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12 साल में दिला दी 2 हजार लोगों को आंखों की रोशनी

Sat, 09 Jan 2021 11:06 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jan 2021 11:06 PM IST
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2 thousand people got eyesight in 12 years
पलवल (अनूप पाराशर)। जीते-जीते रक्तदान, मरने के बाद नेत्रदान अभियान को सार्थक करने में जुटे तीन युवा व्यवसायियों ने पिछले 12 सालों में ही करीब 2 हजार नेत्रहीनों को ज्योति दिलाने का काम किया है। नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के उनके प्रयास आज ऐसा रंग ला चुके है कि पलवल जिले में अब नेत्रदान के क्षेत्र में करीब एक दर्जन से अधिक लोग आगे आकर जागरूक करने में जुटे हैं।
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नेत्रदान अभियान की शुरूआत करने वाले तीन युवाओं मनीष जैन, दीपक गोयल व प्रवीण ग्रोवर के प्रयासों के चलते आज पलवल में नेत्र कलेक्शन सेंटर भी शुरू हो चुका है और अब ये तीनों पलवल में नेत्र बैंक खुलवाने के लिए अभियान चलाए हुए हैं। मनीष जैन, दीपक गोयल व प्रवीण ग्रोवर ने वर्ष 2008 में पलवल के अंदर नेत्र ज्योति एक प्रयास संस्था का गठन किया। मनीष जैन पेशे से किराना के होलसेल व्यापारी हैं, जबकि दीपक गोयल की वैंडी आइस क्रीम की फैक्टरी है व प्रवीण ग्रोवर का ट्रांसपोर्ट का काम है और उनकी पत्नी पार्षद हैं। तीनों पलवल जिले में ही नहीं, बल्कि आसपास के दूसरे जिलों में भी जाकर लोगों को नेत्रदान व रक्तदान के लिए जागरूक करते हैं।
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शुरुआत में लोगों ने काफी बुरा भला कहा
दीपक गोयल, मनीष जैन व प्रवीण ग्रोवर का कहना है कि जब उन्हें नेत्र ज्योति एक प्रयास संस्था का गठन किया, तो लोगों से नेत्रदान की बात करने पर खूब खरी-खोटी सुननी पड़ती थी। किसी के यहां निधन होने की सूचना मिलने के बाद हम डर-डर के उनके यहां जाते थे व उनसे नेत्रदान कराने की बात करते थे। कई बार तो लोग गुस्सा जाते थे। उसके बाद पहला नेत्रदान हूडा सेक्टर दो में रहने वाले अनिल सिंगला द्वारा अपनी माता का निधन होने पर कराया। इसके बाद उनका हौसला बढ़ गया। कुछ दिन बाद ही मनीष जैन ने अपने ताऊ महावीर प्रसाद जैन के निधन पर नेत्रदान कराया व उसके बाद ही पलवल जिले के देहात क्षेत्र में अपनी नानी के निधन पर गांव भिड़की में जाकर कराया। उनकी संस्था से आर्य समाज जवाहर नगर कैंप के प्रधान जय प्रकाश आर्य, यशपाल मंगला, पलवल इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन रहे स्व. संजीव मंगला व लायंस क्लब के प्रधान रहे स्व. जेके जैन भी थे। अब करीब 15 लोग अभियान में लगे हैं।
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वर्जन-
मैंने 18 साल की उम्र में पहली बार नेत्रदान के लिए फार्म भरा था। वह फार्म रखे हुए खराब हो गया। उस समय मेरे मन में यह बात आई कि फार्म भरने से नेत्रदान अभियान नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए लोगों को जागरूक कर मौखिक रूप से जाकर ही नेत्रदान कराया जा सकता है। इस बाबत मैंने दीपक गोयल व प्रवीण ग्रोवर से बात की और वे तैयार हो गए। खुशी है कि हमारे द्वारा अकेले पलवल जिले से 880 के करीब नेत्रदान करा चुके हैं। - मनीष जैन, नेत्र ज्योति एक प्रयास
आरएसएस ने नेत्रदान को लेकर एक कार्यक्रम चलाया था। उससे प्रेरणा मिली। उसी दौरान मनीष जैन व दीपक गोयल के साथ बैठकर संस्था का गठन किया। उसी दौरान हमारे मित्र अनिल सिंगला की माता का निधन हो गया और उसके बाद उनका पहला नेत्रदान कराया। तब से लेकर आज तक हम लोग सामाजिक कार्यक्रम हो या फिर किसी के यहां शादी विवाह या मांगलिक कार्यक्रम हो, हम जाकर लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक करते हैं। - प्रवीण ग्रोवर, नेत्र ज्योति एक प्रयास पलवल

1985 में सामाजिक कार्य करने की इच्छा थी। एक न्यूजपेपर में टाइम्स आई फाउंडेशन द्वारा नेत्रदान के लिए फार्म भरने का विज्ञापन आया था। उसमें से वह फार्म भर दिया। तभी से इस कार्य में जुट गया, लोगों को जागरूक करने लगा, लेकिन पहला नेत्रदान 21 साल बाद 2008 में नेत्र ज्योति प्रयास संस्था का गठन करने पर अनिल सिंगला की माता का कराया। उसके बाद से यह कार्य निरंतर बढ़ता चला गया। - दीपक गोयल, नत्र ज्योति एक प्रयास पलवल
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