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यमदूत बनकर सड़कों पर दौड़ रहे ट्रैक्टर ट्राली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Dec 2016 11:41 PM IST
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ओवरलोड ट्रैक्टर ट्राली
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जिले की सड़कों पर यातायात के नियमों को ताक पर रख कर अनेक ट्रैक्टर ट्राली यमदूत बनकर दौड़ रहे हैं। इन ट्रैक्टर ट्रालियों पर किसी प्रकार के कोई रिफ्लेक्टर भी नहीं लगे हुए हैं। जिसके कारण इनकी वजह से हादसे होने की संभावना हर वक्त बनी रहती है। ट्रैक्टर ट्रालियों के अलावा कई अन्य वाहन व ऊंट गाड़ियों पर भी रिफलेक्टर नहीं लगे हुए। इनसे कोई भी बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। प्रशासन भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। जनवरी माह में क्षेत्र में धुंध अधिक पड़ती है। ऐसे में इनसे हादसा होने का डर बना हुआ है।
जिले में सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन है। इन ट्रैक्टरों पर लोग ट्राली लगाकर विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं। खेती के काम की बजाए इन ट्रैक्टर ट्रालियों का प्रयोग व्यवसायिक रूप से अधिक हो रहा है। सुबह से शाम तक ईंटों, पत्थर, बजरी व अन्य भवन सामग्री से भरी ये ट्रैक्टर-ट्राली जिला की सड़कों पर मौत बनकर घूमती रहती है। सबसे ज्यादा हादसे होने की संभावना धुंध के मौसम में रहती है। इसकी वजह इन ट्रैक्टर ट्रालियों पर रिफ्लेक्टर न लगा होना है। जिसके कारण ये अन्य वाहन चालकों को दिखाई नहीं देती तथा लोग इनके शिकार हो जाते हैं।
ट्रैक्टर की ही होती है पासिंग, ट्राली की नहीं
वाहन कर रजिस्ट्रेशन कराते समय आरटीए विभाग द्वारा केवल ट्रैक्टर की ही पासिंग की जाती है। ट्रैक्टर की पासिंग करते समय ट्राली की आवश्यकता नहीं रहती। इसलिए ट्राली की न तो पासिंग होती है और न ही कोई रजिस्ट्रेशन। जिसके कारण पासिंग कराते समय लगने वाली रिफ्लेक्टर पट्टी भी ट्राली के नहीं लगती। बाद में इनके संचालक ट्राली पर रिफ्लेक्टर पट्टी लगवाना उचित नहीं समझते। जिसके कारण हादसों की संभावना ज्यादा रहती है।
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कोहरे में नहीं दिखाई देते दूसरे वाहन
सड़कों पर दौड़ने वाली ट्रैक्टर-ट्राली कोहरे के मौसम में पीछे से वाहन चालकों को नहीं दिखाई देती। जिसके कारण वाहन चालक पीछे से अपने वाहन को ट्रैक्टर-ट्राली में मार देते हैं। इससे हादसे होने की संभावना ज्यादा होती है।
कृषि की बजाए व्यवसायिक कार्यों में हो रहा प्रयोग
वैसे तो ट्रैक्टर को कृषि के कार्य में प्रयोग लाने के लिए बनाया गया था। किसान और ट्रैक्टर का मेल है, मगर आजकल इसका कृषि की बजाए व्यवसायिक कार्यों में ज्यादा प्रयोग होने लगा है। ट्रैक्टर-ट्राली का सबसे ज्यादा प्रयोग अब बिल्डिंग मैटीरियल सप्लायर करने लगे हैं, जो मैटीरियल ट्रक में जाना असंभव होता है तथा बाजार में नहीं जाता, वह सब अब ट्रैक्टर ट्राली में जाता है।
सुबह-सुबह ज्यादा निकलती हैं ट्रालियां
ट्रैक्टर-ट्राली सुबह के समय ज्यादा निकलती हैं। सुबह के समय धुंध भी गहरी रहती है। बजरी, ईंट, पत्थर आदि से भी ट्रालियां सुबह-सुबह ही ज्यादा सड़कों पर दिखाई देती हैं। सुभाष पार्क के पास, मोहल्ला जमालपुर, नई सराय व रविदास मंदिर के पास इन ट्रैक्टर ट्रालियों का ठिकाना रहता है। जहां से बजरी आदि की चोरी छिपे आपूर्ति होती है।
ऊंट गाड़ियों पर भी नहीं होते रिफ्लेक्टर
ट्रैक्टर-ट्राली के अलावा ऊंट गाड़ियों पर भी रिफ्लेक्टर नहीं लगे होते। जिसके कारण ये भी हादसों में सहायक हैं। इनसे भी कई बार हादसे हो चुके हैं। जनवरी 2016 में रिफ्लेक्टर न होने के कारण सिंघाना रोड पर एक ऊंट गाड़ी व धरसूं गांव के पास तीन ऊंट गाड़ी इसका शिकार हो गई थी। जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि चार घायल हो गए थे, वहीं कई ऊंट भी घायल हो गया था
-कुछ बड़े हादसे
-नांगल चौधरी निजामपुर रोड पर ट्रैक्टर ट्राली की चपेट में आने से दो वर्ष पूर्व दो बाइक सवारों की मौत हो गई थी।
-गांव बाछौद के पास तीन साल पूर्व कोहरे के मौसम में पीछे से टक्कर मारने से बाइक सवार की मौत हुई थी।
--गांव बाछौद के पास ही एक कार ने पीछे से ट्रैक्टर ट्राली ने टक्कर मार दी थी। जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी।
-धरसूं के पास जनवरी 2016 में एक ट्रैक्टर चालक ने तीन ऊंट गाड़ियों को टक्कर मार दी। जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं दो अन्य घायल हो गए थे।
-जनवरी 2016 में ही सिंघाना रोड पर एक बस चालक ने ऊंट गाड़ी को टक्कर मार दी। जिससे ऊंट व उसका मालिक घायल हो गया।
2016 में हुए सड़क हादसे
माह मृत घायल
जनवरी 6 20
फरवरी 5 17
मार्च 8 10
अप्रैल 3 25
मई 9 18
जून 7 13
जुलाई 8 28
अगस्त 9 17
सितंबर 11 33
अक्तूूबर 7 23
नवंबर 6 25
दिसंबर 9 28
यातायात के नियमों की अवहेलना करने वालों के चालान काटे जाते हैं गत एक माह में करीब 643 चालान किए गए थे। फिलहाल ट्रैक्टर ट्रालियों या अन्य किसी वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाने की कोई योजना नहीं है। सांवतराम, ट्रैफिक एसएचओ, नारनौल
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जिले में सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन है। इन ट्रैक्टरों पर लोग ट्राली लगाकर विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं। खेती के काम की बजाए इन ट्रैक्टर ट्रालियों का प्रयोग व्यवसायिक रूप से अधिक हो रहा है। सुबह से शाम तक ईंटों, पत्थर, बजरी व अन्य भवन सामग्री से भरी ये ट्रैक्टर-ट्राली जिला की सड़कों पर मौत बनकर घूमती रहती है। सबसे ज्यादा हादसे होने की संभावना धुंध के मौसम में रहती है। इसकी वजह इन ट्रैक्टर ट्रालियों पर रिफ्लेक्टर न लगा होना है। जिसके कारण ये अन्य वाहन चालकों को दिखाई नहीं देती तथा लोग इनके शिकार हो जाते हैं।
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ट्रैक्टर की ही होती है पासिंग, ट्राली की नहीं
वाहन कर रजिस्ट्रेशन कराते समय आरटीए विभाग द्वारा केवल ट्रैक्टर की ही पासिंग की जाती है। ट्रैक्टर की पासिंग करते समय ट्राली की आवश्यकता नहीं रहती। इसलिए ट्राली की न तो पासिंग होती है और न ही कोई रजिस्ट्रेशन। जिसके कारण पासिंग कराते समय लगने वाली रिफ्लेक्टर पट्टी भी ट्राली के नहीं लगती। बाद में इनके संचालक ट्राली पर रिफ्लेक्टर पट्टी लगवाना उचित नहीं समझते। जिसके कारण हादसों की संभावना ज्यादा रहती है।
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कोहरे में नहीं दिखाई देते दूसरे वाहन
सड़कों पर दौड़ने वाली ट्रैक्टर-ट्राली कोहरे के मौसम में पीछे से वाहन चालकों को नहीं दिखाई देती। जिसके कारण वाहन चालक पीछे से अपने वाहन को ट्रैक्टर-ट्राली में मार देते हैं। इससे हादसे होने की संभावना ज्यादा होती है।
कृषि की बजाए व्यवसायिक कार्यों में हो रहा प्रयोग
वैसे तो ट्रैक्टर को कृषि के कार्य में प्रयोग लाने के लिए बनाया गया था। किसान और ट्रैक्टर का मेल है, मगर आजकल इसका कृषि की बजाए व्यवसायिक कार्यों में ज्यादा प्रयोग होने लगा है। ट्रैक्टर-ट्राली का सबसे ज्यादा प्रयोग अब बिल्डिंग मैटीरियल सप्लायर करने लगे हैं, जो मैटीरियल ट्रक में जाना असंभव होता है तथा बाजार में नहीं जाता, वह सब अब ट्रैक्टर ट्राली में जाता है।
सुबह-सुबह ज्यादा निकलती हैं ट्रालियां
ट्रैक्टर-ट्राली सुबह के समय ज्यादा निकलती हैं। सुबह के समय धुंध भी गहरी रहती है। बजरी, ईंट, पत्थर आदि से भी ट्रालियां सुबह-सुबह ही ज्यादा सड़कों पर दिखाई देती हैं। सुभाष पार्क के पास, मोहल्ला जमालपुर, नई सराय व रविदास मंदिर के पास इन ट्रैक्टर ट्रालियों का ठिकाना रहता है। जहां से बजरी आदि की चोरी छिपे आपूर्ति होती है।
ऊंट गाड़ियों पर भी नहीं होते रिफ्लेक्टर
ट्रैक्टर-ट्राली के अलावा ऊंट गाड़ियों पर भी रिफ्लेक्टर नहीं लगे होते। जिसके कारण ये भी हादसों में सहायक हैं। इनसे भी कई बार हादसे हो चुके हैं। जनवरी 2016 में रिफ्लेक्टर न होने के कारण सिंघाना रोड पर एक ऊंट गाड़ी व धरसूं गांव के पास तीन ऊंट गाड़ी इसका शिकार हो गई थी। जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि चार घायल हो गए थे, वहीं कई ऊंट भी घायल हो गया था
-कुछ बड़े हादसे
-नांगल चौधरी निजामपुर रोड पर ट्रैक्टर ट्राली की चपेट में आने से दो वर्ष पूर्व दो बाइक सवारों की मौत हो गई थी।
-गांव बाछौद के पास तीन साल पूर्व कोहरे के मौसम में पीछे से टक्कर मारने से बाइक सवार की मौत हुई थी।
--गांव बाछौद के पास ही एक कार ने पीछे से ट्रैक्टर ट्राली ने टक्कर मार दी थी। जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी।
-धरसूं के पास जनवरी 2016 में एक ट्रैक्टर चालक ने तीन ऊंट गाड़ियों को टक्कर मार दी। जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं दो अन्य घायल हो गए थे।
-जनवरी 2016 में ही सिंघाना रोड पर एक बस चालक ने ऊंट गाड़ी को टक्कर मार दी। जिससे ऊंट व उसका मालिक घायल हो गया।
2016 में हुए सड़क हादसे
माह मृत घायल
जनवरी 6 20
फरवरी 5 17
मार्च 8 10
अप्रैल 3 25
मई 9 18
जून 7 13
जुलाई 8 28
अगस्त 9 17
सितंबर 11 33
अक्तूूबर 7 23
नवंबर 6 25
दिसंबर 9 28
यातायात के नियमों की अवहेलना करने वालों के चालान काटे जाते हैं गत एक माह में करीब 643 चालान किए गए थे। फिलहाल ट्रैक्टर ट्रालियों या अन्य किसी वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाने की कोई योजना नहीं है। सांवतराम, ट्रैफिक एसएचओ, नारनौल