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हरियाणा: अधिक बारिश से गिरी धान की फसल, बासमती चावल के काला पड़ने की आशंका, निर्यात होगा प्रभावित
Tue, 26 Oct 2021 12:45 PM IST
प्रमोद कुमार
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: प्रमोद कुमार
Updated Tue, 26 Oct 2021 12:45 PM IST
सार
हरियाणा से हर साल 20 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया जाता है। विदेशों में मांग के आधार पर ही किसानों को इसका भाव मिलता है। इस बार अधिक बारिश के कारण धान की फसल खराब हो चुकी है। धान गिरने से बासमती चावल के काला पड़ने की आशंका है। जिससे किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ेगा। निर्यात भी कम हो सकता है।
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बासमती चावल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हरियाणा में इस बार अक्तूबर माह में हुई सामान्य से अधिक बारिश की वजह से बासमती चावल की चमक फीकी पड़ सकती है, जिससे निर्यात प्रभावित होगा। तेज हवा और बारिश से फसल खेतों में गिर गई है। दाना काला पड़ने की आशंका है। किसानों और निर्यातकों को चिंता सताने लगी है कि चावल की चमक कम हुई तो पूरे बाजार पर असर पड़ेगा। क्योंकि विदेशी लोग बासमती चावल की चमक और खुशबू के दीवाने हैं। हर साल भारत करीब 46 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात करता है। इसमें से करीब 20 लाख एमटी चावल हरियाणा से निर्यात होता है।
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छह लाख हेक्टेयर में की गई है खेती
इससे व्यापारियों को विदेशों से करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है। इस बार प्रदेश में 6 लाख हेक्टेयर में बासमती धान लगाया गया है। अक्तूबर में बासमती चावल की फैसल के पकने का समय होता है, लेकिन इसी माह अब तक 10 साल में सबसे अधिक रिकॉर्ड 21.3 एमएम बारिश हो चुकी है। इतनी बारिश बासमती के लिए खतरा है। विदेशों में बासमती की मांग के आधार पर ही हरियाणा की मंडियों में इसके रेट तय होते हैं। पिछली बार मार्केट में बासमती 4500 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल रेट था। इस बार फसल के आने के बाद ही रेट आएंगे।
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दर्जनभर देशों में होता है निर्यात
यूं तो प्रदेश में करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, तरावड़ी, पानीपत, अंबाला, सिरसा, रानियां क्षेत्र में बासमती की खेती होती है। करनाल, कुरुक्षेत्र और कैथल को बासमती धान का कटोरा कहा जाता है। हरियाणा से अरब देशों, अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोप समेत दर्जनभर देशों में निर्यात होता है। अकेले ईरान में हर साल 10 लाख एमटी चावल निर्यात होता है।
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क्वालिटी अच्छी नहीं होगी तो बासमती चावल के दाम भी कम मिलेंगे। बासमती चावल की चमक कम होने से मांग कम हो जाती है और पूरे बाजार पर असर पड़ता है।
-विजय सेतिया, पूर्व अध्यक्ष, ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन
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एक बार फसल गिरने के बाद उठती नहीं है, ऐसे में बारसती के दाने खराब होने संभावना रहती है। दूसरा फसल गिरने से प्रति एकड़ उत्पादन भी कम होता है। इस बार अक्तबूर में अधिक बारिश होने का असर बासमती चावल समेत अन्य फसलों पर पड़ेगा।
-डॉ. जगराज, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग