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Mahendragarh-Narnaul News: गोवर्धन उठाकर श्रीकृष्ण ने तोड़ा इंद्र का अभिमान
Sat, 14 Sep 2024 12:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 14 Sep 2024 12:00 AM IST
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फोटो नंबर-26भागवत कथा में भजनों पर झूमती महिलाएं। स्त्रोत-स्वयं
नारनौल। मेहता चौक स्थित कुटुंब पैलेस में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को आचार्य बजरंग शास्त्री ने भागवत कथा का प्रवचन देते हुए बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन को उठाकर इंद्र का अभिमान दूर किया।
उन्होंने बताया कि इंद्र ने बृज में आकर भगवान से क्षमा मांगी और भगवान कृष्ण ने इंद्र को क्षमा कर दिया तो इंद्र ने बृज में अपना जीवन बिताने की इच्छा व्यक्त की। इस पर श्री कृष्ण ने कहा की इंद्र जो मेरा अपमान करता हैं हो सकता है कि उसे मैं सहन कर लू , लेकिन जो भी मेरे भक्तों व संतों को कष्ट देता है उसे मैं कभी सहन नहीं करता। क्योंकि भगवान कृष्ण कहते है कि मेरा अवतार संतों भक्तों की रक्षा के लिए और दुष्टों राक्षसों के संहार के लिए ही होता है। आचार्य ने बताया की गोपियां कोई साधारण स्त्रियां नही अपितु पूर्व जन्म के बडे़- बडे़ ऋषि मुनि संत महात्मा ही बृज में गोपी बनकर आए और भगवान कृष्ण को पाना ही उनके जीवन का परम उद्देश्य था। कथा में सर्वप्रथम मनीष शास्त्री ने मुख्य यजमान अरुण शर्मा व टीना शर्मा को विधिविधान से सभी देवताओं का पूजन करवाया। इस अवसर पर आन्ज्नेय शर्मा, कृष्ण शर्मा, पार्षद मोहनलाल शर्मा, कृष्ण गुप्ता, दीपक बंसल, प्रदीप संघी, विकास शर्मा, राजेंद्र सैनी, राजेंद्र शास्त्री, दिनकर वशिष्ठ, सुरेश गौड़ आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि इंद्र ने बृज में आकर भगवान से क्षमा मांगी और भगवान कृष्ण ने इंद्र को क्षमा कर दिया तो इंद्र ने बृज में अपना जीवन बिताने की इच्छा व्यक्त की। इस पर श्री कृष्ण ने कहा की इंद्र जो मेरा अपमान करता हैं हो सकता है कि उसे मैं सहन कर लू , लेकिन जो भी मेरे भक्तों व संतों को कष्ट देता है उसे मैं कभी सहन नहीं करता। क्योंकि भगवान कृष्ण कहते है कि मेरा अवतार संतों भक्तों की रक्षा के लिए और दुष्टों राक्षसों के संहार के लिए ही होता है। आचार्य ने बताया की गोपियां कोई साधारण स्त्रियां नही अपितु पूर्व जन्म के बडे़- बडे़ ऋषि मुनि संत महात्मा ही बृज में गोपी बनकर आए और भगवान कृष्ण को पाना ही उनके जीवन का परम उद्देश्य था। कथा में सर्वप्रथम मनीष शास्त्री ने मुख्य यजमान अरुण शर्मा व टीना शर्मा को विधिविधान से सभी देवताओं का पूजन करवाया। इस अवसर पर आन्ज्नेय शर्मा, कृष्ण शर्मा, पार्षद मोहनलाल शर्मा, कृष्ण गुप्ता, दीपक बंसल, प्रदीप संघी, विकास शर्मा, राजेंद्र सैनी, राजेंद्र शास्त्री, दिनकर वशिष्ठ, सुरेश गौड़ आदि मौजूद रहे।
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