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Mahendragarh-Narnaul News: स्कूलों में छोटी मरम्मत के लिए अब फाइलों का इंतजार खत्म, प्राचार्यों को मिली 5 लाख की छूट

Wed, 22 Apr 2026 10:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 10:48 PM IST
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The wait for files for minor repairs in schools is over, principals get a rebate of Rs 5 lakh.
फोटो नंबर-16राजकीय प्राथमिक पाठशाला में पढ़ते बच्चे। संवाद
नारनौल। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब स्कूल प्राचार्य और मुख्य अध्यापक बिना विभागीय अनुमति के मरम्मत व जरूरी कार्य करवा सकेंगे। विभाग के प्रधान सचिव ने प्रत्येक स्कूल को चाइल्ड वेलफेयर फंड से 5 लाख रुपये तक खर्च करने की अनुमति दी है।
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इससे छोटी-छोटी जरूरतों के लिए अब अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह हाल ही में हुए निरीक्षण में सामने आई खामियां हैं। कई स्कूलों में पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई, चहारदीवारी और सुरक्षा व्यवस्था बेहद खराब पाई गई। विद्यार्थियों के शौचालयों की हालत दयनीय मिली जहां पानी की कमी, टूटी फिटिंग और गंदगी आम समस्या है।
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नई व्यवस्था के तहत हर स्कूल में स्थानीय परचेज कमेटी का गठन अनिवार्य किया गया है। यह समिति बाजार सर्वे के आधार पर 10 हजार से 1 लाख रुपये तक के कार्यों की अनुशंसा करेगी। समिति की जिम्मेदारी होगी कि सामग्री की गुणवत्ता और दरें उचित हों तथा आपूर्तिकर्ता विश्वसनीय हो।
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जिले के कई स्कूलों में बच्चों के शौचालय उपयोग लायक नहीं हैं। वहीं पीने के पानी की टंकियों की नियमित सफाई भी नहीं हो रही। यदि स्कूल मुखिया इस राशि का सही उपयोग करते हैं, तो आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में स्पष्ट सुधार देखने को मिल सकता है और विद्यार्थियों को स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण मिल पाएगा।

वर्जन:
सभी स्कूल प्रिंसिपल और हेडमास्टर को अपने-अपने विद्यालयों की जमीनी स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। छोटे मरम्मत कार्यों को बाल कल्याण कोष से पूरा करने और आवश्यकता होने पर समयबद्ध तरीके से प्रस्ताव मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इन कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी और सभी स्कूलों से साप्ताहिक रिपोर्ट ली जाएगी। -डॉ. विश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल।
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