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Mahendragarh-Narnaul News: हिंदी के प्रचार-प्रसार में भूमिका निभा रहे दो शिक्षक
Sun, 14 Sep 2025 02:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 14 Sep 2025 02:00 AM IST
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फोटो नंबर-03डॉ. पंकज गौड़।
नारनौल। हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए वैसे कई संस्था व लोग इस कार्य जुटे हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे होते भी होते जब हिंदी की बात हो तो उनका चेहरा सामने आ जाता है। इन्होंने कहा कि हिंदी भाषा एक दूसरे को जोड़ती है।
हिंदी भाषा के संवर्धन और विकास में डॉ.पंकज गौड़ का भी विशेष योगदान है। डॉ. पंकज हिंदी प्रवक्ता पद पर राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय,धौलेड़ा में कार्यरत है। नैतिक शिक्षा पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के सदस्य के रूप में उन्होंने अपने प्रयासों से ही हिंदी साहित्य की उन विभूतियों की श्रेष्ठ रचनाओं को शामिल करवाया जिन्होंने राष्ट्र चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वहीं डॉ. ममता शर्मा इसके प्रचार व प्रसार में लगी रहती हैं। इनको बचपन से ही हिंदी साहित्य और मंचीय गतिविधियों से गहरा लगाव रहा है। उन्होंने स्नातकोत्तर हिंदी से वर्ष 2006 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से पूरी की। इसके बाद वर्ष 2008 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमफिल किया, जिसका शोध विषय था यहाँ विषय लिखें और वर्ष 2014 में हिंदी से पीएचडी की।
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डाॅ. ममता शर्मा वर्तमान में राजकीय महिला महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य पढ़ाने के साथ-साथ शोधार्थियों का मार्गदर्शन भी करती हैं।उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य हिंदी और स्थानीय भाषाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। डॉ. ममता शर्मा के कार्य को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा “नारी सम्मान पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया।
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हिंदी भाषा के संवर्धन और विकास में डॉ.पंकज गौड़ का भी विशेष योगदान है। डॉ. पंकज हिंदी प्रवक्ता पद पर राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय,धौलेड़ा में कार्यरत है। नैतिक शिक्षा पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के सदस्य के रूप में उन्होंने अपने प्रयासों से ही हिंदी साहित्य की उन विभूतियों की श्रेष्ठ रचनाओं को शामिल करवाया जिन्होंने राष्ट्र चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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वहीं डॉ. ममता शर्मा इसके प्रचार व प्रसार में लगी रहती हैं। इनको बचपन से ही हिंदी साहित्य और मंचीय गतिविधियों से गहरा लगाव रहा है। उन्होंने स्नातकोत्तर हिंदी से वर्ष 2006 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से पूरी की। इसके बाद वर्ष 2008 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमफिल किया, जिसका शोध विषय था यहाँ विषय लिखें और वर्ष 2014 में हिंदी से पीएचडी की।
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डाॅ. ममता शर्मा वर्तमान में राजकीय महिला महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य पढ़ाने के साथ-साथ शोधार्थियों का मार्गदर्शन भी करती हैं।उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य हिंदी और स्थानीय भाषाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। डॉ. ममता शर्मा के कार्य को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा “नारी सम्मान पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया।