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Mahendragarh-Narnaul News: नारी शक्ति को सलाम, बखूबी संभाल रही कमान
Sat, 26 Aug 2023 12:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 26 Aug 2023 12:15 AM IST
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नारनौल। आज महिलाएं पुरुषों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। यही वजह है कि गृहिणी से लेकर राष्ट्रपति जैसे पद पर महिलाएं आसीन हैं। जिले की बात करें तो यहां भी उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के अलावा नारनौल नगर परिषद चेयरपर्सन जैसे उच्च पद पर महिलाएं आसीन हैं। ये महिला अधिकारी उन महिलाओं के लिए उदाहरण हैं, जो अपने आपको केवल घर तक सीमित रखती हैं या फिर उनको घर ही दहलीज से आगे बढ़ने नहीं दिया जाता।
मां ने संजोया था अधिकारी बनने का सपना
2014 बैच की आईएएस अधिकारी मोनिका गुप्ता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। वह इस समय महेंद्रगढ़ जिला उपायुक्त के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह कई पदों पर विभिन्न जिलों पर रह चुकी हैं। आईएएस मोनिता गुप्ता की मां मनी गुप्ता ने उन्हें बड़ा अधिकारी बनाने का सपना संजोया था। मां की आंखों में पल रहे सपनों को बेटी ने पढ़ा और तैयारी में जुट गई। दूसरे प्रयास में ही संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की। बड़ा अधिकारी बनने का ऐसा जुनून सवार हुआ कि उन्हें कभी दोपहर तो कभी रात में खाने का भी ध्यान नहीं रहता। दिल्ली के अशोक विहार निवासी व्यवसायी अशोक गुप्ता भी बेटी को अफसर बनाना चाहते थे। इसलिए व्यवसाय में व्यस्त होने के बावजूद देर रात कोचिंग से बेटी को लाना और सुबह जल्दी छोड़ने जाना उन्हीं के जिम्मे रहा। दिल्ली के श्रीराम काॅलेज ऑफ काॅमर्स से स्नातक और दिल्ली इकोनॉमिक्स स्टडी सेंटर से परास्नातक किया।
आत्मविश्वास से आगे बढ़ें महिलाएं, हर लक्ष्य पाना आसान
एएसपी प्रबीना पी कन्याकुमारी जिले की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं। उनका मानना है कि महिलाएं यदि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगी तो कोई लक्ष्य पाना मुश्किल नहीं है। उनको खुद को जागरूक करना है और अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ने जाना है। महिलाएं चाहे गृहिणी बनें या अधिकारी, यह उन पर निर्भर करता है। यदि उनका अपने आप पर विश्वास होगा तो समाज भी उनके साथ चलेगा और आगे बढ़ने में पूरी मदद करेगा। एएसपी प्रबीना पी के पिता प्रेमचंद भी सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि माता रजीना मुख्याध्यापिका के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। एएसपी ने बताया कि उनको 5वीं कक्षा में पता चला कि कलेक्टर कोई बड़ा अधिकारी होता है। तब लगा कि कलक्टर बनना है। उसके बाद 11वीं कक्षा में पहुंची तो मां ने सहयोग किया और वह अखबार प्रश्न पत्रों की कटिंग लाकर देने लगीं। उसके बाद इंजीनियरिंग ज्वाइन की। तृतीय वर्ष में समझ आया कि यह उनके लिए नहीं है। उन्होंने प्लेसमेंट में भी भाग नहीं लिगा। उन्हें लगा कि ऐसा काम करूं, जिससे आम जनता के साथ सीधा संवाद हो। परिजनों का सहयोग मिला और यूपीएससी की तैयारी शुरू की, लेकिन सफलता पांचवीं बार में मिली।
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राजनीतिक परिवार मिला तो मैदान में उतरी कमलेश सैनी
नारनौल नगर परिषद की चेयरपर्सन कमलेश सैनी आज शहर की पहली नागरिक हैं। शादी से पहले उनका राजनीति में आने का कोई विचार नहीं था। शादी के बाद राजनीतिक परिवार मिला। ससुर भाना राम सैनी चौटाला परिवार से जुड़े थे। उन्होंने भी विधानसभा का चुनाव लड़ा। उनके निधन के बाद परिवार ही चुनाव लड़ने का दबाव रहा। इसके चलते 2014 में कमलेश सैनी ने इनेलो की टिकट पर अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गईं। इसके बाद 2019 में जजपा से विधानसभा का चुनाव नारनौल से ही लड़ा, लेकिन वह फिर हार गईं। 2022 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नगर परिषद चेयरपर्सन का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। चेयरपर्सन कमलेश सैनी का कहना है कि महिलाओं को आगे बढ़ना चाहिए। आज सरकार उनके लिए कई योजनाएं चला रही है। हर दूसरी महिला सरपंच और हर तीसरा राशन डिपो अब महिलाएं चलाएंगी।
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मां ने संजोया था अधिकारी बनने का सपना
2014 बैच की आईएएस अधिकारी मोनिका गुप्ता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। वह इस समय महेंद्रगढ़ जिला उपायुक्त के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह कई पदों पर विभिन्न जिलों पर रह चुकी हैं। आईएएस मोनिता गुप्ता की मां मनी गुप्ता ने उन्हें बड़ा अधिकारी बनाने का सपना संजोया था। मां की आंखों में पल रहे सपनों को बेटी ने पढ़ा और तैयारी में जुट गई। दूसरे प्रयास में ही संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की। बड़ा अधिकारी बनने का ऐसा जुनून सवार हुआ कि उन्हें कभी दोपहर तो कभी रात में खाने का भी ध्यान नहीं रहता। दिल्ली के अशोक विहार निवासी व्यवसायी अशोक गुप्ता भी बेटी को अफसर बनाना चाहते थे। इसलिए व्यवसाय में व्यस्त होने के बावजूद देर रात कोचिंग से बेटी को लाना और सुबह जल्दी छोड़ने जाना उन्हीं के जिम्मे रहा। दिल्ली के श्रीराम काॅलेज ऑफ काॅमर्स से स्नातक और दिल्ली इकोनॉमिक्स स्टडी सेंटर से परास्नातक किया।
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आत्मविश्वास से आगे बढ़ें महिलाएं, हर लक्ष्य पाना आसान
एएसपी प्रबीना पी कन्याकुमारी जिले की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं। उनका मानना है कि महिलाएं यदि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगी तो कोई लक्ष्य पाना मुश्किल नहीं है। उनको खुद को जागरूक करना है और अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ने जाना है। महिलाएं चाहे गृहिणी बनें या अधिकारी, यह उन पर निर्भर करता है। यदि उनका अपने आप पर विश्वास होगा तो समाज भी उनके साथ चलेगा और आगे बढ़ने में पूरी मदद करेगा। एएसपी प्रबीना पी के पिता प्रेमचंद भी सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि माता रजीना मुख्याध्यापिका के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। एएसपी ने बताया कि उनको 5वीं कक्षा में पता चला कि कलेक्टर कोई बड़ा अधिकारी होता है। तब लगा कि कलक्टर बनना है। उसके बाद 11वीं कक्षा में पहुंची तो मां ने सहयोग किया और वह अखबार प्रश्न पत्रों की कटिंग लाकर देने लगीं। उसके बाद इंजीनियरिंग ज्वाइन की। तृतीय वर्ष में समझ आया कि यह उनके लिए नहीं है। उन्होंने प्लेसमेंट में भी भाग नहीं लिगा। उन्हें लगा कि ऐसा काम करूं, जिससे आम जनता के साथ सीधा संवाद हो। परिजनों का सहयोग मिला और यूपीएससी की तैयारी शुरू की, लेकिन सफलता पांचवीं बार में मिली।
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राजनीतिक परिवार मिला तो मैदान में उतरी कमलेश सैनी
नारनौल नगर परिषद की चेयरपर्सन कमलेश सैनी आज शहर की पहली नागरिक हैं। शादी से पहले उनका राजनीति में आने का कोई विचार नहीं था। शादी के बाद राजनीतिक परिवार मिला। ससुर भाना राम सैनी चौटाला परिवार से जुड़े थे। उन्होंने भी विधानसभा का चुनाव लड़ा। उनके निधन के बाद परिवार ही चुनाव लड़ने का दबाव रहा। इसके चलते 2014 में कमलेश सैनी ने इनेलो की टिकट पर अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गईं। इसके बाद 2019 में जजपा से विधानसभा का चुनाव नारनौल से ही लड़ा, लेकिन वह फिर हार गईं। 2022 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नगर परिषद चेयरपर्सन का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। चेयरपर्सन कमलेश सैनी का कहना है कि महिलाओं को आगे बढ़ना चाहिए। आज सरकार उनके लिए कई योजनाएं चला रही है। हर दूसरी महिला सरपंच और हर तीसरा राशन डिपो अब महिलाएं चलाएंगी।