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Mahendragarh-Narnaul News: जांच करने आई एनएचएम की टीम को स्टूडेंट बीपी शुगर की जांच करते मिले
Fri, 07 Feb 2025 12:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 07 Feb 2025 12:34 AM IST
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फोटो नंबर-01नागरिक अस्पताल में मरीजों से समस्या जानती टीम की सदस्या डाॅ. शालू। संवाद
नारनौल। मुख्यालय से आई नेशनल हेल्थ मिशन की महिला अधिकारी सहित दो सदस्यीय टीम ने वीरवार को नागरिक अस्पताल का निरीक्षण किया।
इस दौरान टीम को गायनी ओपीडी में कई कमियां मिलीं। इसके बाद टीम ने चिकित्सा अधीक्षक को कमियों को दूर करवाने के निर्देश दिए। साथ ही रेफर की जाने वाली गर्भवतियों के लिए एक अलग से रजिस्टर में उनका रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत पड़ने पर देखा जा सके।
एनएचएम से आई डॉ. शालू गर्ग और डॉ. सुरेश भोसले ने सबसे पहले नागरिक अस्पताल की पुरानी इमारत में स्थित गायनी ओपीडी का जायजा लिया। इस दौरान रास्ते में एक खिड़की की जाली और कांच टूटे मिले। इन्हें दुरुस्त करवाने के लिए चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डॉ. आशा को कहा गया। इसके बाद जब टीम ओपीडी में पहुंची तो नर्सिंग स्टूडेंट गर्भवतियों की बीपी और शुगर आदि की जांच करते मिले। इस पर डॉ. शालू ने नाराजगी व्यक्त करते हुए एमएस को सख्त हिदायत दी। कहा कि बीपी, शुगर की जांच चिकित्सक से ही कराएं।
गर्भवतियों के ओपीडी कार्ड का रंग नीला है। इस पर डॉ. शालू ने एमएस को निर्देश दिए कि महिलाओं के कार्ड का रंग बदलकर हल्का गुलाबी करें, ताकि अलग से ही पहचाना जा सके कि महिला गर्भवती है। इसके अलावा रेफर की जाने वाली महिलाओं का रिकॉर्ड मैनेज करने के लिए एक अलग से रजिस्टर बनाएं। ।
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वजन कम होने का कारण पूछा तो ताकने लगे एक दूसरे का चेहरा
एनएचएम टीम के सदस्यों ने एक महिला का वजन चेक किया तो पिछली बार के मुकाबले करीब 800 ग्राम कम निकला। इस पर डॉ. शालू ने स्टाफ से वजन कम होने का कारण पूछा तो सभी एक दूसरे का चेहरा ताकने लगे। एक ने कहा अच्छा खानपान न होने के चलते हो सकता है। डॉ. शालू ने कहा कि गर्भ धारण करने के बाद तो वजन बढ़ना चाहिए कम कैसे हो गया। इस पर सभी सकपका गए। इसका जवाब भी डॉ. शालू ने देते हुए कहा कि दो माह पहले सर्दी अधिक थी और महिला ने कपड़े भी अधिक पहने होंगे और आप लोगों ने बगैर अतिरिक्त कपड़े उतरवाए ही वजन चेक किया होगा। इसलिए यह फर्क आया है। इस तरह टीम ने स्टाफ को छोटी-छोटी बातों पर विशेष ध्यान देने की हिदायत दी।
इंसेट
80 की ओपीडी पर जताई नाराजगी
टीम ने गर्भवतियों की ओपीडी के बारे में पूछा। इसपर स्टाफ ने बताया कि रोजाना करीब 80 ओपीडी रहती है। इस पर डॉ. शालू ने कहा कि मुख्यालय पर स्थित अस्पताल में महज 80 की ओपीडी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब मरीज आप लोगों की सेवा से खुश नहीं हैं। उन्होंने सभी स्टाफ को हिदायत दी कि कार्यशैली में सुधार करिए और मरीज का हरसंभव उपचार करें।
इंसेट
फ्री में कराएं अल्ट्रासाउंड
डॉ. शालू ने ओपीडी में गर्भवतियों से भी बातचीत भी की। इस दौरान एक महिला ने कहा कि वह अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आई थी, लेकिन उसे अगली तारीख पर आने को कहा गया। इस पर उसने निजी सेंटर से अल्ट्रासाउंड कराया है। इस पर डॉ. शालू ने कहा कि कोई भी महिला निजी सेंटर में पैसे देकर अल्ट्रासाउंड न कराए। अगर कोई दिक्कत आती भी है तो चिकित्सक से पर्ची कटवाकर पैनल वाले अस्पताल में मुफ्त में ही अल्ट्रासाउंड कराएं। साथ ही उन्होंने ओपीडी में पैनल वाले अस्पताल की लिस्ट चस्पा करने के निर्देश भी दिए।
बॉक्स:
टॉयलेट पर लटके मिले ताले
ओपीडी से बाहर निकलते समय टीम की नजर सामने लगे तालों पर गई। टीम ने पूछा कि ये ताले क्यों लगे हैं। तो स्टाफ नर्स ने बताया कि यह मरीजों के लिए टॉयलेट है। इसके बाद आननफानन ताले खुलवाए गए। टीम ने जायजा लिया। इसके बाद डॉ. शालू ने वहां पर साइन बोर्ड लगाने के अलावा लाइट व एगजॉस्ट फैन लगवाने के निर्देश दिए। इसके बाद टीम ने गायनी वार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम के साथ एमएस डॉ. आशा शर्मा, डॉ. हर्ष चौहान और डीपीएम संदीप यादव आदि मौजूद थे।
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इस दौरान टीम को गायनी ओपीडी में कई कमियां मिलीं। इसके बाद टीम ने चिकित्सा अधीक्षक को कमियों को दूर करवाने के निर्देश दिए। साथ ही रेफर की जाने वाली गर्भवतियों के लिए एक अलग से रजिस्टर में उनका रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत पड़ने पर देखा जा सके।
एनएचएम से आई डॉ. शालू गर्ग और डॉ. सुरेश भोसले ने सबसे पहले नागरिक अस्पताल की पुरानी इमारत में स्थित गायनी ओपीडी का जायजा लिया। इस दौरान रास्ते में एक खिड़की की जाली और कांच टूटे मिले। इन्हें दुरुस्त करवाने के लिए चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डॉ. आशा को कहा गया। इसके बाद जब टीम ओपीडी में पहुंची तो नर्सिंग स्टूडेंट गर्भवतियों की बीपी और शुगर आदि की जांच करते मिले। इस पर डॉ. शालू ने नाराजगी व्यक्त करते हुए एमएस को सख्त हिदायत दी। कहा कि बीपी, शुगर की जांच चिकित्सक से ही कराएं।
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गर्भवतियों के ओपीडी कार्ड का रंग नीला है। इस पर डॉ. शालू ने एमएस को निर्देश दिए कि महिलाओं के कार्ड का रंग बदलकर हल्का गुलाबी करें, ताकि अलग से ही पहचाना जा सके कि महिला गर्भवती है। इसके अलावा रेफर की जाने वाली महिलाओं का रिकॉर्ड मैनेज करने के लिए एक अलग से रजिस्टर बनाएं। ।
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वजन कम होने का कारण पूछा तो ताकने लगे एक दूसरे का चेहरा
एनएचएम टीम के सदस्यों ने एक महिला का वजन चेक किया तो पिछली बार के मुकाबले करीब 800 ग्राम कम निकला। इस पर डॉ. शालू ने स्टाफ से वजन कम होने का कारण पूछा तो सभी एक दूसरे का चेहरा ताकने लगे। एक ने कहा अच्छा खानपान न होने के चलते हो सकता है। डॉ. शालू ने कहा कि गर्भ धारण करने के बाद तो वजन बढ़ना चाहिए कम कैसे हो गया। इस पर सभी सकपका गए। इसका जवाब भी डॉ. शालू ने देते हुए कहा कि दो माह पहले सर्दी अधिक थी और महिला ने कपड़े भी अधिक पहने होंगे और आप लोगों ने बगैर अतिरिक्त कपड़े उतरवाए ही वजन चेक किया होगा। इसलिए यह फर्क आया है। इस तरह टीम ने स्टाफ को छोटी-छोटी बातों पर विशेष ध्यान देने की हिदायत दी।
इंसेट
80 की ओपीडी पर जताई नाराजगी
टीम ने गर्भवतियों की ओपीडी के बारे में पूछा। इसपर स्टाफ ने बताया कि रोजाना करीब 80 ओपीडी रहती है। इस पर डॉ. शालू ने कहा कि मुख्यालय पर स्थित अस्पताल में महज 80 की ओपीडी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब मरीज आप लोगों की सेवा से खुश नहीं हैं। उन्होंने सभी स्टाफ को हिदायत दी कि कार्यशैली में सुधार करिए और मरीज का हरसंभव उपचार करें।
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फ्री में कराएं अल्ट्रासाउंड
डॉ. शालू ने ओपीडी में गर्भवतियों से भी बातचीत भी की। इस दौरान एक महिला ने कहा कि वह अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आई थी, लेकिन उसे अगली तारीख पर आने को कहा गया। इस पर उसने निजी सेंटर से अल्ट्रासाउंड कराया है। इस पर डॉ. शालू ने कहा कि कोई भी महिला निजी सेंटर में पैसे देकर अल्ट्रासाउंड न कराए। अगर कोई दिक्कत आती भी है तो चिकित्सक से पर्ची कटवाकर पैनल वाले अस्पताल में मुफ्त में ही अल्ट्रासाउंड कराएं। साथ ही उन्होंने ओपीडी में पैनल वाले अस्पताल की लिस्ट चस्पा करने के निर्देश भी दिए।
बॉक्स:
टॉयलेट पर लटके मिले ताले
ओपीडी से बाहर निकलते समय टीम की नजर सामने लगे तालों पर गई। टीम ने पूछा कि ये ताले क्यों लगे हैं। तो स्टाफ नर्स ने बताया कि यह मरीजों के लिए टॉयलेट है। इसके बाद आननफानन ताले खुलवाए गए। टीम ने जायजा लिया। इसके बाद डॉ. शालू ने वहां पर साइन बोर्ड लगाने के अलावा लाइट व एगजॉस्ट फैन लगवाने के निर्देश दिए। इसके बाद टीम ने गायनी वार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम के साथ एमएस डॉ. आशा शर्मा, डॉ. हर्ष चौहान और डीपीएम संदीप यादव आदि मौजूद थे।