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नवरात्र कल से, सज गए बाजार और मंदिर

Fri, 04 Oct 2013 12:11 AM IST
कैथ्ाल
कैथ्ाल Updated Fri, 04 Oct 2013 12:11 AM IST
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Navratri tomorrow , markets and temples now decorated
हरियाणा के जिले कैथल में नवरात्र उत्सव शनिवार से शुरू हो रहा है। इसे लेकर शहर के मंदिर व बाजारों में रौनक लग गई है।
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 बाजारों में मां की चुनरियां सज चुकी है। वहीं मंदिर परिसर को भी लाइटों से सजाया जा रहा है। बड़ी देवी मंदिर, छोटी देवी मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, श्री ग्यारह रूद्री मंदिर, हनुमान वाटिका में नवरात्रों को लेकर तैयारियां आरंभ हो चुकी है।

मां भगवती के भक्तों की ओर से बेसब्री से इस अवसर का इंतजार किया जा रहा है। इस बार नवरात्र शनिवार से आरंभ होकर शनिवार को ही दुर्गा अष्ठमी बहुत शुभ संयोग है। मां की नवरात्र रखने से व्यापार व कारोबार में वृद्धि लाभ होगा।
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नवरात्रों में मंदिरों में कार्यक्रम
नवरात्र के उपलक्ष्य में सनातन धर्म मंदिर में लगातार नौ नवरात्रों में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसमें डांडिया भी शामिल रहेगा। इसके अलावा श्री ग्यारह रूद्री मंदिर, बड़ी मंदिर, छोटी देवी मंदिर, नील कंठ मंदिर, हनुमान वाटिका में कई विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है।
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कलश स्थापित करने का शुभ समय
हनुमान वाटिका के  पंडित प्रेम शंकर शास्त्री ने बताया कि प्रथम नवरात्र के दिन सुबह 5 बजे से 7.22 मिनट तक शुभ मुहुर्त हैं। इसमें श्रद्धालु सुबह स्नान करके घट स्थापना कर सकते हैं। विधि विधान के अनुसार स्नान के बाद फल-फूल, धूप-दीप, नारियल, चुन्नी, श्रृंगार सामग्री, सिंदूर के साथ आसन लगा कर बगैर भोजन ग्रहण किए श्रद्धालु जगत जननी शैलपुत्री की उपासना करें। संकल्प करें कि जिस प्रकार हमें घट स्थापना कलश किया है इसी प्रकार हमारा परिवार अन धन, वैभव से भरा रहे। गुलाब का गुडहल, गुलाब फूल अर्पण करे। श्रीफल अर्पित करें। पंच मेवा का भोग लगाए। इसके बाद प्रतिदिन 9 वर्ष से कम उम्र की कन्या का पूजन करें। साथ ही कन्या को दक्षिणा अवश्य दें। यदि आस-पास कोई कन्या मौजूद न हो तो श्रद्धालु दुर्गा मंदिर में भी फल को चढ़ा सकते हैं।


इस समय पर शुभ नहीं कलश स्थापना
नवरात्र के दिन सुबह 9 बजे से लेकर 10.30 मिनट तक राहु काल जिसमें कलश स्थापति करना निषिद्ध है।

मां के नौ रूपों की पूजा
शरद् नवरात्र 5 अक्तूबर से शुरू हो जाएंगे। इसके बाद दुर्गा के नौ विभिन्न स्वरूपों की अलग-अलग दिन पूजा की जाएगी। प्रथम नवरात्र को शैलपुत्री, द्वितीय को, ब्रह्मचारिणी, तृतीय को चंद्रघंटा, चतुर्थ को कुष्मांडा, पांचवें नवरात्र को स्कंदमाता, छट्ठे को कात्यायनी, सातवें को कालरात्रि आठवें को महागौरी और नौवें नवरात्र को सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है।
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