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एक माह में ही ट्रैफिक की बत्ती गुल
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Tue, 21 Jun 2016 12:13 AM IST
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ट्रैफिक लाइट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के महावीर चौक पर नौ लाख रुपये की लागत से करीब एक माह पूर्व लगाई गई ट्रैफिक लाइटें एक माह में ही जवाब दे गईं। दो दिन से ये खराब पड़ी हैं। ट्रैफिक लाइट के एक माह में ही खराब हो जाने से जहां एक ओर नप की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं वहीं दूसरी ओर ट्रैफिक पुलिस के जवानों को पूरा दिन धूप में खड़ा रहकर पसीना ट्रैफिक कंट्रोल करना पड़ रहा है। शहर के महावीर चौक पर लगी ट्रैफिक लाइटों के खराब होने और बार-बार उनको बदलने की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर परिषद ने यहां पर मई माह में सोलर ट्रैफिक लाइटें लगवाई थी। इन लाइटों को लगाने में नप के 09 लाख रुपये खर्च हुए थे। जिला मुख्यालय नारनौल शहर में इस समय दो जगहों, महावीर चौक और होंडा चौक पर ट्रैफिक लाइटें लगी हुई हैं। होंडा चौक पर लगी ट्रैफिक लाइटें वहां पर कंट्रोलर न होने के कारण लगने के कुछ दिनों बाद ही खराब हो गई थी। जिसकी ओर एक दो बार ध्यान देने के बाद नप ने फिर ध्यान नहीं दिया। जिसके कारण ये लाइटें दो साल से ज्यादा समय से बंद ही पड़ी हैं। वहीं दूसरी ट्रैफिक लाइट शहर के सबसे व्यस्ततम चौक महावीर चौक पर लगी हुई हैं।
लाइटें खराब होने से चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था
महावीर चौक शहर का मुख्य चौक होने के कारण यहां पर ट्रैफिक का बहुत अधिक दबाव रहता है। शनिवार शाम को ये लाइटें खराब हुई थी। जिसके बाद रविवार को यातायात कम रहा, मगर सोमवार को यहां पर यातायात का दबाव अधिक हो गया। जिसके कारण यहां पर सोमवार को ट्रैफिक व्यवस्था चरमराने लगी और लाइटें ठीक न होने के कारण वाहन चालक बेतरतीब ढंग से अपने वाहनों को निकाल रहे थे। जिससे लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रैफिक कंट्रोल में छूटे पसीने
ट्रैफिक लाइटें खराब हो जाने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी ट्रैफिक पुलिस को हो रही है। लाइटें खराब होने की वजह से वहां पर ट्रैफिक नियंत्रण करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के जवानों को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। पुलिस के जवान वहां पर तेज धूप में खड़े रहकर यातायात को कंट्रोल कर रहे हैं।
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इसलिए पड़ी थी पुरानी लाइटों को बदलने की जरूरत
सोलर लाइट से पूर्व यहां पर चार में से दो दिशा में लगी बिजली संचालित लाइटें सही प्रकार से काम नहीं कर रही थी। इनमें ग्रीन बत्ती का पता नहीं चलता था। जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। लाइटें सही नहीं होने के कारण ट्रैफिक पुलिस के जवानों को ही ट्रैफिक संभालना पड़ रहा था। इससे लोगों व पुलिस दोनों को परेशानी हो रही थी। इन परेशानियों से निपटने के लिए नप ने यहां पर सोलर लाइटें लगाने का प्रस्ताव पास किया था। जिसके बाद यहां पर एक माह पूर्व ही सोलर लाइटें लगाई गई थी।
पहले वाली लाइटें भी अक्सर रहती थी खराब
महावीर चौक पर एक माह पहले लगी पुरानी बिजली से चलने वाली स्ट्रीट लाइटें अक्सर खराब रहती थी। इन लाइटों के लिए महावीर चौक के एक कोने पर बड़ के पास कंट्रोलर लगाया हुआ था। जहां से इन लाइटों को आटोमेटिक कंट्रोल किया जाता था। यहां से भूमिगत वायर चारों कोनों पर लगी लाइटों को जाती थी। मगर इस वायर में अकसर फाल्ट आ जाता था। जिससे स्ट्रीट लाइटें खराब रहती थी। कई बार टेलीफोन लाइनों व अन्य लाइनों की खुदाई के समय भी ये कट जाती थी। जिसके बाद कई-कई दिनों तक ये लाइटें ठीक नहीं होती थी।
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लाइटें खराब होने से चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था
महावीर चौक शहर का मुख्य चौक होने के कारण यहां पर ट्रैफिक का बहुत अधिक दबाव रहता है। शनिवार शाम को ये लाइटें खराब हुई थी। जिसके बाद रविवार को यातायात कम रहा, मगर सोमवार को यहां पर यातायात का दबाव अधिक हो गया। जिसके कारण यहां पर सोमवार को ट्रैफिक व्यवस्था चरमराने लगी और लाइटें ठीक न होने के कारण वाहन चालक बेतरतीब ढंग से अपने वाहनों को निकाल रहे थे। जिससे लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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ट्रैफिक कंट्रोल में छूटे पसीने
ट्रैफिक लाइटें खराब हो जाने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी ट्रैफिक पुलिस को हो रही है। लाइटें खराब होने की वजह से वहां पर ट्रैफिक नियंत्रण करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के जवानों को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। पुलिस के जवान वहां पर तेज धूप में खड़े रहकर यातायात को कंट्रोल कर रहे हैं।
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इसलिए पड़ी थी पुरानी लाइटों को बदलने की जरूरत
सोलर लाइट से पूर्व यहां पर चार में से दो दिशा में लगी बिजली संचालित लाइटें सही प्रकार से काम नहीं कर रही थी। इनमें ग्रीन बत्ती का पता नहीं चलता था। जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। लाइटें सही नहीं होने के कारण ट्रैफिक पुलिस के जवानों को ही ट्रैफिक संभालना पड़ रहा था। इससे लोगों व पुलिस दोनों को परेशानी हो रही थी। इन परेशानियों से निपटने के लिए नप ने यहां पर सोलर लाइटें लगाने का प्रस्ताव पास किया था। जिसके बाद यहां पर एक माह पूर्व ही सोलर लाइटें लगाई गई थी।
पहले वाली लाइटें भी अक्सर रहती थी खराब
महावीर चौक पर एक माह पहले लगी पुरानी बिजली से चलने वाली स्ट्रीट लाइटें अक्सर खराब रहती थी। इन लाइटों के लिए महावीर चौक के एक कोने पर बड़ के पास कंट्रोलर लगाया हुआ था। जहां से इन लाइटों को आटोमेटिक कंट्रोल किया जाता था। यहां से भूमिगत वायर चारों कोनों पर लगी लाइटों को जाती थी। मगर इस वायर में अकसर फाल्ट आ जाता था। जिससे स्ट्रीट लाइटें खराब रहती थी। कई बार टेलीफोन लाइनों व अन्य लाइनों की खुदाई के समय भी ये कट जाती थी। जिसके बाद कई-कई दिनों तक ये लाइटें ठीक नहीं होती थी।