{"_id":"58b078414f1c1b6f1cb24f7a","slug":"well-invaite-accident-court-order","type":"story","status":"publish","title_hn":"हादसों को निमंत्रण दे रहे शहर के खुले कुएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हादसों को निमंत्रण दे रहे शहर के खुले कुएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 24 Feb 2017 11:47 PM IST
विज्ञापन
हादसों को न्योता देता खुला कुआं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोर्ट व सरकार के आदेशों की अवहेलना करना यहां के अधिकारियों की फितरत बन गई है, फिर चाहे इससे किसी का भला हो या बुरा। कुओं व बोरवेलों में गिरकर हुई बच्चों की मौत के बाद कोर्ट ने खुले हुए कुओं व बोरवेलों को ढकने के आदेश दिए हुए हैं। वहीं बंजर कुओं को बंद कराने के भी आदेश हैं। आदेशों की पालना के लिए सरकार ने इस बारे में संबंधित अधिकारियों की भी नियुक्ति की है लेकिन अधिकारी इसकी परवाह नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि शहर व आसपास के क्षेत्र में आज भी सैकड़ों सार्वजनिक खुले व बंजर कुएं हैं। शहर में इनकी संख्या सबसे अधिक है।
विदित हो कि कई वर्ष पूर्व गुरुग्राम के प्रिंस की बोरवेल में गिरने की घटना के बाद कुएं व बोरवेल में गिरने की अनेक घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं कई घटनाओं में बच्चों की जान भी जा चुकी है। इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट व सरकार ने सभी खुले हुए बोरवेलों व कुओं को ढकने के आदेश दिए थे। वहीं जहां-जहां बंजर कुएं हैं, उनको बंद करने के आदेश भी दिए हैं। लेकिन इसके बावजूद शहर में आज भी अनेक कुएं खुले हुए हैं।
नारनौल में बहुतायत में हैं कुएं व बावड़ी
नारनौल शहर प्राचीन ऐतिहासिक शहर है। यहां पर कुएं व बावड़ियों की संख्या बहुतायत है। ऐसे में यहां के पुराने मोहल्लों जैसे पीरआगा, बावड़ीपुर, नई सराय, पुरानी सराय, छोटा-बड़ा तालाब के पास, पुरानी मंडी, आदर्श नगर, रेवाड़ी रोड, मियां की सराय व जमालपुर में कई कुएं स्थापित हैं। इन कुओं में से कई कुएं तो बंजर हो चुके हैं, वहीं कई कुओं में अभी भी पानी है। रविदास मंदिर के पास व माता मसानी पर करीब पांच से छह कुएं ऐसे हैं, जो खुले हुए हैं। इन कुओं में से एक कुआं बाबा पीर की मजार के पास तो बिल्कुल खुला हुआ है। लेकिन प्रशासन ने अभी तक इन कुओं के ढंकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया है।
विज्ञापन
गाय व सुअर भी गिर चुके कुएं में
पीर बाबा की मजार के पास कुएं में एक बार गाय तथा एक बार सुअर भी गिर चुका है। वहीं इसके आसपास बच्चे भी खेलते रहते हैं। जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। ऐसे ही रेवाड़ी रोड पर भी कैलाश नगर व आदर्श नगर की ओर कई कुएं खुले हुए हैं।
बुधवार की घटना ने प्रशासन को खूब छकाया
बुधवार को ही यहां के बड़ा तालाब के पास स्थित एक खुले बावड़ीनुमा कुएं में एक व्यक्ति के गिरने की घटना ने पूरे प्रशासन को खूब छकाया। कुएं से बचाओ-बचाओ की आवाज आने के बाद वहां पर पुलिस बल, दमकल की गाड़ियां भी मौके पर पहुंची। यही नहीं गुरुग्राम से गोताखोरों को भी बुलाना पड़ा और एसपी हामिद अख्तर भी दो घंटे मौके पर मौजूद रहे। ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि यह कुआं ढंका हुआ होता तो ऐसी कोई घटना ही नहीं होती।
पुराने मोहल्लों में कई कुएं खुले हुए हैं। जिनके आसपास बच्चे खेलते रहते हैं। ऐसे में इनसे कोई भी हादसा हो सकता है।--मुरारीलाल
खुले हुए कुओं व बोरवेलों से कई हादसे हो चुके हैं। इससे कई जगह बच्चों की जान भी जा चुकी हैं। ऐसे में प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। -किशन
शहर में खुले हुए कुओं व बोरवेलों को ढकना बहुत जरूरी है। अगर इनको बंद नहीं किया गया तो कोई भी हादसा हो सकता है। बुधवार को फैली अफवाह के बाद प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। -सुनील कुमार
बोरवेल व कुओं में गिरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन को इस ओर ध्यान देकर इन खुले व बंजर पड़े हुए कुओं को शीघ्र ढकवाना चाहिए। - सतीश कुमार
शहर में जो भी सार्वजनिक स्थानों पर कुएं खुले हुए हैं, उनको ढकवाने का काम किया जाएगा। वहीं यदि किसी के निजी कुएं हैं, जो अब बंजर हो चुके हैं तथा खुले में हैं, ऐसे लोगों को नोटिस दिया जाएगा।- मनोज कुमार, ईओ, नगर परिषद, नारनौल
विज्ञापन
विदित हो कि कई वर्ष पूर्व गुरुग्राम के प्रिंस की बोरवेल में गिरने की घटना के बाद कुएं व बोरवेल में गिरने की अनेक घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं कई घटनाओं में बच्चों की जान भी जा चुकी है। इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट व सरकार ने सभी खुले हुए बोरवेलों व कुओं को ढकने के आदेश दिए थे। वहीं जहां-जहां बंजर कुएं हैं, उनको बंद करने के आदेश भी दिए हैं। लेकिन इसके बावजूद शहर में आज भी अनेक कुएं खुले हुए हैं।
विज्ञापन
नारनौल में बहुतायत में हैं कुएं व बावड़ी
नारनौल शहर प्राचीन ऐतिहासिक शहर है। यहां पर कुएं व बावड़ियों की संख्या बहुतायत है। ऐसे में यहां के पुराने मोहल्लों जैसे पीरआगा, बावड़ीपुर, नई सराय, पुरानी सराय, छोटा-बड़ा तालाब के पास, पुरानी मंडी, आदर्श नगर, रेवाड़ी रोड, मियां की सराय व जमालपुर में कई कुएं स्थापित हैं। इन कुओं में से कई कुएं तो बंजर हो चुके हैं, वहीं कई कुओं में अभी भी पानी है। रविदास मंदिर के पास व माता मसानी पर करीब पांच से छह कुएं ऐसे हैं, जो खुले हुए हैं। इन कुओं में से एक कुआं बाबा पीर की मजार के पास तो बिल्कुल खुला हुआ है। लेकिन प्रशासन ने अभी तक इन कुओं के ढंकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया है।
विज्ञापन
गाय व सुअर भी गिर चुके कुएं में
पीर बाबा की मजार के पास कुएं में एक बार गाय तथा एक बार सुअर भी गिर चुका है। वहीं इसके आसपास बच्चे भी खेलते रहते हैं। जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। ऐसे ही रेवाड़ी रोड पर भी कैलाश नगर व आदर्श नगर की ओर कई कुएं खुले हुए हैं।
बुधवार की घटना ने प्रशासन को खूब छकाया
बुधवार को ही यहां के बड़ा तालाब के पास स्थित एक खुले बावड़ीनुमा कुएं में एक व्यक्ति के गिरने की घटना ने पूरे प्रशासन को खूब छकाया। कुएं से बचाओ-बचाओ की आवाज आने के बाद वहां पर पुलिस बल, दमकल की गाड़ियां भी मौके पर पहुंची। यही नहीं गुरुग्राम से गोताखोरों को भी बुलाना पड़ा और एसपी हामिद अख्तर भी दो घंटे मौके पर मौजूद रहे। ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि यह कुआं ढंका हुआ होता तो ऐसी कोई घटना ही नहीं होती।
पुराने मोहल्लों में कई कुएं खुले हुए हैं। जिनके आसपास बच्चे खेलते रहते हैं। ऐसे में इनसे कोई भी हादसा हो सकता है।--मुरारीलाल
खुले हुए कुओं व बोरवेलों से कई हादसे हो चुके हैं। इससे कई जगह बच्चों की जान भी जा चुकी हैं। ऐसे में प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। -किशन
शहर में खुले हुए कुओं व बोरवेलों को ढकना बहुत जरूरी है। अगर इनको बंद नहीं किया गया तो कोई भी हादसा हो सकता है। बुधवार को फैली अफवाह के बाद प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। -सुनील कुमार
बोरवेल व कुओं में गिरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन को इस ओर ध्यान देकर इन खुले व बंजर पड़े हुए कुओं को शीघ्र ढकवाना चाहिए। - सतीश कुमार
शहर में जो भी सार्वजनिक स्थानों पर कुएं खुले हुए हैं, उनको ढकवाने का काम किया जाएगा। वहीं यदि किसी के निजी कुएं हैं, जो अब बंजर हो चुके हैं तथा खुले में हैं, ऐसे लोगों को नोटिस दिया जाएगा।- मनोज कुमार, ईओ, नगर परिषद, नारनौल