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स्कूलों में भी संगीत-ड्रामा की तालीम
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 08 Jan 2014 11:21 PM IST
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संगीत और ड्रामा में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूल में संगीत और ड्रामा की तालीम मिलेगी। इन दोनों के साथ फाइन आर्ट की कक्षाएं भी स्कूलों में लगाई जाएंगी। नौवीं कक्षा के विद्यार्थी इन विषयों को विकल्प के तौर पर चुन कर इनमें करियर बना सकेंगे। इससे पूर्व यह व्यवस्था कॉलेज में ही थी। फिलहाल इसे प्रयोग के तौर पर शुरू किया जा रहा है।
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शिक्षा निदेशालय ने राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा योजना (रमसा) के तहत नौवीं कक्षा से संगीत, ड्रामा और फाइन आर्ट विषय आरंभ करने की योजना बनाई गई है। योजना को अगले सत्र यानी मार्च-अप्रैल से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
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स्कूलों में बने आर्ट एंड क्राफ्ट कमरों को स्कूल कला संसाधन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। ब्लॉक स्तर पर कला संसाधन केंद्र बनाए जाएंगे। इसके मॉड़्यूल को अंतिम रूप प्रदान किया जा रहा है। एससीईआरटी के डॉक्टर अजय बल्हरा ने बताया कि विभाग की योजना है कि अगले शिक्षा सत्र यानि अप्रैल से तीनों विषयों को शुरू कर दिया जाए।
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छात्र नौवीं कक्षा से म्युजिक, फाइन आर्ट और थियेटर में से एक को विकल्प के रूप में चुन सकेंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में इस कार्यक्रम की संयोजक सरिता ने बताया कि बच्चों को आर्ट को शिक्षा से जोड़ना है।
सरिता के अनुसार इतिहास के किसी अध्याय को छात्रों को नाटक के जरिए समझाया जाएगा। बच्चों को इस विषय को रटना नहीं पढ़ेगा। बल्कि नाटक के माध्यम से उन्हें आसानी से याद हो कराया जा सकेगा।
एससीईआरटी में हुआ मॉड्यूल तैयार
परफार्मिंग एंड क्रिऐटिव आर्ट मॉड्यूल इन एजुकेशन को लेकर एससीईआरटी में छह दिवसीय वर्कशॉप बुधवार को समाप्त हो गई। इसमें तीनों विषयों से संबंधित सिलेबस आदि पर एससीईआरटी और एनसीईआरटी के विशेषज्ञों ने मंथन किया है। इसे सिलेबस को मंजूरी के लिए एनसीईआरटी भेजा जाएगा।