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Mahendragarh-Narnaul News: वर्षों से खेल सुविधाएं लचर...मुरझा रही खिलाड़ियों की पौध, अन्य जिलों में पलायन को मजबूर

Sat, 28 Sep 2024 12:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 28 Sep 2024 12:43 AM IST
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Sports facilities have been poor for years... Saplings of players are withering, forced to migrate to other districts
फोटो संख्या:51- महेंद्रगढ़ खेल  स्टेडियम में पेड़ियों से उखड़ी टाइलें--संवाद
महेंद्रगढ़। जिले में लंबे समय से खेल सुविधाओं के दायरे में कोई विस्तार नहीं होने के कारण खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। लचर सुविधाओं के अभाव में नए खिलाड़ियों की पौध भी समय से पहले ही मुरझा जाती है।
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बिना द्रोण व सुविधाओं के अर्जुन तैयार नहीं हो पा रहे हैं, जबकि पड़ोसी जिलों में हर साल खेल सुविधाओं का दायरा बढ़ रहा है। वहीं जिले में ओलंपिक तक महज एक खिलाड़ी ही पहुंच पाया है जिसे भी सेना का सहारा मिला है। इस बार विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा भी खूब चर्चाओं में है। जिले में पांच राजीव गांधी खेल स्टेडियम कोच का इंतजार करते-करते बदहाली के कगार पर पहुंच चुके हैं। खेल सुविधाओं के नाम पर महज औपचारिकताएं ही पूरी हो रही हैं जिसके कारण यहां के खिलाड़ी पलायन करने को मजबूर हैं। वह अन्य जिलों की एकेडमियों में अभ्यास कर प्रतिभा निखारने का प्रयास कर रहे हैं।
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हाल ही में जिले को 14 खेल नर्सरी मिली थी जिन्हें भी निजी स्कूलों के मैदानों का सहारा है। ऐसे में जिला से कोई भी खिलाड़ी अवाॅर्डधारी नहीं बन पाया है। पड़ोसी जिलों में खेल के क्षेत्र में दिए जाने वाले भीम, अर्जुन, द्रौणाचार्य, खेल रत्न, ध्यानचंद अवाॅर्डी खिलाड़ियों की अच्छी खासी संख्या है। अन्य जिलों की अपेक्षा खेल स्टेडियम व कोच की संख्या आधी से भी कम है।
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छह राजीव गांधी खेल स्टेडियम भी पहुंचे बदहाली की कगार पर
महेंद्रगढ़ जिले में पांच राजीव गांधी खेल स्टेडियम हैं जो देखरेख एवं कोच का इंतजार करते-करते बदहाली की कगार पर पहुंच चुके हैं। जिले के विभिन्न खेलों में इस समय करीब पांच हजार खिलाड़ियों को कम से कम 30 कोच की आवश्यकता है लेकिन तैनाती महज 11 की है। नारनौल मुख्यालय में नेताजी सुभाष चंद बोस स्टेडियम व महेंद्रगढ़ में मुख्य स्टेडियम स्थापित है। स्टेडियम में बैडमिंटन कोट बॉक्सिंग कोर्ट भी कोच का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा राजीव गांधी के नाम से मिनी स्टेडियम डोहरकलां, सीहमा, धौलेड़ा, पाली व छितरोली में हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में इन स्टेडियमों में झाड़ उगे हैं। सुविधाओं के नाम पर केवल भवन हैं वह भी देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुके हैं।
जिले से सिर्फ तीन भीम अवाॅर्डी
जिले से महज तीन खिलाड़ियों को भीम अवार्ड मिल पाया है जबकि इन्होंने भी अन्य प्रदेशों या जिलों में अभ्यास किया है। इनमें से ओलंपिक तक पहुंचने वाले सूबेदार संदीप पुनिया निवासी सुरेहती जाखल ने भी सेना में रहते हुए अभ्यास किया। जबकि गांव सलुनी के विरेंद्र यादव ने जुड्डो व गणियार के हनुमान ने वॉलीबाल में सराहनीय प्रदर्शन के दम पर भीम अवार्ड पाया है। हालांकि इनमें से किसी ने भी जिले में अभ्यास नहीं किया। यहां की लचर खेल सुविधाओं के कारण खिलाड़ियों की नई पौध भी समय से पूर्व ही दम तोड़ देती है।

किस जिले में कितने स्टेडियम व अवाॅर्डी
जिला कोच अवाॅर्डी राजीव गांधी खेल स्टेडियम
महेंद्रगढ़ 11 3 5
रेवाड़ी 20 7 5
चरखी दादरी 22 15 6
भिवानी 46 30 10
झज्जर 38 24 17

फोटो संख्या:51- महेंद्रगढ़ खेल  स्टेडियम में पेड़ियों से उखड़ी टाइलें--संवाद

फोटो संख्या:51- महेंद्रगढ़ खेल  स्टेडियम में पेड़ियों से उखड़ी टाइलें--संवाद

फोटो संख्या:51- महेंद्रगढ़ खेल  स्टेडियम में पेड़ियों से उखड़ी टाइलें--संवाद

फोटो संख्या:51- महेंद्रगढ़ खेल  स्टेडियम में पेड़ियों से उखड़ी टाइलें--संवाद

फोटो संख्या:51- महेंद्रगढ़ खेल  स्टेडियम में पेड़ियों से उखड़ी टाइलें--संवाद

फोटो संख्या:51- महेंद्रगढ़ खेल  स्टेडियम में पेड़ियों से उखड़ी टाइलें--संवाद

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