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Mahendragarh-Narnaul News: श्रीराम गए वनवास... अयोध्यावासी रोये
Sun, 06 Oct 2024 12:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 06 Oct 2024 12:17 AM IST
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फोटो नंबर-19चांदुवाड़ा की रामलीला में मंचन करते कलाकार।
नारनौल। श्री धार्मिक रामलीला ट्रस्ट चांदुवाड़ा के मंच पर चल रही रामलीला में कैकेई कोपभवन व राम वनवास की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान राम के वनवास की लीला देख दर्शकों की आंखे नम हो गई।
रामलीला का शुभारंभ कड़ियावाला हनुमान मंदिर के पुजारी नरेंद्र निर्मल, भारत भूषण सैनी व पंकज अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र शर्मा ने बताया कि पांचवें दिन की लीला में राम के राजतिलक की तैयारियों के बीच महारानी कैकेई राजा दशरथ से अपने 2 वचन मांगती है। तब रानी कैकेई महाराज दशरथ से रूष्ट होकर कोपभवन में जाकर बैठ जाती है। राजा दशरथ कोप भवन में जाकर उनसे इस कोप का कारण पूछते हैं, तब रानी कैकेई उन्हें उनके दिए 2 वचनों की याद दिलाती है और पहले वचन में राम की जगह उनके पुत्र भरत का राज्याभिषेक और दूसरे वचन के बदले राम को 14 वर्षों के वनवास की मांग राजा दशरथ के सामने रखती है। महाराजा दशरथ व महारानी कैकेई के संवाद से दर्शकों की आंखें भी भर आई। इसके बाद अपने पिता की इस अवस्था का कारण जानकर उनके पुत्र राम अपने पिता के वचन की मर्यादा को निभाने हेतु स्वयं ही स्वेच्छा से वनवास जाना स्वीकार कर लेते हैं। इस अवसर पर संरक्षक शुभू दयाल गर्ग, जगदीश भारद्वाज, संजय गर्ग, मुकेश वालिया, नरेंद्र जैन, बलवान सैनी, दिनेश भार्गव, बलवंत सैनी, सुभाष कौशिक, नरेश बादल, धनप्रकाश, राजेश चांवरिया, सुभाष आदि उपस्थित रहे।
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रामलीला का शुभारंभ कड़ियावाला हनुमान मंदिर के पुजारी नरेंद्र निर्मल, भारत भूषण सैनी व पंकज अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र शर्मा ने बताया कि पांचवें दिन की लीला में राम के राजतिलक की तैयारियों के बीच महारानी कैकेई राजा दशरथ से अपने 2 वचन मांगती है। तब रानी कैकेई महाराज दशरथ से रूष्ट होकर कोपभवन में जाकर बैठ जाती है। राजा दशरथ कोप भवन में जाकर उनसे इस कोप का कारण पूछते हैं, तब रानी कैकेई उन्हें उनके दिए 2 वचनों की याद दिलाती है और पहले वचन में राम की जगह उनके पुत्र भरत का राज्याभिषेक और दूसरे वचन के बदले राम को 14 वर्षों के वनवास की मांग राजा दशरथ के सामने रखती है। महाराजा दशरथ व महारानी कैकेई के संवाद से दर्शकों की आंखें भी भर आई। इसके बाद अपने पिता की इस अवस्था का कारण जानकर उनके पुत्र राम अपने पिता के वचन की मर्यादा को निभाने हेतु स्वयं ही स्वेच्छा से वनवास जाना स्वीकार कर लेते हैं। इस अवसर पर संरक्षक शुभू दयाल गर्ग, जगदीश भारद्वाज, संजय गर्ग, मुकेश वालिया, नरेंद्र जैन, बलवान सैनी, दिनेश भार्गव, बलवंत सैनी, सुभाष कौशिक, नरेश बादल, धनप्रकाश, राजेश चांवरिया, सुभाष आदि उपस्थित रहे।
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