{"_id":"0a08a41be795ac20436e2f83af17e826","slug":"mount-everest-winner-in-poverty","type":"story","status":"publish","title_hn":"माउंट एवरेस्ट विजेता मजबूरी में लगा रहा रेहड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माउंट एवरेस्ट विजेता मजबूरी में लगा रहा रेहड़ी
फतेहाबाद/सुरेंद्र असीजा
Updated Fri, 27 Dec 2013 11:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माउंट एवरेस्ट जैसी दुर्गम चोटी पर फतेह करवाने वाला टोहाना का रामलाल शर्मा सरकार की उपेक्षा के सामने हार गया है।
एवरेस्ट जीतने के बाद सरकार द्वारा नकद पुरस्कार और नौकरी की घोषणा तो की गई, लेकिन सात माह बाद भी उसे कुछ नहीं मिला। इस वजह से बीएससी पास यह नौजवान टोहाना की गलियों में रेहड़ी पर सब्जियां बेचने को मजबूर है। वह प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों से मिल चुका है, लेकिन आठ माह में किसी ने उसकी सुध नहीं ली। अब मजबूरी में अपने परिवार की गुजर बसर के लिए उसे गलियों में भटकना पड़ रहा है। एवरेस्ट फतेह करने के लिए भी सामाजिक संस्थाओं ने आर्थिक योगदान दिया था और उसने कुछ कर्ज भी लिया था। अब उपलब्धि हासिल करने के बावजूद उसके हाथ खाली हैं। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने माउंट एवरेस्ट विजेता कैथल की ममता सौदा को डीएसपी बनाया है।
टोहाना के रामलाल (24) को पर्वतारोहण का शौक था। उसके जुनून और प्रतिभा को देखते हुए उसका चयन इसी वर्ष एवरेस्ट पर जाने वाले दल में हुआ था। तब भी पैसे की तंगी आड़े आई थी। सामाजिक संगठनों की मदद से उसने 21 मई 2013 को माउंट एवरेस्ट पर तो विजय प्राप्त कर ली, लेकिन गरीबी से हार गया। प्रदेश सरकार की ओर से रोहतक में उसके स्वागत में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था।
इस समारोह में रामलाल शर्मा को प्रदेश सरकार की ओर से पांच लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई थी, लेकिन सात माह बीत जाने के बाद भी रामलाल को सरकार की ओर अभी तक यह राशि नहीं मिल पाई है और न ही किसी सरकारी नौकरी के लिए ऑफर मिला है। रामलाल शर्मा ने बताया कि वह सहायता के लिए प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों से मिल चुका है, लेकिन अभी तक किसी ने भी उसकी सुध नहीं ली है। रामलाल शर्मा ने बताया कि उसने माउंट एवरेस्ट पर जाने के लिए लोगों से दो लाख रुपये कर्ज लिया था, लेकिन सरकार ने उसकी प्रतिभा को कोई अहमियत नहीं दी। इस कारण अब रेहड़ी लगाकर वह लोगों का कर्ज उतार रहा है।
रेहड़ी लगाने वाले पिता अब बीमार
रामलाल के पिता सतपाल शर्मा भी रेहड़ी लगाकर परिवार का गुजारा कर रहे थे, लेकिन अब बीमारी की वजह से वे बिस्तर पर है। रामलाल ने कहा कि बीएससी पास और एवरेस्ट फतेह करने के बावजूद निजी संस्थानों में चार-पांच हजार रुपये से ज्यादा की नौकरी नहीं मिलती है। इस वजह से मजबूरी में उसे रेहड़ी लगानी पड़ रही है।
रामलाल का मामला मेरे संज्ञान में है। उसकी नौकरी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- परमवीर सिंह, कृषि मंत्री, हरियाणा
विज्ञापन
एवरेस्ट जीतने के बाद सरकार द्वारा नकद पुरस्कार और नौकरी की घोषणा तो की गई, लेकिन सात माह बाद भी उसे कुछ नहीं मिला। इस वजह से बीएससी पास यह नौजवान टोहाना की गलियों में रेहड़ी पर सब्जियां बेचने को मजबूर है। वह प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों से मिल चुका है, लेकिन आठ माह में किसी ने उसकी सुध नहीं ली। अब मजबूरी में अपने परिवार की गुजर बसर के लिए उसे गलियों में भटकना पड़ रहा है। एवरेस्ट फतेह करने के लिए भी सामाजिक संस्थाओं ने आर्थिक योगदान दिया था और उसने कुछ कर्ज भी लिया था। अब उपलब्धि हासिल करने के बावजूद उसके हाथ खाली हैं। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने माउंट एवरेस्ट विजेता कैथल की ममता सौदा को डीएसपी बनाया है।
टोहाना के रामलाल (24) को पर्वतारोहण का शौक था। उसके जुनून और प्रतिभा को देखते हुए उसका चयन इसी वर्ष एवरेस्ट पर जाने वाले दल में हुआ था। तब भी पैसे की तंगी आड़े आई थी। सामाजिक संगठनों की मदद से उसने 21 मई 2013 को माउंट एवरेस्ट पर तो विजय प्राप्त कर ली, लेकिन गरीबी से हार गया। प्रदेश सरकार की ओर से रोहतक में उसके स्वागत में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था।
इस समारोह में रामलाल शर्मा को प्रदेश सरकार की ओर से पांच लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई थी, लेकिन सात माह बीत जाने के बाद भी रामलाल को सरकार की ओर अभी तक यह राशि नहीं मिल पाई है और न ही किसी सरकारी नौकरी के लिए ऑफर मिला है। रामलाल शर्मा ने बताया कि वह सहायता के लिए प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों से मिल चुका है, लेकिन अभी तक किसी ने भी उसकी सुध नहीं ली है। रामलाल शर्मा ने बताया कि उसने माउंट एवरेस्ट पर जाने के लिए लोगों से दो लाख रुपये कर्ज लिया था, लेकिन सरकार ने उसकी प्रतिभा को कोई अहमियत नहीं दी। इस कारण अब रेहड़ी लगाकर वह लोगों का कर्ज उतार रहा है।
रेहड़ी लगाने वाले पिता अब बीमार
रामलाल के पिता सतपाल शर्मा भी रेहड़ी लगाकर परिवार का गुजारा कर रहे थे, लेकिन अब बीमारी की वजह से वे बिस्तर पर है। रामलाल ने कहा कि बीएससी पास और एवरेस्ट फतेह करने के बावजूद निजी संस्थानों में चार-पांच हजार रुपये से ज्यादा की नौकरी नहीं मिलती है। इस वजह से मजबूरी में उसे रेहड़ी लगानी पड़ रही है।
रामलाल का मामला मेरे संज्ञान में है। उसकी नौकरी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- परमवीर सिंह, कृषि मंत्री, हरियाणा