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नारनौल कोर्ट परिसर की सुरक्षा रामभरोसे, नहीं होती किसी की जांच
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नारनौल न्यायालय परिसर का मुख्य द्वार। संवाद
- फोटो : Narnol
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दिल्ली रोहिणी कोर्ट के बाद लुधियाना में बम धमाके जैसी वारदात नारनौल कोर्ट में हो जाय तो कुछ नहीं कहा जा सकता। क्योंकि यहां आने वालों की जांच करने वाले कोई नहीं है। कोर्ट में काम करने वाले लगभग 700 अधिवक्ताओं की सुरक्षा भी राम भरोसे है। चैंबर के मुख्य गेटों पर पुलिस का पहरा नहीं है। इस प्रकार की अव्यस्था के बीच कोई भी बदमाश वारदात कर कोर्ट आसानी से फरार हो सकता है।
हालांकि अभी तक इस प्रकार की कोई वारदात नहीं हुई है, लेकिन महेंद्रगढ़ कोर्ट में अवश्य 2017 में एक वारदात हुई थी। जिसमें बदमाश अपने साथी गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला को छुड़वा ले गए थे। कोर्ट जैसे परिसर में सुरक्षा के चाकचौबंद व्यवस्था होनी चाहिए। शुक्रवार को सुबह पौने 12 बजे पड़ताल करने पर चैंबर की ओर बनाए गए गेट पर मात्र एक पुलिस कर्मचारी बैठा हुआ मिला। उसके पास न तो कोई मेटल डिटेक्टर था और न ही वह किसी आने-जाने वाले व्यक्ति को चेक कर रहा था।
गेट पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाया हुआ है, लेकिन वह भी ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा कोर्ट का मुख्य गेट खुला हुआ था। केवल लोगों को डोरफ्रेम मेटल डिटेक्टर से ही अंदर जाने दिया जा रहा था। कोर्ट के अंदर आने-जाने वाली किसी गाड़ी की जांच नहीं की जा रही थी। गाड़ी के नंबरों को भी कहीं नोट नहीं किया जा रहा था। न ही अंदर जाने वाले लोगों के सामानों की जांच की जा रही थी। गेट पर कर्मचारी आराम से बैठे हुए थे। इस संबंध में जिला बार एसोसिएशन एवं अधिवक्ताओं ने कोर्ट एवं चैंबर्स को लेकर चिंता जाहिर की है। बार एसोसिएशन ने कहा कि कोर्ट के किसी भी गेट पर नियमित जांच नहीं की जा रही है। अवांछित गाड़ियां अंदर घुस आती हैं। संवाद
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कोर्ट में रोजाना आते हैं 4 से 5 हजार लोग
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान यशवंत सिंह ने बताया कि नारनौल मेें 12 अदालत कक्ष है। इनमें सात प्रथम श्रेणी तथा पांच नीचे के हैं। इनमें एक जिला सत्र न्यायाधीश, पांच अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, चार दंडाधिकारी तथा एक स्थायी लोक अदालत लगती है। इन अदालतों में लगभग चार से पांच हजार लोगों को प्रतिदिन आना-जाना रहता है।
15 पुलिसकर्मियों के सहारे कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था
नारनौल कोर्ट की सुरक्षा में मात्र 15 पुलिस कर्मचारी तैनात हैं। तीन कर्मचारियों के पास हथियार हैं। इन्हीं के भरोसे जिला कोर्ट की सुरक्षा है। इन 15 पुलिस कर्मचारियों में से पांच मुख्य गेट पर तथा तीन दूसरे गेट पर ड्यूटी करते हैं। शेष कर्मचारी कोर्ट परिसर में बने बरामदे में ड्यूटी करते हैं। कोर्ट परिसर में लगभग 80 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। लगभग सभी चालू हालात में हैं।
कोर्ट के मुख्य गेट पर चार वर्ष से नहीं शुरू हुआ स्टैग सिस्टम
कोर्ट के मुख्य गेट पर चार वर्ष पहले शुरू होने वाला स्टैग सिस्टम अभी तक नहीं चालू हो सका है। लगभग 25 लाख रुपये का यह सिस्टम लगाया गया था। इसके शुरू होने पर अनजान गाड़ियां अंदर नहीं जा सकेंगी। केवल वहीं गाड़ियां जा सकेंगी, जिनके नंबर कंप्यूटर के अंदर फीड होंगे। यंत्र से गाड़ी का नंबर स्कैन होने के बाद बैरिकेट्स अपने आप ही खुल जाएगा। यह सिस्टम वैसा ही होगा जो हाईवे पर टोल पर होते हैं।
कोर्ट एवं बार की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे है। कोर्ट के मेटल डिटेक्टर काम नहीं कर रहे हैं। कोर्ट के मुख्य गेटों पर नियमित जांच नहीं होती है। संदिग्ध गाड़ियों में तीन-चार लोग अंदर आ जाते हैं। उनसे पूछने वाला कोई नहीं होता और न ही उनकी जांच की जाती है। कोर्ट के अंदर शरारती तत्व बेवजह घूमते रहते हैं। पुलिस को कोर्ट के अंदर चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए। -यशवंत सिंह, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन
चैंबर की ओर मेन गेट पर कोई होमगार्ड भी नहीं बैठता है। एक बार अवश्य दो पुलिस कर्मचारी बैठाए गए थे, लेकिन उनको भी बाद में हटा लिया गया। चैंबर और कोर्ट के बीच एक सिपाही बैठाया हुुआ है। सिपाही आराम से आठ घंटे बैठा रहता है और जांच वगैरह नहीं करता है। केवल जज ही नही, बल्कि अधिवक्ता भी असुरक्षित हैं। उनकी सुरक्षा भी जरूरी है। -राकेश मैहता, सीनियर अधिवक्ता।
बड़े अपराधियों की पेशी वीडियो क्रांफेंसिंग के जरीए हो
बड़े गैंगस्टर्स की पेशी वीडियो क्रान्फ्रेंसिंग के जरिए होनी चाहिए। सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे अपराधियों को यहां लाना ठीक नहीं है। कोर्ट की सुरक्षा भी राम भरोसे है। चैंबर की ओर डोर फ्रेममेटल डिटेक्टर काम ही नहीं करता। न ही आने जाने वालों की कोई चेकिंग होती है। अवांछित वाहन भी ऐसे ही दाखिल हो जाते हैं।- मनीष वशिष्ठ, अधिवक्ता।
कोर्ट के अंदर बनाई गई पार्किंग स्टाफ के लिए है। इसमें आने-जाने वाली गाड़ियोें के नंबर एवं ड्राइवरों से पूछताछ की जाती है। 15 पुलिस कर्मचारी कोर्ट में तैनात किए गए हैं। इनमें से तीन कर्मचारियों के पास हथियार भी हैं। पुलिस हर आने-जाने वालों पर निगाह रखती है। -कुलदीप, इंचार्ज, अदालत सुरक्षा, नारनौल।
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हालांकि अभी तक इस प्रकार की कोई वारदात नहीं हुई है, लेकिन महेंद्रगढ़ कोर्ट में अवश्य 2017 में एक वारदात हुई थी। जिसमें बदमाश अपने साथी गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला को छुड़वा ले गए थे। कोर्ट जैसे परिसर में सुरक्षा के चाकचौबंद व्यवस्था होनी चाहिए। शुक्रवार को सुबह पौने 12 बजे पड़ताल करने पर चैंबर की ओर बनाए गए गेट पर मात्र एक पुलिस कर्मचारी बैठा हुआ मिला। उसके पास न तो कोई मेटल डिटेक्टर था और न ही वह किसी आने-जाने वाले व्यक्ति को चेक कर रहा था।
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गेट पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाया हुआ है, लेकिन वह भी ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा कोर्ट का मुख्य गेट खुला हुआ था। केवल लोगों को डोरफ्रेम मेटल डिटेक्टर से ही अंदर जाने दिया जा रहा था। कोर्ट के अंदर आने-जाने वाली किसी गाड़ी की जांच नहीं की जा रही थी। गाड़ी के नंबरों को भी कहीं नोट नहीं किया जा रहा था। न ही अंदर जाने वाले लोगों के सामानों की जांच की जा रही थी। गेट पर कर्मचारी आराम से बैठे हुए थे। इस संबंध में जिला बार एसोसिएशन एवं अधिवक्ताओं ने कोर्ट एवं चैंबर्स को लेकर चिंता जाहिर की है। बार एसोसिएशन ने कहा कि कोर्ट के किसी भी गेट पर नियमित जांच नहीं की जा रही है। अवांछित गाड़ियां अंदर घुस आती हैं। संवाद
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कोर्ट में रोजाना आते हैं 4 से 5 हजार लोग
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान यशवंत सिंह ने बताया कि नारनौल मेें 12 अदालत कक्ष है। इनमें सात प्रथम श्रेणी तथा पांच नीचे के हैं। इनमें एक जिला सत्र न्यायाधीश, पांच अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, चार दंडाधिकारी तथा एक स्थायी लोक अदालत लगती है। इन अदालतों में लगभग चार से पांच हजार लोगों को प्रतिदिन आना-जाना रहता है।
15 पुलिसकर्मियों के सहारे कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था
नारनौल कोर्ट की सुरक्षा में मात्र 15 पुलिस कर्मचारी तैनात हैं। तीन कर्मचारियों के पास हथियार हैं। इन्हीं के भरोसे जिला कोर्ट की सुरक्षा है। इन 15 पुलिस कर्मचारियों में से पांच मुख्य गेट पर तथा तीन दूसरे गेट पर ड्यूटी करते हैं। शेष कर्मचारी कोर्ट परिसर में बने बरामदे में ड्यूटी करते हैं। कोर्ट परिसर में लगभग 80 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। लगभग सभी चालू हालात में हैं।
कोर्ट के मुख्य गेट पर चार वर्ष से नहीं शुरू हुआ स्टैग सिस्टम
कोर्ट के मुख्य गेट पर चार वर्ष पहले शुरू होने वाला स्टैग सिस्टम अभी तक नहीं चालू हो सका है। लगभग 25 लाख रुपये का यह सिस्टम लगाया गया था। इसके शुरू होने पर अनजान गाड़ियां अंदर नहीं जा सकेंगी। केवल वहीं गाड़ियां जा सकेंगी, जिनके नंबर कंप्यूटर के अंदर फीड होंगे। यंत्र से गाड़ी का नंबर स्कैन होने के बाद बैरिकेट्स अपने आप ही खुल जाएगा। यह सिस्टम वैसा ही होगा जो हाईवे पर टोल पर होते हैं।
कोर्ट एवं बार की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे है। कोर्ट के मेटल डिटेक्टर काम नहीं कर रहे हैं। कोर्ट के मुख्य गेटों पर नियमित जांच नहीं होती है। संदिग्ध गाड़ियों में तीन-चार लोग अंदर आ जाते हैं। उनसे पूछने वाला कोई नहीं होता और न ही उनकी जांच की जाती है। कोर्ट के अंदर शरारती तत्व बेवजह घूमते रहते हैं। पुलिस को कोर्ट के अंदर चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए। -यशवंत सिंह, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन
चैंबर की ओर मेन गेट पर कोई होमगार्ड भी नहीं बैठता है। एक बार अवश्य दो पुलिस कर्मचारी बैठाए गए थे, लेकिन उनको भी बाद में हटा लिया गया। चैंबर और कोर्ट के बीच एक सिपाही बैठाया हुुआ है। सिपाही आराम से आठ घंटे बैठा रहता है और जांच वगैरह नहीं करता है। केवल जज ही नही, बल्कि अधिवक्ता भी असुरक्षित हैं। उनकी सुरक्षा भी जरूरी है। -राकेश मैहता, सीनियर अधिवक्ता।
बड़े अपराधियों की पेशी वीडियो क्रांफेंसिंग के जरीए हो
बड़े गैंगस्टर्स की पेशी वीडियो क्रान्फ्रेंसिंग के जरिए होनी चाहिए। सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे अपराधियों को यहां लाना ठीक नहीं है। कोर्ट की सुरक्षा भी राम भरोसे है। चैंबर की ओर डोर फ्रेममेटल डिटेक्टर काम ही नहीं करता। न ही आने जाने वालों की कोई चेकिंग होती है। अवांछित वाहन भी ऐसे ही दाखिल हो जाते हैं।- मनीष वशिष्ठ, अधिवक्ता।
कोर्ट के अंदर बनाई गई पार्किंग स्टाफ के लिए है। इसमें आने-जाने वाली गाड़ियोें के नंबर एवं ड्राइवरों से पूछताछ की जाती है। 15 पुलिस कर्मचारी कोर्ट में तैनात किए गए हैं। इनमें से तीन कर्मचारियों के पास हथियार भी हैं। पुलिस हर आने-जाने वालों पर निगाह रखती है। -कुलदीप, इंचार्ज, अदालत सुरक्षा, नारनौल।

बिना सुरक्षाकर्मी के न्यायालय परिसर का प्रवेश द्वार। संवाद- फोटो : Narnol

नारनौल न्यायालय में जाते लोग । संवाद- फोटो : Narnol