{"_id":"5b7d990342c7924671663a1b","slug":"191534957827-palwal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब मेडिकल स्टोरों पर नहीं बिकेगा आक्सीटोसिन इंजेक्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब मेडिकल स्टोरों पर नहीं बिकेगा आक्सीटोसिन इंजेक्शन
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:40 PM IST
विज्ञापन
मेडिकल स्टोरों पर ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन बिकने पर लगी पाबंदी
पलवल। मेडिकल स्टोरों पर बिकने वाले ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन पर प्रदेश सरकार द्वारा बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। 31 अगस्त के बाद किसी भी मेडिकल स्टोर पर इस इंजेक्शन के पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द किया जाएगा तथा उसके खिलाफ ड्रग एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिन मेडिकल स्टोर संचालकों के पास यह ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन हैं, उन्हें अपना सारा स्टॉक कंपनी को वापिस करना होगा।
दरअसल, प्रदेश में ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार निजी फार्मा कंपनियों पर भी संबंधित इंजेक्शन के निर्माण पर रोक लगाई गई है। ऑक्सीटॉसिन के निर्माण संबंधी रॉ-मटेरियल सप्लाई पर भी रोक लगा दी गई है।
जरूरत अधिक होगी तो सिविल सर्जन से मांगना होगा इंजेक्शन
इस ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन की यदि किसी डॉक्टर या अस्पताल संचालक को आवश्यकता होगी तो उसके लिए जिले के सिविल सर्जन के आगे लिखित में जरूरत के हिसाब से डिमांड रखनी होगी, उसके बाद सिविल सर्जन द्वारा ही इस इंजेक्शन की आपूर्ति करवाई जा सकेगी। किसी भी रूप में या नाम में ऑक्सीटॉसिन को फुटकर केमिस्ट के जरिए बेचने की अनुमति नहीं होगी।
विज्ञापन
सेहत के लिए घातक है यह इंजेक्शन
स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इसे लगाकर पशुओं से दूध निकाला जाता है तथा यह इंजेक्शन गर्भपात तथा सब्जियों का आकार बढ़ाने में भी इस्तेमाल हो रहा है। इसके इस्तेमाल कर पशुओं से निकाले जाने वाले दूध व सब्जियों को खाने से महिलाओं में जहां स्तन कैंसर होने का खतरा रहता है, वहीं बच्चों में शारीरिक रोग लगने का खतरा बन जाता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता पाठक का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए ऑक्सीटॉसिन के इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। कई बार तो यह बहुत जरूरी हो जाता है। रक्तस्राव होने, बिना ऑपरेशन के डिलीवरी और असहाय दर्द के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि गलत इस्तेमाल करने से नुकसान होता है। प्रदेश सरकार का यह अच्छा कदम है। इससे ऑक्सीटॉसिन के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी। दरअसल, इसकी कई बार कुछ कम जानकार ज्यादा डोज दे देते हैं, जिनसे गर्भवती महिलाओं को खतरा होता है। एक एमएल की डोज को भी पांच हिस्सों में बांटकर दिया जाता है।
वर्जन-
जिला औषधि नियंत्रक कृष्ण कुमार ने बताया कि सरकार ने निजी ऑक्सीटॉसिन के निर्माण कंपनियों पर रोक लगा दी हैं अब ऑक्सीटॉसिन का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम में किया जायेगा। कोई मेडिकल स्टोर बिक्री करता पाएगा तो उसके खिलाफ लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में सभी संबंधित मेडिकल स्टोरों और फर्मों को इसकी जानकारी दे दी गई है।
विज्ञापन
पलवल। मेडिकल स्टोरों पर बिकने वाले ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन पर प्रदेश सरकार द्वारा बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। 31 अगस्त के बाद किसी भी मेडिकल स्टोर पर इस इंजेक्शन के पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द किया जाएगा तथा उसके खिलाफ ड्रग एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिन मेडिकल स्टोर संचालकों के पास यह ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन हैं, उन्हें अपना सारा स्टॉक कंपनी को वापिस करना होगा।
दरअसल, प्रदेश में ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार निजी फार्मा कंपनियों पर भी संबंधित इंजेक्शन के निर्माण पर रोक लगाई गई है। ऑक्सीटॉसिन के निर्माण संबंधी रॉ-मटेरियल सप्लाई पर भी रोक लगा दी गई है।
विज्ञापन
जरूरत अधिक होगी तो सिविल सर्जन से मांगना होगा इंजेक्शन
इस ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन की यदि किसी डॉक्टर या अस्पताल संचालक को आवश्यकता होगी तो उसके लिए जिले के सिविल सर्जन के आगे लिखित में जरूरत के हिसाब से डिमांड रखनी होगी, उसके बाद सिविल सर्जन द्वारा ही इस इंजेक्शन की आपूर्ति करवाई जा सकेगी। किसी भी रूप में या नाम में ऑक्सीटॉसिन को फुटकर केमिस्ट के जरिए बेचने की अनुमति नहीं होगी।
विज्ञापन
सेहत के लिए घातक है यह इंजेक्शन
स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इसे लगाकर पशुओं से दूध निकाला जाता है तथा यह इंजेक्शन गर्भपात तथा सब्जियों का आकार बढ़ाने में भी इस्तेमाल हो रहा है। इसके इस्तेमाल कर पशुओं से निकाले जाने वाले दूध व सब्जियों को खाने से महिलाओं में जहां स्तन कैंसर होने का खतरा रहता है, वहीं बच्चों में शारीरिक रोग लगने का खतरा बन जाता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता पाठक का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए ऑक्सीटॉसिन के इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। कई बार तो यह बहुत जरूरी हो जाता है। रक्तस्राव होने, बिना ऑपरेशन के डिलीवरी और असहाय दर्द के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि गलत इस्तेमाल करने से नुकसान होता है। प्रदेश सरकार का यह अच्छा कदम है। इससे ऑक्सीटॉसिन के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी। दरअसल, इसकी कई बार कुछ कम जानकार ज्यादा डोज दे देते हैं, जिनसे गर्भवती महिलाओं को खतरा होता है। एक एमएल की डोज को भी पांच हिस्सों में बांटकर दिया जाता है।
वर्जन-
जिला औषधि नियंत्रक कृष्ण कुमार ने बताया कि सरकार ने निजी ऑक्सीटॉसिन के निर्माण कंपनियों पर रोक लगा दी हैं अब ऑक्सीटॉसिन का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम में किया जायेगा। कोई मेडिकल स्टोर बिक्री करता पाएगा तो उसके खिलाफ लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में सभी संबंधित मेडिकल स्टोरों और फर्मों को इसकी जानकारी दे दी गई है।