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Mahendragarh-Narnaul News: चूल्हा-चौका छोड़ खाद के लिए कतार में लगीं महिलाएं

Tue, 08 Oct 2024 01:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 08 Oct 2024 01:12 AM IST
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Women left their kitchens and queued up for fertiliser.
फोटो नंबर-11नारनौल की पुरानी अनाज मंडी में खाद लेने के दौरान आपस में उलझते किसान। संवाद
नारनौल/मंडी अटेली। जिले में किसान डीएपी के लिए सुबह से लाइन में लग कर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। खाद केंद्रों पर पुरुष किसान ही नहीं महिला किसान भी पहुंच रही है। अभी सरसों की बुआई के लिए करीब 10 से 15 दिन बचे हुए हैं, लेकिन किसानों को अभी से डीएपी नहीं मिलने का डर सता रहा है। इसकी वजह से जैसे कोऑपरेटिव केंद्रों पर खाद आने की सूचना मिलती है, किसान सुबह से पहुंचने शुरू हो जाते हैं। सोमवार को नारनौल की पुरानी मंडी में 1400 बैग डीएपी खाद के पहुंचे थे, जो शाम होते-होते किसानों को वितरित कर दिए।
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अटेली की अनाज मंडी में स्थित दी कोऑपरेटिव सोसायटी पर खाद वितरित किया गया, लेकिन किसानों की मांग अधिक होने की वजह से आधे से ज्यादा किसान बिना खाद लिए ही वापस लौट रहे हैं।
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अपनी बारी के इंतजार में उलझते रहते हैं किसान

डीएपी खाद को लेकर किसान आपस में भी उलझते रहते हैं। सोमवार को नारनौल अनाज मंडी में स्थित कोऑपरेटिव सोसायटी में किसान अपनी बारी के लिए आपस में लड़ाई करने लग गए। इसकी वजह से कोऑपरेटिव सोसायटी के कर्मचारियों ने पुलिस को बुलाया। इसके बाद किसानों को खाद वितरित की गई।
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लाइन में लगने के बाद भी नहीं मिल रही खाद
क्षेत्र में महिला अपना घरेलू कार्य छोड़ कर खाद के लिए लाइन में खड़ी होने को मजबूर हैं। किसान राजकुमार, सुरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, अशोक कुमार, सुरेश कुमार, भोपाल सिंह, दयाराम, रामसिंह, शेर सिंह, राजकुमार, सुभाष यादव, किशोरी लाल, कृष्ण कुमार आदि का कहना है कि विडंबना इस बात की है कि सारे दिन लाइन में खड़े होने के बावजूद भी खाद नहीं मिलने के कारण खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।

एक एकड़ भूमि के लिए एक डीएपी बैग की होती है जरूरत
किसानों ने बताया कि एक एकड़ भूमि में फसल की बिजाई करने के लिए एक बैग डीएपी की आवश्यकता होती है, लेकिन खाद का अभाव होने के कारण एक आईडी पर किसान को मात्र तीन बैग ही मिल रहे हैं, जो अधिक भूमि के किसान के लिए न के बराबर है। खाद लेने के लिए किसान दिनभर लाइन में खड़े होने को मजबूर हैं।


अटेली में एक सोसाइटी के नीचे 40 गांव, रहती है मारामारी
अटेली नांगल दी कोऑपरेटिव सोसाइटी के अंतर्गत 40 गांव लगते हैं। इसकी वजह से कांटी, खेड़ी, गणियार, तुर्कीयावास, राता व गुजरवास में सोसायटी की ब्रांच बनाई हुई है ताकि किसानों को अपने गांव के समीप खाद व राशि लेने देन की सुविधा उपलब्ध हो सके। पिछले चार साल से उक्त ब्रांचों में खाद ही उपलब्ध नहीं हो रहा।

नारनौल काेऑपरेटिव सोसाइटी में सोमवार को 1400 बैग डीएपी के आए थे, जो किसानों को वितरित कर दिया है।
-सत्येंद्र कुमार, मैनेजर कोऑपरेटिव सोसायटी नारनौल।
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