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Mahendragarh-Narnaul News: चाय वाले ने बेटे को डाॅक्टर और बेटी को इंजीनियर बनाया
Sun, 15 Jun 2025 12:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 15 Jun 2025 12:50 AM IST
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फोटो नंबर- 05सूबे सिंह अपने बेटे डॉ. महिपाल के साथ। स्रोत-स्वयं
- फोटो : udhampur
नारनौल।
मां जहां बच्चे का पालन-पोषण का दायित्व संभालती है, पिता एक मार्गदर्शक, रक्षक और प्रेरणा का स्रोत होते हैं। सही और गलत का फर्क सिखाते हैं, उन्हें अनुशासन और जिम्मेदारी का महत्व समझाते हैं। वे बच्चों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद कर उन्हें कामयाबी की राह दिखाते हैं। गांव नांगतिहाड़ी के सूबेसिंह ने भी संघर्ष की राह पर चलते हुए अपने बच्चों को कामयाब बनाकर नजीर पेश की है। उनकी तरह ही जीवनभर मेहनत और संघर्ष से अपने बच्चों की कामयाबी सुनिश्चित करने वाले हर पिता को आज पितृ दिवस पर नमन है।
गांव नांगतिहाड़ी के सूबेसिंह ने सिंघाना रोड पर 30 साल चाय की स्टॉल चलाई
गांव नांगतिहाड़ी के सूबेसिंह ने अपने कड़े संघर्ष व मेहनत के बल अपने दोनों बच्चों को उस कामयाबी पर पहुंचा दिया जिस कामयाबी पर मां-बाप अपने बच्चों को देखना चाहते है। सूबेसिंह ने नारनौल सिंघाना रोड पर तीस साल चाय बेचकर बेटे महिपाल को डाॅक्टर व बेटी प्रियंका इंजीनियर बना दिया। सूबेसिंह ने बच्चों को कामयाब करने के लिए एक रेहड़ी पर एक छोटा सा तिरपाल लगाकर सर्दी-गर्मी व बारिश में खड़े रहकर चाय बनाई। सूबेसिंह के संघर्ष के चलते आज उनके बेटा-बेटी उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां हर मां-बाप अपने बच्चों को देखना तो चाहते हैं।
आर्थिक तंगी को नहीं बनने दिया बाधा
सूबेसिंह ने बताया कि उनके दोनों बच्चे पढ़ाई में होशियार थे। इसलिए उन्होंने हमेशा उनको पढ़ने के लिए प्रेरित किया। बेटे की मेडिकल की पढ़ाई में आर्थिक तंगी भी आड़े आई, परंतु वे निराश नहीं हुए और जैसे-तैसे इसका भी समाधान किया। बेटे महिपाल ने भी उनकी मेहनत और संघर्ष को विफल नहीं जाने दिया। दिन-रात मेहनत लगन के साथ तैयारी कर प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) हरियाणा में एससी कोटे से पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उसका चयन महाराष्ट्र स्थित महात्मा गांधी मेडिकल इंस्टीट्यूट में हुआ। डॉ. महिपाल अब रोहतक पीजीआई में सेवाएं दे रहे हैं।
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शिक्षित बेटी दो घर करती है रोशन
सूबेसिंह बताते हैं समाज में कुछ लोग बेटा-बेटी में फर्क समझते हैं। बेटियों की शिक्षा के बारे में यह धारणा रखते हैं कि उन्हें तो पराए घर जाना है, ज्यादा किसलिए पढ़ाना है। लेकिन मेरी सोच हमेशा ही इससे अलग रही है। शिक्षित बेटी दो घर रोशन करती है। इसलिए हमेशा बेटी को शिक्षित बनकर कामयाबी पाने के लिए प्रेरित किया। बेटी प्रियंका को इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराकर शादी कर दी। सूबेसिंह अब करीब दो साल से गांव नांगतिहाड़ी में ही किराना की दुकान चला रहे हैं।
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मां जहां बच्चे का पालन-पोषण का दायित्व संभालती है, पिता एक मार्गदर्शक, रक्षक और प्रेरणा का स्रोत होते हैं। सही और गलत का फर्क सिखाते हैं, उन्हें अनुशासन और जिम्मेदारी का महत्व समझाते हैं। वे बच्चों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद कर उन्हें कामयाबी की राह दिखाते हैं। गांव नांगतिहाड़ी के सूबेसिंह ने भी संघर्ष की राह पर चलते हुए अपने बच्चों को कामयाब बनाकर नजीर पेश की है। उनकी तरह ही जीवनभर मेहनत और संघर्ष से अपने बच्चों की कामयाबी सुनिश्चित करने वाले हर पिता को आज पितृ दिवस पर नमन है।
गांव नांगतिहाड़ी के सूबेसिंह ने सिंघाना रोड पर 30 साल चाय की स्टॉल चलाई
गांव नांगतिहाड़ी के सूबेसिंह ने अपने कड़े संघर्ष व मेहनत के बल अपने दोनों बच्चों को उस कामयाबी पर पहुंचा दिया जिस कामयाबी पर मां-बाप अपने बच्चों को देखना चाहते है। सूबेसिंह ने नारनौल सिंघाना रोड पर तीस साल चाय बेचकर बेटे महिपाल को डाॅक्टर व बेटी प्रियंका इंजीनियर बना दिया। सूबेसिंह ने बच्चों को कामयाब करने के लिए एक रेहड़ी पर एक छोटा सा तिरपाल लगाकर सर्दी-गर्मी व बारिश में खड़े रहकर चाय बनाई। सूबेसिंह के संघर्ष के चलते आज उनके बेटा-बेटी उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां हर मां-बाप अपने बच्चों को देखना तो चाहते हैं।
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आर्थिक तंगी को नहीं बनने दिया बाधा
सूबेसिंह ने बताया कि उनके दोनों बच्चे पढ़ाई में होशियार थे। इसलिए उन्होंने हमेशा उनको पढ़ने के लिए प्रेरित किया। बेटे की मेडिकल की पढ़ाई में आर्थिक तंगी भी आड़े आई, परंतु वे निराश नहीं हुए और जैसे-तैसे इसका भी समाधान किया। बेटे महिपाल ने भी उनकी मेहनत और संघर्ष को विफल नहीं जाने दिया। दिन-रात मेहनत लगन के साथ तैयारी कर प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) हरियाणा में एससी कोटे से पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उसका चयन महाराष्ट्र स्थित महात्मा गांधी मेडिकल इंस्टीट्यूट में हुआ। डॉ. महिपाल अब रोहतक पीजीआई में सेवाएं दे रहे हैं।
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शिक्षित बेटी दो घर करती है रोशन
सूबेसिंह बताते हैं समाज में कुछ लोग बेटा-बेटी में फर्क समझते हैं। बेटियों की शिक्षा के बारे में यह धारणा रखते हैं कि उन्हें तो पराए घर जाना है, ज्यादा किसलिए पढ़ाना है। लेकिन मेरी सोच हमेशा ही इससे अलग रही है। शिक्षित बेटी दो घर रोशन करती है। इसलिए हमेशा बेटी को शिक्षित बनकर कामयाबी पाने के लिए प्रेरित किया। बेटी प्रियंका को इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराकर शादी कर दी। सूबेसिंह अब करीब दो साल से गांव नांगतिहाड़ी में ही किराना की दुकान चला रहे हैं।