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Mahendragarh-Narnaul News: ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जिले में अब तक 7449 किसानों ने दर्ज करवाई शिकायत दर्ज
Wed, 05 Mar 2025 12:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 05 Mar 2025 12:41 AM IST
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नारनौल। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को खोलने के बाद जिले में अब तक करीब 7449 किसानों ने शिकायत दर्ज कराई है। क्षेत्र में ओलावृष्टि के बाद सरसों और गेंहू की फसल को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है।
वहीं कुछ गांवों में तो 50 से 60 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है। इस कारण किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा है। ओलावृष्टि के बाद किसान सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे थे। विभिन्न गांवों के लोगों ने जिला उपायुक्त सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंप कर ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने की मांग की थी।
सोमवार को ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया। इसमें जिले की पांच तहसील के गांवों को शामिल किया गया है। ओलावृष्टि के दौरान नांगल चौधरी क्षेत्र में केवल बूंदाबांदी दर्ज की गई थी और फसल को नुकसान नहीं पहुंचा था। जिस कारण नांगल चौधरी तहसील के गांवों को पोर्टल में शामिल नहीं किया गया है। ई-क्षपिपूर्ति पोर्टल में जिले के 4 खंडों के 160 गांवों को शामिल किया गया है। नारनौल खंड के 61 गांवों, कनीना खंड के 8 गांवों, अटेली खंड के 49 और गांवों और महेंद्रगढ खंड के 42 गांवों को शामिल किया गया है।
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मुआवजे की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने के बाद किसान पोर्टल पर फसल खराब होने की शिकायत दर्ज करवा रहें हैं। मंगलवार को गांव गहली और जाखनी के किसानों ने उपायुक्त और नूनी सलूनी के किसानों ने डीआरओ को ज्ञापन सौंपकर मुआवजे की मांग की। गांव नूनी निवासी किसान अशोक नंबरदार ने बताया कि मुआवजे देने के लिए फसल खराबा की विभिन्न श्रेणियां बनाई गई है और मुआवजा श्रेणियों के आधार पर दिया जाता है। हमें जानकारी मिली थी कि गांव नूनी सलूनी को 0 से 25 प्रतिशत फसल खराबा की श्रेणी में रखा गया है। जबकि ओलावृष्टि के बाद नूनी सलूनी के किसानों की फसल 80 से 100 फीसदी तक खराब हो चुकी है।
वर्जन :
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को खोला गया है। इसमें 160 गांवों को शामिल किया गया है। किसानों से अपील है कि पोर्टल पर जल्द से जल्द उचित जानकारी सहित शिकायत दर्ज करवाएं।- राजेश कुमार, डीआरओ,नारनौल।
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वहीं कुछ गांवों में तो 50 से 60 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है। इस कारण किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा है। ओलावृष्टि के बाद किसान सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे थे। विभिन्न गांवों के लोगों ने जिला उपायुक्त सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंप कर ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने की मांग की थी।
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सोमवार को ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया। इसमें जिले की पांच तहसील के गांवों को शामिल किया गया है। ओलावृष्टि के दौरान नांगल चौधरी क्षेत्र में केवल बूंदाबांदी दर्ज की गई थी और फसल को नुकसान नहीं पहुंचा था। जिस कारण नांगल चौधरी तहसील के गांवों को पोर्टल में शामिल नहीं किया गया है। ई-क्षपिपूर्ति पोर्टल में जिले के 4 खंडों के 160 गांवों को शामिल किया गया है। नारनौल खंड के 61 गांवों, कनीना खंड के 8 गांवों, अटेली खंड के 49 और गांवों और महेंद्रगढ खंड के 42 गांवों को शामिल किया गया है।
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मुआवजे की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने के बाद किसान पोर्टल पर फसल खराब होने की शिकायत दर्ज करवा रहें हैं। मंगलवार को गांव गहली और जाखनी के किसानों ने उपायुक्त और नूनी सलूनी के किसानों ने डीआरओ को ज्ञापन सौंपकर मुआवजे की मांग की। गांव नूनी निवासी किसान अशोक नंबरदार ने बताया कि मुआवजे देने के लिए फसल खराबा की विभिन्न श्रेणियां बनाई गई है और मुआवजा श्रेणियों के आधार पर दिया जाता है। हमें जानकारी मिली थी कि गांव नूनी सलूनी को 0 से 25 प्रतिशत फसल खराबा की श्रेणी में रखा गया है। जबकि ओलावृष्टि के बाद नूनी सलूनी के किसानों की फसल 80 से 100 फीसदी तक खराब हो चुकी है।
वर्जन :
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को खोला गया है। इसमें 160 गांवों को शामिल किया गया है। किसानों से अपील है कि पोर्टल पर जल्द से जल्द उचित जानकारी सहित शिकायत दर्ज करवाएं।- राजेश कुमार, डीआरओ,नारनौल।