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अब बाजार में बिकेगी हरियाणा की बिजली
डॉ. सुरेंद्र धीमान, चंडीगढ़।
Updated Sat, 15 Jun 2013 05:40 PM IST
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एक नवंबर, 1966 को पंजाब से अलग बना हरियाणा अपने अस्तित्व में आने के बाद आज तक बिजली की कमी से जूझता रहा है। अब पहली बार हरियाणा अपनी बिजली खुले बाजार में बेचेगा।
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प्रदेश सरकार ने हरियाणा बिजली उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीसीएल) को खुले में बिजली बेचने की मंजूरी दे दी है।
वर्ष 2007 तक केवल पानीपत थर्मल प्लांट ही बिजली पैदा करता था। उसके बाद 600 मेगावाट का यमुनानगर थर्मल प्लांट चालू हुआ। इसकी स्थापना का काम इनेलो सरकार में शुरू हो गया था मगर यह 2007 में कांग्रेस राज में चालू हुआ।
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इसके बाद मुख्यमंत्री हुड्डा ने हिसार के खेदड़ में 1200 मेगावाट का थर्मल प्लांट स्थापित करवाया। एचपीजीसीएल के पास 3167.8 मेगावाट के थर्मल प्लांट और 62.7 मेगावाट क्षमता के हाइडल प्रोजेक्ट हैं।
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पानीपत थर्मल प्लांट के एक से पांच यूनिट वर्ष 1989 से पहले के हैं। यूनिट नंबर 6, 7, 8 क्रमश: वर्ष 2001, 2004 और 2005 में चालू हुए थे।
इसके अलावा झज्जर जिले के झाड़ली में 1500 मेगावाट क्षमता का एक थर्मल प्लांट एनटीपीसी और दिल्ली सरकार के साथ मिलकर चालू हुआ है जबकि वहीं पर 1320 मेगावाट क्षमता का महात्मा गांधी पावर थर्मल प्लांट प्राइवेट कंपनी के जरिए स्थापित करवाया है।
हरियाणा की उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम एचपीजीसीएल के कुल 3230 मेगावाट क्षमता के प्लांटों से जितनी भी बिजली पैदा होती है वह सिर्फ वितरण निगम ही खरीदता है।
जब मानसून और सर्दी के मौसम में वितरण निगमों को कम बिजली की जरूरत होती है तो वे सबसे पहले एचपीजीसीएल से बिजली खरीदना बंद करते हैं। चूंकि अन्य स्रोतों से किए समझौते की बिजली जरूरी खरीदनी होती है इसलिए हरियाणा के थर्मल प्लांटों की महंगी बिजली बंद करवाई जाती है।
प्लांट बंद करवाने के बदले एचपीजीसीएल को एक रुपये प्रति यूनिट बिजली निगमों के अदा करना पड़ता है।
बंद रहने से निगमों पर पड़ता है प्रति यूनिट एक रुपये का बोझ
एचपीजीसीएल ने सरकार के पास प्रस्ताव भेजा था कि जब बिजली निगम बिजली खरीदना बंद कर देते हैं तो प्लांट बंद करने पड़ते हैं। अगर प्लांट चालू रहेंगे तो बिजली खुले बाजार में नीलामी के जरिए बेची जा सकती है। वितरण निगमों पर एक रुपये प्रति यूनिट बोझ भी नहीं पड़ेगा। इससे 46 लाख उपभोक्ताओं को फायदा होगा। प्रदेश सरकार ने इसकी अनुमति दे दी।
अब हम एचपीजीसीएल की फालतू बिजली खुले बाजार में बोली के जरिए बेच सकेंगे। हरियाणा के इतिहास में यह पहली बार होगा। कई बार बिजली वितरण निगम हमारे प्लांट बंद करवा देते हैं। उस समय यह बिजली खुले बाजार में बेची जाएगी। अभी वितरण निगम हमारी बिजली 3.70 रुपये प्रति यूनिट खरीदते हैं। वितरण निगम प्लांट बंद करवाने के बदले हमें एक रुपये प्रति यूनिट देते हैं।
अनुराग अग्रवाल, प्रबंध निदेशक, हरियाणा पावर जनरेशन कारपोरेशन लिमिटेड