ही बारिश में पानी में बह गए। बारिश के बाद शहर की गलियों और सड़कों के हालात ‘तालाब’ जैसे हो गए हैं। जलभराव की समस्या को देखकर अब लोग नगर परिषद अधिकारियों, जिला उपायुक्त तथा स्थानीय विधायक की कार्यशैली पर सोशल मीडिया के माध्यम से उंगली उठा रहे हैं, लेकिन इसका असर किसी पर दिखाई नहीं दे रहा है। इतना सब होने के बावजूद शहर में पानी निकासी के इंतजाम करने के लिए कोई अधिकारी और सत्ता पक्ष से जुड़ा नेता घरों से बाहर नहीं निकला है। अधिकारियों ने तो लोगों के फोन उठाने भी बंद कर दिए हैं।
रविवार रात रुक-रुककर हुई बारिश के बाद शहर की सभी गलियों, मोहल्लों और रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव हो गया है। नगर परिषद की सबसे बड़ी अधिकारी के रूप में तैनात नगर आयुक्त के कार्यालय में ही इतना जलभराव हो गया कि बच्चों ने वहां जाकर सोमवार को तैैराकी का मजा लिया। नगर आयुक्त कार्यालय में भरे पानी में तैराकी करते बच्चों की फोटो सोशल मीडिया पर डालकर पलवल प्रशासन और सरकार पर लोगों ने जमकर टिप्पणियां की। पर इन टिप्पणियों का असर भी किसी पर नहीं दिखाई दे रहा है। अधिकारियों के पास भी जलभराव से लोगों को बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं दिखे। (संवाद)
-----
दो जेसीबी और आठ ट्रैक्टरों पर खर्च किए रुपये
नगर परिषद अधिकारियों की माने तो शहर स्थित नालों की सफाई करने के लिए लगाई गईं दो जेसीबी मशीनों तथा 8 ट्रैक्टरों पर पर ही एक माह के अंदर 9 लाख रुपये खर्च किए गए। इतनी धनराशि खर्च करने के बाद भी प्रशासन शहर को बारिश के पानी से डूबने से नहीं बचा पा रहा है। लोगों के मकानों के अंदर भी पानी घुस गया है।
विज्ञापन
--------
सरकारी विभागों में लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम फेल
जिला प्रशासन द्वारा बारिश के पानी को जमीन के अंदर छोड़ने के लिए लाखों रुपये खर्च कर लगवाए गए हार्वेस्टिंग सिस्टम एक ही बारिश के बाद फेल नजर आए। हार्वेस्टिंग सिस्टम होने के बावजूद सचिवालय के द्वार पर ही ‘तालाब’ जैसे हालात है। सचिवालय के साथ राजमार्ग पर भी दो किलोमीटर क्षेत्र में हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाए गए थे, लेकिन वे सिस्टम भी पूरी तरह से फेल हो गए। राजमार्ग पर केएमपी तक जबरदस्त जलभराव हो गया।
------
सब्जी और अनाज मंडी में भरा चार फिट पानी
जिले की सबसे बड़ी अनाज और सब्जी मंडी में एक ही दिन की बारिश के बाद तीन से चार फिट तक पानी भर गया। इन मंडियों में जलभराव के बाद लोगों का निकलना मुश्किल हो गया। सब्जी की आढ़तों तक में पानी घुसा है। जलभराव के कारण ग्राहक भी मंडी से नदारद रहे। केवल पल्लेदार ही मंडी में पानी के अंदर से इधर-उधर निकलते देखे गए।
------
इन स्थानों पर सर्वाधिक जलभराव
रेलवे रोड, पुराने जीटी रोड, शेखपुरा, रसूलपुर चौक, दया बस्ती, मोहन नगर, कृष्णा कॉलोनी, शिव कॉलोनी, प्रकाश विहार, बसंत विहार, तुहीराम कॉलोनी, मालगोदाम रोड, मोती कॉलोनी, आर्य नगर, कालड़ा कॉलोनी, पंचवटी कॉलोनी, पुराना सोहना रोड, गीता कॉलोनी सहित दर्जनों कालोनियों में अधिक जलभराव है।
-------
महिला थाने के अंदर भरा पानी
दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर स्थित महिला थाने के अंदर भी दो से तीन फिट पानी भर गया। महिला पुलिसकर्मियों का भी थाने से अंदर-बाहर निकलना मुश्किल हो गया। इसके अलावा शिकायतकर्ताओं का भी थाने में प्रवेश करना मुश्किल हो गया। विश्रामगृह सहित अन्य कई सरकारी विभाग कार्यालयों में भी जलभराव हो गया।
------
विधायक की कोठी के सामने ही जलभराव
पलवल विधायक दीपक मंगला की कोठी के सामने और आसपास ही काफी जलभराव है। इसे लेेकर लोग सोशल मीडिया पर विधायक की नाकामी को कोस रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो विधायक शहर में जलनिकासी के इंतजाम न करा सके, उसे त्यागपत्र दे देना चाहिए।
-----
नगर परिषद अधिकारियों और जिला उपायुक्त से पिछले दो महीने से नाले व नालियों की सफाई की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ। अब घरों के अंदर तक पानी घुस गया। जो विधायक शहर की समस्याओं का निदान न करा सके, उसे इस्तीफा दे देना चाहिए।
- ओम प्रकाश गुप्ता, प्रधान वैश्य अग्रवाल सभा पलवल
-------
नगर परिषद और जिला प्रशासन पानी निकासी के इंतजाम कराने में पूरी तरह से फेल है। पलवल में बारिश के बाद कहीं से भी निकलने का रास्ता नहीं बचा है। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। सरकार भी पूरी तरह से फेल हो चुकी है।
- हाजी युनूस अहमद, प्रधान मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन
------
बारिश से पहले ही पूरे शहर के नालों की सफाई कराई गई थी। इस पर 9 लाख रुपये का खर्च भी आया था। परिषद द्वारा हर संभव प्रयास किए गए कि बारिश के बाद शहर में जलभराव न हो। अधिकारी पानी निकासी के इंतजाम कराने में लगे हैं। आगे समस्या न हो, इसके लिए भी स्थायी इंतजाम किए जाएंगे।
- कुलदीप मलिक, कार्यकारी अधिकारी, पलवल नगर परिषद
विज्ञापन
पलवल। मानसून से पहले नगर परिषद अधिकारियों द्वारा शहर के नाले और नालियों की सफाई पर 9 लाख रुपये खर्च करने के दावे एक ही बारिश में पानी में बह गए। बारिश के बाद शहर की गलियों और सड़कों के हालात ‘तालाब’ जैसे हो गए हैं। जलभराव की समस्या को देखकर अब लोग नगर परिषद अधिकारियों, जिला उपायुक्त तथा स्थानीय विधायक की कार्यशैली पर सोशल मीडिया के माध्यम से उंगली उठा रहे हैं, लेकिन इसका असर किसी पर दिखाई नहीं दे रहा है। इतना सब होने के बावजूद शहर में पानी निकासी के इंतजाम करने के लिए कोई अधिकारी और सत्ता पक्ष से जुड़ा नेता घरों से बाहर नहीं निकला है। अधिकारियों ने तो लोगों के फोन उठाने भी बंद कर दिए हैं।
रविवार रात रुक-रुककर हुई बारिश के बाद शहर की सभी गलियों, मोहल्लों और रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव हो गया है। नगर परिषद की सबसे बड़ी अधिकारी के रूप में तैनात नगर आयुक्त के कार्यालय में ही इतना जलभराव हो गया कि बच्चों ने वहां जाकर सोमवार को तैैराकी का मजा लिया। नगर आयुक्त कार्यालय में भरे पानी में तैराकी करते बच्चों की फोटो सोशल मीडिया पर डालकर पलवल प्रशासन और सरकार पर लोगों ने जमकर टिप्पणियां की। पर इन टिप्पणियों का असर भी किसी पर नहीं दिखाई दे रहा है। अधिकारियों के पास भी जलभराव से लोगों को बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं दिखे। (संवाद)
विज्ञापन
-----
दो जेसीबी और आठ ट्रैक्टरों पर खर्च किए रुपये
नगर परिषद अधिकारियों की माने तो शहर स्थित नालों की सफाई करने के लिए लगाई गईं दो जेसीबी मशीनों तथा 8 ट्रैक्टरों पर पर ही एक माह के अंदर 9 लाख रुपये खर्च किए गए। इतनी धनराशि खर्च करने के बाद भी प्रशासन शहर को बारिश के पानी से डूबने से नहीं बचा पा रहा है। लोगों के मकानों के अंदर भी पानी घुस गया है।
विज्ञापन
--------
सरकारी विभागों में लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम फेल
जिला प्रशासन द्वारा बारिश के पानी को जमीन के अंदर छोड़ने के लिए लाखों रुपये खर्च कर लगवाए गए हार्वेस्टिंग सिस्टम एक ही बारिश के बाद फेल नजर आए। हार्वेस्टिंग सिस्टम होने के बावजूद सचिवालय के द्वार पर ही ‘तालाब’ जैसे हालात है। सचिवालय के साथ राजमार्ग पर भी दो किलोमीटर क्षेत्र में हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाए गए थे, लेकिन वे सिस्टम भी पूरी तरह से फेल हो गए। राजमार्ग पर केएमपी तक जबरदस्त जलभराव हो गया।
------
सब्जी और अनाज मंडी में भरा चार फिट पानी
जिले की सबसे बड़ी अनाज और सब्जी मंडी में एक ही दिन की बारिश के बाद तीन से चार फिट तक पानी भर गया। इन मंडियों में जलभराव के बाद लोगों का निकलना मुश्किल हो गया। सब्जी की आढ़तों तक में पानी घुसा है। जलभराव के कारण ग्राहक भी मंडी से नदारद रहे। केवल पल्लेदार ही मंडी में पानी के अंदर से इधर-उधर निकलते देखे गए।
------
इन स्थानों पर सर्वाधिक जलभराव
रेलवे रोड, पुराने जीटी रोड, शेखपुरा, रसूलपुर चौक, दया बस्ती, मोहन नगर, कृष्णा कॉलोनी, शिव कॉलोनी, प्रकाश विहार, बसंत विहार, तुहीराम कॉलोनी, मालगोदाम रोड, मोती कॉलोनी, आर्य नगर, कालड़ा कॉलोनी, पंचवटी कॉलोनी, पुराना सोहना रोड, गीता कॉलोनी सहित दर्जनों कालोनियों में अधिक जलभराव है।
-------
महिला थाने के अंदर भरा पानी
दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर स्थित महिला थाने के अंदर भी दो से तीन फिट पानी भर गया। महिला पुलिसकर्मियों का भी थाने से अंदर-बाहर निकलना मुश्किल हो गया। इसके अलावा शिकायतकर्ताओं का भी थाने में प्रवेश करना मुश्किल हो गया। विश्रामगृह सहित अन्य कई सरकारी विभाग कार्यालयों में भी जलभराव हो गया।
------
विधायक की कोठी के सामने ही जलभराव
पलवल विधायक दीपक मंगला की कोठी के सामने और आसपास ही काफी जलभराव है। इसे लेेकर लोग सोशल मीडिया पर विधायक की नाकामी को कोस रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो विधायक शहर में जलनिकासी के इंतजाम न करा सके, उसे त्यागपत्र दे देना चाहिए।
-----
नगर परिषद अधिकारियों और जिला उपायुक्त से पिछले दो महीने से नाले व नालियों की सफाई की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ। अब घरों के अंदर तक पानी घुस गया। जो विधायक शहर की समस्याओं का निदान न करा सके, उसे इस्तीफा दे देना चाहिए।
- ओम प्रकाश गुप्ता, प्रधान वैश्य अग्रवाल सभा पलवल
-------
नगर परिषद और जिला प्रशासन पानी निकासी के इंतजाम कराने में पूरी तरह से फेल है। पलवल में बारिश के बाद कहीं से भी निकलने का रास्ता नहीं बचा है। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। सरकार भी पूरी तरह से फेल हो चुकी है।
- हाजी युनूस अहमद, प्रधान मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन
------
बारिश से पहले ही पूरे शहर के नालों की सफाई कराई गई थी। इस पर 9 लाख रुपये का खर्च भी आया था। परिषद द्वारा हर संभव प्रयास किए गए कि बारिश के बाद शहर में जलभराव न हो। अधिकारी पानी निकासी के इंतजाम कराने में लगे हैं। आगे समस्या न हो, इसके लिए भी स्थायी इंतजाम किए जाएंगे।
- कुलदीप मलिक, कार्यकारी अधिकारी, पलवल नगर परिषद