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212 फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का खुलासा
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212 फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का खुलासा
पलवल। आरटीए सचिव कार्यालय में फर्जी तरीके से बनाए गए व्यावसायिक व भारी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस के मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर की गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को दिनभर जांच चलती रही। फरीदाबाद आयुक्त संजय जून से लेकर जिला उपायुक्त, जिला पुलिस अधीक्षक, सीईओ जिला परिषद, एसडीएम व आरटीए सचिव ने कई घंटे तक अधिकारियों की बैठक की। दूसरी तरफ, जांच अधिकारी डीएसपी अनिल कुमार भी टीम के साथ जुटे रहे। अब तक 212 व्यावसायिक व भारी वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की बात सामने आई है। इनमें केवल सरल केंद्र में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर योगेश कुमार को गिरफ्तार किया गया है।
दरअसल, सीएम फ्लाइंग के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने 25 सितंबर को कैंप थाने पुलिस में एक मुकदमा दर्ज कराया। इसमें कहा गया है कि क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण सचिव कार्यालय में बड़े स्तर पर नकली व्यावसायिक एवं भारी वाहन लाइसेंस बनाए और रिन्यू किए जा रहे हैं। आरटीए कार्यालय पलवल से गुरुग्राम जिले के गांव उदाका निवासी यूसुफ व जमील, गांव सहसोला निवासी रफीक के लाइसेंस रिन्यू किए गए थे। गुरुग्राम आरटीए कार्यालय की पड़ताल में पता चला कि उन्होंने लाइसेंस जारी ही नहीं किए हैं। लाइसेंस पर गुड़गांव अथॉरिटी की मोहर व छोटे हस्ताक्षर हैं। जांच में पता चला कि लाइसेंस फर्जी तरीके से रिन्यू करने का काम पलवल आरटीए कार्यालय में किया जा रहा है। इसके बाद इस मामले की जांच शुरू हुई।
सरल केंद्र में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर योगेश कुमार की गिरफ्तारी से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। फर्जी लाइसेंस आरटीए सचिव कार्यालय में बनाए गए हैं, जबकि योगेश कुमार सरल केंद्र में कार्यरत है। आरटीए कार्यालय से उसका कोई संबंध नहीं है। आरटीए सचिव का कार्यभार अतिरिक्त उपायुक्त पर होता है और उसका अलग स्टाफ है। आरटीए सचिव को ही व्यावसायिक व भारी वाहन लाइसेंस जारी करने व रिन्यू करने का अधिकार है। इस मामले में अब तक आरटीए सचिव कार्यालय के एक भी कर्मचारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
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फर्जीवाड़े में एक कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार कर तीन दिन के रिमांड पर लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। अब तक इस मामले की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। जांच चल रही है।
- अनिल कुमार, डीएसपी
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पलवल। आरटीए सचिव कार्यालय में फर्जी तरीके से बनाए गए व्यावसायिक व भारी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस के मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर की गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को दिनभर जांच चलती रही। फरीदाबाद आयुक्त संजय जून से लेकर जिला उपायुक्त, जिला पुलिस अधीक्षक, सीईओ जिला परिषद, एसडीएम व आरटीए सचिव ने कई घंटे तक अधिकारियों की बैठक की। दूसरी तरफ, जांच अधिकारी डीएसपी अनिल कुमार भी टीम के साथ जुटे रहे। अब तक 212 व्यावसायिक व भारी वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की बात सामने आई है। इनमें केवल सरल केंद्र में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर योगेश कुमार को गिरफ्तार किया गया है।
दरअसल, सीएम फ्लाइंग के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने 25 सितंबर को कैंप थाने पुलिस में एक मुकदमा दर्ज कराया। इसमें कहा गया है कि क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण सचिव कार्यालय में बड़े स्तर पर नकली व्यावसायिक एवं भारी वाहन लाइसेंस बनाए और रिन्यू किए जा रहे हैं। आरटीए कार्यालय पलवल से गुरुग्राम जिले के गांव उदाका निवासी यूसुफ व जमील, गांव सहसोला निवासी रफीक के लाइसेंस रिन्यू किए गए थे। गुरुग्राम आरटीए कार्यालय की पड़ताल में पता चला कि उन्होंने लाइसेंस जारी ही नहीं किए हैं। लाइसेंस पर गुड़गांव अथॉरिटी की मोहर व छोटे हस्ताक्षर हैं। जांच में पता चला कि लाइसेंस फर्जी तरीके से रिन्यू करने का काम पलवल आरटीए कार्यालय में किया जा रहा है। इसके बाद इस मामले की जांच शुरू हुई।
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सरल केंद्र में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर योगेश कुमार की गिरफ्तारी से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। फर्जी लाइसेंस आरटीए सचिव कार्यालय में बनाए गए हैं, जबकि योगेश कुमार सरल केंद्र में कार्यरत है। आरटीए कार्यालय से उसका कोई संबंध नहीं है। आरटीए सचिव का कार्यभार अतिरिक्त उपायुक्त पर होता है और उसका अलग स्टाफ है। आरटीए सचिव को ही व्यावसायिक व भारी वाहन लाइसेंस जारी करने व रिन्यू करने का अधिकार है। इस मामले में अब तक आरटीए सचिव कार्यालय के एक भी कर्मचारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
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फर्जीवाड़े में एक कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार कर तीन दिन के रिमांड पर लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। अब तक इस मामले की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। जांच चल रही है।
- अनिल कुमार, डीएसपी