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Mahendragarh-Narnaul News: पात्रों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा
Sun, 14 Sep 2025 01:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:45 AM IST
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फोटो नंबर-06नारनौल का महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय। संवाद
नारनौल। महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में अधिकारियों की कमी है। इससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
प्रोजेक्ट ऑफिसर (पीओ) संगीता के 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो जाने के कारण पद खाली है। वहीं जिले के पांचों खंड नारनौल, महेंद्रगढ़, अटेली, नांगल चौधरी और कनीना की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के पद भी पांच महीने से खाली हैं। इससे विभाग की योजनाओं जैसे आंगनबाड़ी सेवा, महिला एवं बाल कल्याण कार्यक्रम और पोषण अभियान आदि पर असर पड़ रहा है।
सरकार की योजना मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना व प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना पर भी असर पर पड़ रहा है। इसके अलावा अधिकारियों की अनुपस्थिति से आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण, पोषण सामग्री का समय पर वितरण और लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच प्रभावित हो रही है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पात्रों को भी योजनाओं का लाभ सही समय पर नहीं मिल पा रहा। विभाग ने फिलहाल रेवाड़ी की सीडीपीओ को जिले के प्रोजेक्ट ऑफिसर का अतिरिक्त चार्ज दिया है। हालांकि उनके पास दो जिलों का कार्यभार होने के कारण वे नारनौल व आसपास के क्षेत्रों में बहुत कम आ पाती हैं। परिणामस्वरूप कार्यालय से जुड़े जरूरी काम लटके रहते हैं।
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नारनौल जिला मुख्यालय होने पर यहां कोई अधिकारी नहीं है जबकि विभाग के आफिस में अन्य सभी कर्मचारी पूरे हैं। लोगों का कहना है कि जिले में अधिकारियों की नियुक्ति जरूरी है। यदि जल्द ही सीडीपीओ और प्रोजेक्ट ऑफिसर की तैनाती नहीं की गई, तो महिलाओं और बच्चों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ पात्रों तक समय पर नहीं पहुंच पाएगा।
बाक्स-
जिले में कुल 1201 आंगनबाड़ी केंद्र
जिले में 1201 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इन केंद्रों में 142 प्ले स्कूल भी शामिल हैं। इन सभी आंगनबाड़ी में कार्यों के निरीक्षण व योजनाओं को चलाने के लिए सीडीपीओ कार्य करती हैं।
वर्जन-
महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में पीओ और सीडीपीओ की नियुक्ति को गंभीरता से लिया जाएगा। पत्र उपायुक्त के माध्यम से उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। प्रयास किया जाएगा कि जल्द ही अधिकारियों की तैनाती हो जिससे जरूरी काम प्रभावित न हों।-मंगल सैन, नगराधीश, नारनौल
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प्रोजेक्ट ऑफिसर (पीओ) संगीता के 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो जाने के कारण पद खाली है। वहीं जिले के पांचों खंड नारनौल, महेंद्रगढ़, अटेली, नांगल चौधरी और कनीना की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के पद भी पांच महीने से खाली हैं। इससे विभाग की योजनाओं जैसे आंगनबाड़ी सेवा, महिला एवं बाल कल्याण कार्यक्रम और पोषण अभियान आदि पर असर पड़ रहा है।
सरकार की योजना मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना व प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना पर भी असर पर पड़ रहा है। इसके अलावा अधिकारियों की अनुपस्थिति से आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण, पोषण सामग्री का समय पर वितरण और लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच प्रभावित हो रही है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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पात्रों को भी योजनाओं का लाभ सही समय पर नहीं मिल पा रहा। विभाग ने फिलहाल रेवाड़ी की सीडीपीओ को जिले के प्रोजेक्ट ऑफिसर का अतिरिक्त चार्ज दिया है। हालांकि उनके पास दो जिलों का कार्यभार होने के कारण वे नारनौल व आसपास के क्षेत्रों में बहुत कम आ पाती हैं। परिणामस्वरूप कार्यालय से जुड़े जरूरी काम लटके रहते हैं।
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नारनौल जिला मुख्यालय होने पर यहां कोई अधिकारी नहीं है जबकि विभाग के आफिस में अन्य सभी कर्मचारी पूरे हैं। लोगों का कहना है कि जिले में अधिकारियों की नियुक्ति जरूरी है। यदि जल्द ही सीडीपीओ और प्रोजेक्ट ऑफिसर की तैनाती नहीं की गई, तो महिलाओं और बच्चों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ पात्रों तक समय पर नहीं पहुंच पाएगा।
बाक्स-
जिले में कुल 1201 आंगनबाड़ी केंद्र
जिले में 1201 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इन केंद्रों में 142 प्ले स्कूल भी शामिल हैं। इन सभी आंगनबाड़ी में कार्यों के निरीक्षण व योजनाओं को चलाने के लिए सीडीपीओ कार्य करती हैं।
वर्जन-
महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में पीओ और सीडीपीओ की नियुक्ति को गंभीरता से लिया जाएगा। पत्र उपायुक्त के माध्यम से उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। प्रयास किया जाएगा कि जल्द ही अधिकारियों की तैनाती हो जिससे जरूरी काम प्रभावित न हों।-मंगल सैन, नगराधीश, नारनौल