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समाज और संस्थाओं को मजबूत बनाना ही शिक्षा की असली कसौटी : सीजेआई सूर्यकांत
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महेंद्रगढ़। समाज और संस्थाओं को मजबूत बनाना ही शिक्षा की वास्तविक कसौटी है। न्यायपालिका, सिविल सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन जैसी संस्थाओं को हमेशा मजबूत रहना चाहिए। यह बात भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को महेंद्रगढ़ स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही। समारोह में 1462 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं, जिनमें 827 को स्नातकोत्तर , 557 विद्यार्थियों को स्नातक डिग्री तथा 78 शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की गईं।
दीक्षांत समारोह में युवाओं को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि डिग्री केवल सालों की मेहनत से अर्जित किए गए ज्ञान की ही पुष्टि करती है। जीवन की असली दिशा और दशा व्यक्ति के चरित्र व निर्णय लेने की क्षमता से तय होती है। डिग्री मिलने के बाद भी शिक्षकों, परिजनों व देश के प्रति फर्ज को कभी नहीं भूलना चाहिए।
जब औपचारिक शिक्षा का ढांचा व्यक्ति के आसपास नहीं रहता, तब वही चरित्र और विवेक उसके मार्गदर्शक बनते हैं। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों और सही निर्णय लेने की क्षमता को भी विकसित करना चाहिए। उच्च शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं है बल्कि समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।
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सीजेआई ने कबड्डी से दी आत्मनियंत्रण की सीख
सीजेआई ने कहा कि हरियाणा के लोकप्रिय खेल कबड्डी का उदाहरण दिया। कहा, कबड्डी में एक रेडर एक ही सांस में विरोधी पाले में प्रवेश करता है और लगातार कबड्डी-कबड्डी का उच्चारण करता रहता है। यह केवल खेल का नियम नहीं बल्कि अनुशासन और आत्मनियंत्रण का प्रतीक भी है। व्यक्ति को जीवन में हमेशा अपनी सीमाओं और वापस लौटने की जानकारी होनी चाहिए। महान रेडर बिना अति महत्वाकांक्षा के सही समय पर निर्णय लेते हैं और सुरक्षित लौट आते हैं। जीवन में व्यक्ति को बड़े सपने देखने के साथ विनम्रता, अनुशासन और सामूहिकता की भावना को बनाए रखना चाहिए।
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दीक्षांत समारोह में युवाओं को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि डिग्री केवल सालों की मेहनत से अर्जित किए गए ज्ञान की ही पुष्टि करती है। जीवन की असली दिशा और दशा व्यक्ति के चरित्र व निर्णय लेने की क्षमता से तय होती है। डिग्री मिलने के बाद भी शिक्षकों, परिजनों व देश के प्रति फर्ज को कभी नहीं भूलना चाहिए।
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जब औपचारिक शिक्षा का ढांचा व्यक्ति के आसपास नहीं रहता, तब वही चरित्र और विवेक उसके मार्गदर्शक बनते हैं। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों और सही निर्णय लेने की क्षमता को भी विकसित करना चाहिए। उच्च शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं है बल्कि समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।
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सीजेआई ने कबड्डी से दी आत्मनियंत्रण की सीख
सीजेआई ने कहा कि हरियाणा के लोकप्रिय खेल कबड्डी का उदाहरण दिया। कहा, कबड्डी में एक रेडर एक ही सांस में विरोधी पाले में प्रवेश करता है और लगातार कबड्डी-कबड्डी का उच्चारण करता रहता है। यह केवल खेल का नियम नहीं बल्कि अनुशासन और आत्मनियंत्रण का प्रतीक भी है। व्यक्ति को जीवन में हमेशा अपनी सीमाओं और वापस लौटने की जानकारी होनी चाहिए। महान रेडर बिना अति महत्वाकांक्षा के सही समय पर निर्णय लेते हैं और सुरक्षित लौट आते हैं। जीवन में व्यक्ति को बड़े सपने देखने के साथ विनम्रता, अनुशासन और सामूहिकता की भावना को बनाए रखना चाहिए।