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Mahendragarh-Narnaul News: एक महीने के बाद खुले स्कूल, छात्रों में खुशी तो कहीं रहा आलस्य
Tue, 02 Jul 2024 12:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 02 Jul 2024 12:24 AM IST
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नारनौल। एक महीने के अवकाश के बाद सोमवार को सभी निजी व सरकारी खुल गए हैं। स्कूलों के खुलने के बाद अब छात्रों की विधिवत पढ़ाई शुरू हो जाएगी। एक महीने पूरी मौज मस्ती करने के बाद पहले दिन छात्रों के चेहरे पर अलग-अलग रंग चढ़ा दिखाई दिया।
कई छात्र जहां आज स्कूल जाने के लिए लालायित दिखाई दिए, वही कई छात्रों का आलस्य नहीं टूटा। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी छोटे नौनिहालों को हुई। एक महीने के अंदर देर तक सोने की आदत के चलते उनकी माताओं ने काफी मुश्किल के बाद उन्हें उठाया गया। बहुत से बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए परिवार वालों ने चाकलेट आदि देकर उन्हें बहलाया। कई बच्चों ने बस स्टाप पर मम्मी, पापा व दादा, दादी से छोड़कर आने की जिद की। उन बच्चों को ज्यादा परेशानी हुई जिन्होंने पूरी छुट्टी खेलकर में बीता दी और होमवर्क नहीं किया। बरसात के चलते स्कूलों में पहले दिन छात्रों की संख्या कम ही रही। परन्तु सात बजे के बाद कुछ समय बरसात रुक जाने से छात्र अपने बस स्टाप तक पहुंच गए और उन्हें स्कूल जाना पड़ा। स्कूल जाते समय बहुत बच्चे खुश थे कि उन्हे अपने मित्रों से मिलने का एक महीने बाद मौका मिलेगा। वहीं स्कूल का काम जिन छात्रों का पूरा नहीं किया उन्हें स्कूल जाने में बड़ी दिक्कत हो रही थी और बरसात का बहाने बनाते हुए परिवार वालों को कल से जाने की जिद करते रहे।
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कई छात्र जहां आज स्कूल जाने के लिए लालायित दिखाई दिए, वही कई छात्रों का आलस्य नहीं टूटा। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी छोटे नौनिहालों को हुई। एक महीने के अंदर देर तक सोने की आदत के चलते उनकी माताओं ने काफी मुश्किल के बाद उन्हें उठाया गया। बहुत से बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए परिवार वालों ने चाकलेट आदि देकर उन्हें बहलाया। कई बच्चों ने बस स्टाप पर मम्मी, पापा व दादा, दादी से छोड़कर आने की जिद की। उन बच्चों को ज्यादा परेशानी हुई जिन्होंने पूरी छुट्टी खेलकर में बीता दी और होमवर्क नहीं किया। बरसात के चलते स्कूलों में पहले दिन छात्रों की संख्या कम ही रही। परन्तु सात बजे के बाद कुछ समय बरसात रुक जाने से छात्र अपने बस स्टाप तक पहुंच गए और उन्हें स्कूल जाना पड़ा। स्कूल जाते समय बहुत बच्चे खुश थे कि उन्हे अपने मित्रों से मिलने का एक महीने बाद मौका मिलेगा। वहीं स्कूल का काम जिन छात्रों का पूरा नहीं किया उन्हें स्कूल जाने में बड़ी दिक्कत हो रही थी और बरसात का बहाने बनाते हुए परिवार वालों को कल से जाने की जिद करते रहे।
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