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दुधारू पशुओं में फैल रही थनैला बीमारी, पशु पालक परेशान
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दुधारू पशुओं में फैल रही थनैला बीमारी, पशुपालक परेशान
- पशु चिकित्सकों ने दी प्रतिदिन पशुओं की साफ सफाई करने की हिदायत
अमर उजाला ब्यूरो।
होडल। जिले में इन दिनों दुधारू पशु थनैला बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। पशुपालन विभाग द्वारा थनैला रोग का मुख्य कारण साफ-सफाई नहीं करना माना जा रहा है। जिले के पशु अस्पतालों में प्रतिदिन औसतन 5 से 6 पशु इस रोग से ग्रसित होने के कारण लाए जा रहे हैं।
पशु चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों दुधारू पशु थनैला रोग की चपेट में आ रहे हैं। इससे पशुओं का दूध तो कम होता ही है। साथ ही थन खराब होने की संभावना भी रहती है। ऐसे में पशुपालकों को पशुपालन विभाग की तरफ से सावधानी बरतते हुए पशुओं की साफ सफाई का ध्यान रखने की बात बताई गई है। पशु विशेषज्ञ डॉक्टरों की ओर से बताया गया है कि पशुओं में दूध का दबाव बढ़ने से थनैला रोग बढ़ सकता है। ऐसे में पशु चिकित्सकों ने पशु पालकों को ये सलाह दी है कि वे थनैला बीमारी आने पर झोलाछाप चिकित्सक के चक्कर में न पड़ें। समय पर इसका उपचार करवाया जाए तो पशु को भी कम नुकसान होगा।
ये सावधानी बरतें पशुपालक
पशु चिकित्सकों ने किसानों को सलाह दी है कि पक्के फर्श (पशु बांधने के स्थान) की लाल दवाई या फिनाइल से प्रतिदिन सफाई करें। पशु पालक दूध मुट्ठी से निकालें न कि अंगूठे की सहायता से। दूध निकालने के बाद पशु को करीब आधे घंटे तक बैठने न दें। इसके लिए पशु को चारा डालें। पशु पालक थनों में दूध न छोड़ें। यह हानिकारक होता है। पशुओं के बांधने का स्थान कच्चा है तो उसकी सफाई जरूर रखें। गोबर लंबे समय तक इकट्ठा न होने दें। दूध निकालने से पहले हाथ, थन को अच्छे से धोएं, ताकि बैक्टीरिया न रहे।
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क्या है थनैला के लक्षण
इस बीमारी में थनों में सूजन आना। थन से मवाद आना। दूध कम होना। दूध के रंग में बदलाव होना। दूध के स्वाद में बदलाव होना मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों को देखते ही तुरंत पशु चिकित्सक से पशुओं को दिखाना चाहिए।
क्या कहते हैं अधिकारी
पशुपालन विभाग की उप निदेशक डॉ नीलम आर्य का कहना है कि यह रोग संक्रमण से फैलने वाला नहीं है। पशु पालकों को चिंता करने की जरूरत नहीं बल्कि जागरूकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पशु पालक ध्यान में रखें कि दुधारू पशु को दूध निकालने के तुरंत बाद न बैठने दें। करीब 30 मिनट तक पशु को खड़ा रखने के लिए उसके सामने चारा डाल दें। क्योंकि दूध निकालने के बाद आधा घंटे तक थन के छिद्र (छेद) खुले रहते हैं और बैक्टीरिया अधिक प्रभावी होने की संभावना बनी रहती है। पशुओं में थनैला रोग सबसे अधिक बढ़ रहा है। इसका कारण पशु पालकों द्वारा सावधानी न बरतना भी माना जा रहा है। पशु पालक साफ सफाई का ध्यान रखें और इसके लक्षण दिखते ही तुरंत इसकी चिकित्सक से जांच करवाएं, ताकि समय पर इस बीमारी का इलाज किया जा सके।
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- पशु चिकित्सकों ने दी प्रतिदिन पशुओं की साफ सफाई करने की हिदायत
अमर उजाला ब्यूरो।
होडल। जिले में इन दिनों दुधारू पशु थनैला बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। पशुपालन विभाग द्वारा थनैला रोग का मुख्य कारण साफ-सफाई नहीं करना माना जा रहा है। जिले के पशु अस्पतालों में प्रतिदिन औसतन 5 से 6 पशु इस रोग से ग्रसित होने के कारण लाए जा रहे हैं।
पशु चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों दुधारू पशु थनैला रोग की चपेट में आ रहे हैं। इससे पशुओं का दूध तो कम होता ही है। साथ ही थन खराब होने की संभावना भी रहती है। ऐसे में पशुपालकों को पशुपालन विभाग की तरफ से सावधानी बरतते हुए पशुओं की साफ सफाई का ध्यान रखने की बात बताई गई है। पशु विशेषज्ञ डॉक्टरों की ओर से बताया गया है कि पशुओं में दूध का दबाव बढ़ने से थनैला रोग बढ़ सकता है। ऐसे में पशु चिकित्सकों ने पशु पालकों को ये सलाह दी है कि वे थनैला बीमारी आने पर झोलाछाप चिकित्सक के चक्कर में न पड़ें। समय पर इसका उपचार करवाया जाए तो पशु को भी कम नुकसान होगा।
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ये सावधानी बरतें पशुपालक
पशु चिकित्सकों ने किसानों को सलाह दी है कि पक्के फर्श (पशु बांधने के स्थान) की लाल दवाई या फिनाइल से प्रतिदिन सफाई करें। पशु पालक दूध मुट्ठी से निकालें न कि अंगूठे की सहायता से। दूध निकालने के बाद पशु को करीब आधे घंटे तक बैठने न दें। इसके लिए पशु को चारा डालें। पशु पालक थनों में दूध न छोड़ें। यह हानिकारक होता है। पशुओं के बांधने का स्थान कच्चा है तो उसकी सफाई जरूर रखें। गोबर लंबे समय तक इकट्ठा न होने दें। दूध निकालने से पहले हाथ, थन को अच्छे से धोएं, ताकि बैक्टीरिया न रहे।
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क्या है थनैला के लक्षण
इस बीमारी में थनों में सूजन आना। थन से मवाद आना। दूध कम होना। दूध के रंग में बदलाव होना। दूध के स्वाद में बदलाव होना मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों को देखते ही तुरंत पशु चिकित्सक से पशुओं को दिखाना चाहिए।
क्या कहते हैं अधिकारी
पशुपालन विभाग की उप निदेशक डॉ नीलम आर्य का कहना है कि यह रोग संक्रमण से फैलने वाला नहीं है। पशु पालकों को चिंता करने की जरूरत नहीं बल्कि जागरूकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पशु पालक ध्यान में रखें कि दुधारू पशु को दूध निकालने के तुरंत बाद न बैठने दें। करीब 30 मिनट तक पशु को खड़ा रखने के लिए उसके सामने चारा डाल दें। क्योंकि दूध निकालने के बाद आधा घंटे तक थन के छिद्र (छेद) खुले रहते हैं और बैक्टीरिया अधिक प्रभावी होने की संभावना बनी रहती है। पशुओं में थनैला रोग सबसे अधिक बढ़ रहा है। इसका कारण पशु पालकों द्वारा सावधानी न बरतना भी माना जा रहा है। पशु पालक साफ सफाई का ध्यान रखें और इसके लक्षण दिखते ही तुरंत इसकी चिकित्सक से जांच करवाएं, ताकि समय पर इस बीमारी का इलाज किया जा सके।