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Mahendragarh-Narnaul News: बाल विवाह अधिनियम में हलवाई, टैंट, पंडितों पर भी जुर्माने का है प्रावधान
Sat, 23 Nov 2024 01:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 23 Nov 2024 01:35 AM IST
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फोटो नंबर-04 जागरूकता अभियान के दौरान संबोधित करते सदस्य सुमन राणा व गणेश कुमार। स्रोत-प्रशास
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नारनौल/ महेंद्रगढ़।
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से खंड सतनाली में अभिभावकों व आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर के लिए आयोजित सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य सुमन राणा व गणेश कुमार ने कहा कि समाज में बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता सुनिश्चित करने का हम सभी का कर्तव्य है।
कहा कि बाल विवाह समाज की बहुत बुरी कुरीति है। इसके उन्मूलन के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना होगा। छोटी बच्चियों का बाल विवाह उनके साथ शारीरिक व मानसिक रूप से क्रूरता है। सरकार की ओर से इसकी रोकथाम के लिए सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं। बाल विवाह करने वाले अभिभावक, हलवाई, टैंट व पंडित आदि की सहायता करने वाले के लिए कठोर दंड व जुर्माने का प्रावधान है। कुमार ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता के लिए सर्वप्रथम उनके बाल अधिकार को सुनिश्चित करना है। बच्चों को जीने का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, सहभागिता का अधिकार व सुरक्षा का अधिकार है। इन अधिकारों को सुनिश्चित करके ही बच्चों का शारिरीक, मानसिक, सामाजिक व बौद्धिक विकास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाल अपराध, यौन शोषण जैसी बढ़ती आपराधिक घटनाओं से बचने के लिए बच्चों व उनके अभिभावकों को सचेत और जागरूक होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुड टच व बैड टच के बारे में भी जागरूक करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर जिला बाल कल्याण समिति व जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यालय के कर्मचारी उपस्थित थे।
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से खंड सतनाली में अभिभावकों व आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर के लिए आयोजित सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य सुमन राणा व गणेश कुमार ने कहा कि समाज में बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता सुनिश्चित करने का हम सभी का कर्तव्य है।
कहा कि बाल विवाह समाज की बहुत बुरी कुरीति है। इसके उन्मूलन के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना होगा। छोटी बच्चियों का बाल विवाह उनके साथ शारीरिक व मानसिक रूप से क्रूरता है। सरकार की ओर से इसकी रोकथाम के लिए सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं। बाल विवाह करने वाले अभिभावक, हलवाई, टैंट व पंडित आदि की सहायता करने वाले के लिए कठोर दंड व जुर्माने का प्रावधान है। कुमार ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता के लिए सर्वप्रथम उनके बाल अधिकार को सुनिश्चित करना है। बच्चों को जीने का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, सहभागिता का अधिकार व सुरक्षा का अधिकार है। इन अधिकारों को सुनिश्चित करके ही बच्चों का शारिरीक, मानसिक, सामाजिक व बौद्धिक विकास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाल अपराध, यौन शोषण जैसी बढ़ती आपराधिक घटनाओं से बचने के लिए बच्चों व उनके अभिभावकों को सचेत और जागरूक होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुड टच व बैड टच के बारे में भी जागरूक करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर जिला बाल कल्याण समिति व जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यालय के कर्मचारी उपस्थित थे।
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