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पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे 82 साल के किशन चंद

Sat, 27 Feb 2021 10:54 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2021 10:54 PM IST
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82 year old Kishan Chand giving the message of environmental protection
किशन चंद, पर्यावरणविद्। - फोटो : Palwal
होडल (रोशन लाल शर्मा)। एक तरफ जहां बड़ी-बड़ी इमारतों को बनाने के लिए लोग पेड़ों को काटने में लगे हैं, वहीं होडल के गांव सौंदहद में रहने वाले सेवानिवृत्त अध्यापक किशन चंद पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 82 साल की उम्र में भी पौधरोपण करने में जुटे हैं। शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद किशन चंद घर में बैठकर आराम करने की बजाय पौधरोपण अभियान में जुट गए। 24 साल से लगातार पौधरोपण करने में जुटे किशन चंद अभी तक करीब 20 हजार पौधे लगा चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद जहां वे पलवल जिले में पौधे लगा रहे हैं वहीं राजस्थान में बतौर अध्यापक रहते हुए वहां भी पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया। बच्चों के साथ लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। इनके इस योगदान के लिए राजस्थान सरकार उन्हें सम्मानित भी कर चुकी है। पलवल जिला प्रशासन की तरफ से भी किशन चंद को सम्मानित किया जा चुका है।
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किशन चंद का मानना है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का कारण पेड़ों का तेजी से कटना है। इसका सीधा पर्यावरण के साथ असर मानव जीवन, जीव जंतुओं पर भी पड़ रहा है। पेड़ों की संख्या कम होने और प्रदूषण स्तर बढ़ने के कारण लोग कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इन सभी को बचाने के लिए वे पौधरोपण अभियान में जुटे हैं। इतना ही नहीं किशन चंद लोगों को पेड़ों का महत्व समझाने का भी लगातार प्रयास करते रहते हैं। उनका मानना है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे और युवा यदि पौधरोपण का महत्व समझ जाएंगे तो फिर पर्यावरण नहीं बिगड़ेगा। किशन चंद सबसे ज्यादा आक्सीजन छोड़ने वाले बड़ व पीपल के पेड़ ज्यादा लगाते हैं। उनका मानना है कि बड़ व पीपल के पेड़ लगाने से पृथ्वी पर जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने पौधेरोपण के साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प लिया है। यह संकल्प और लोगों को दिलवाते है। वे जहां पौधे लगाते हैं, समय-समय पर उन स्थानों पर जाकर उनका निरीक्षण भी करते हैं। आसपास रहने वाले लोगों को पौधों के संरक्षण के लिए जागरूक भी करते हैं। (संवाद)
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गांव के मंदिर में लगाई पौधों की नर्सरी
किशन चंद ने अपने घर के समीप बने मंदिर में पौधों की नर्सरी बना रखी है। यहां हर साल सैकड़ों पीपल व बड़ के पेड़ों की पौध तैयार करते हैं। बारिश के मौसम में विभिन्न जगहों पर घूमकर पौधरोपण करते हैं। फिर उनकी देखभाल में जुट जाते हैं। संस्थाओं और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी पौधे वितरित करते हैं। उनका कहना है कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने जरूरी हैं। इनसे लोगों को शुद्ध ऑक्सीजन भी मिलती है। यदि धरती पर हरियाली रहेगी तो कभी पेयजल की समस्या नहीं होगी। उनका कहना है कि बच्चों को बड़ व पीपल के पेड़ लगाने के लिए जागरूक करना जरूरी है। उन्हें इन पेड़ों का धार्मिक महत्व भी समझना जरूरी है। इसके लिए वे अंतिम सांस तक प्रयास करते रहेंगे।
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