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आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हुआ रेजांगला नाटक का मंचन
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फोटो नंबर 04 - दीप प्रज्वलित कर रेजांगला नाटक मंचन का शुभारंभ करते उपायुक्त डॉ. जय कृष्ण आभीर।
- फोटो : Narnol
नारनौल। पोस्ट कोनी छोड़ा साहब जी, म्हारे रेवाड़ी में न्यू कहा करें कि कब्जा साचा झगड़ा झूठा...। अपनी जान दे देंगे लेकिन पीठ नहीं दिखाएंगे। खून की आखिरी बूंद तक डटे रहेंगे। सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग तथा जिला प्रशासन की ओर से स्थानीय सभागार में आयोजित रेजांगला नाटक के मंचन के दौरान जब यह संवाद सैनिक का किरदार निभा रहे कलाकार ने बोला तो लोग भारत माता के जयकारे लगने लगे।
आजादी काअमृत महोत्सव के तहत आयोजित इस मंचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपायुक्त डॉ. जयकृष्ण आभीर मुख्य अतिथि रहे। इस मौके पर उपायुक्त ने कहा कि भारत के वीरों ने विश्व में अपनी शहादत की मिसाल पेश की है। थोड़ी सी संख्या होते हुए भी बहादुरी से लड़ते हुए हमारे सैनिकों ने तिरंगे की शान को कायम रखा है। एक-एक सैनिक ने दस-दस दुश्मनों को मार कर अपनी धरती मां की रक्षा की है। रेजांगला की लड़ाई में सैनिकों ने अदम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया था। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि जिस प्रकार हमारे सैनिक अपना फर्ज निभा रहे हैं, उसी प्रकार देश के हर नागरिक को अपने-अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा व ईमानदारी के साथ अपना फर्ज निभाना चाहिए। हमें पर्यावरण और जल बचाने की दिशा में गंभीरता के साथ काम करना चाहिए। यह भी एक देश सेवा है।
नाटक के शुरुआत में रेजांगला की बर्फीली पहाड़ी में सैनिक दिवाली मना रहे हैं। उसी वक्त चीनी फौज हमला कर देती है और हमारे सैनिक उन्हें ढेर कर देते हैं। अगली रात भारी संख्या में चीनी फौज आधुनिक हथियारों के साथ पहुंचती है। हमारे सैनिक संख्या में उनसे 10 गुना कम होते हुए भी उनसे भिड़ जाते हैं और तिरंगे के लिए अपना बलिदान कर देते हैं लेकिन अपनी पोस्ट से पीछे नहीं हटते है। नाटक के अंत में देश भक्ति गीत जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी... गीत सुनकर लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना जाग उठी।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने रेजांगला समिति को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। वहीं रास कला मंच के प्रेसिडेंट और रेजांगला नाटक के निर्देशक रवि मोहन व उसकी टीम को भी यादगार स्वरूप पौधा भेंट किया। इस मौके पर जिला रेडक्रॉस सचिव श्याम सुंदर शर्मा, कर्नल आरके यादव, कैप्टन मामराज, रामस्वरूप सूबेदार, सुरेंद्र सिंह, हवलदार सतपाल, नारायण सिंह, गुगन सिंह, युद्धवीर सिंह, हवलदार जिले सिंह, वसुदेव आर्य मौजूद रहे।
बाक्स
आज भी गर्व से याद की जाती है रेजांगला सैनिकों की वीरता
रेजांगला 18 नवंबर 1962 के उस आखिरी दिन की शौर्य गाथा पर आधारित नाटक है जिसमें 13 कुमाऊ की चार्ली कंपनी के मुट्ठी भर जवानों ने अपने मन में उठी मानवीय व्यथा को अपनी भावनाओं से व्यक्त किया था। मेजर शैतान सिंह की अगुवाई में वे सभी जवान वीरता की ऐसी कहानी रच गए थे जिसे देश आज भी गर्व से याद करता है।
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आजादी काअमृत महोत्सव के तहत आयोजित इस मंचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपायुक्त डॉ. जयकृष्ण आभीर मुख्य अतिथि रहे। इस मौके पर उपायुक्त ने कहा कि भारत के वीरों ने विश्व में अपनी शहादत की मिसाल पेश की है। थोड़ी सी संख्या होते हुए भी बहादुरी से लड़ते हुए हमारे सैनिकों ने तिरंगे की शान को कायम रखा है। एक-एक सैनिक ने दस-दस दुश्मनों को मार कर अपनी धरती मां की रक्षा की है। रेजांगला की लड़ाई में सैनिकों ने अदम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया था। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि जिस प्रकार हमारे सैनिक अपना फर्ज निभा रहे हैं, उसी प्रकार देश के हर नागरिक को अपने-अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा व ईमानदारी के साथ अपना फर्ज निभाना चाहिए। हमें पर्यावरण और जल बचाने की दिशा में गंभीरता के साथ काम करना चाहिए। यह भी एक देश सेवा है।
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नाटक के शुरुआत में रेजांगला की बर्फीली पहाड़ी में सैनिक दिवाली मना रहे हैं। उसी वक्त चीनी फौज हमला कर देती है और हमारे सैनिक उन्हें ढेर कर देते हैं। अगली रात भारी संख्या में चीनी फौज आधुनिक हथियारों के साथ पहुंचती है। हमारे सैनिक संख्या में उनसे 10 गुना कम होते हुए भी उनसे भिड़ जाते हैं और तिरंगे के लिए अपना बलिदान कर देते हैं लेकिन अपनी पोस्ट से पीछे नहीं हटते है। नाटक के अंत में देश भक्ति गीत जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी... गीत सुनकर लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना जाग उठी।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने रेजांगला समिति को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। वहीं रास कला मंच के प्रेसिडेंट और रेजांगला नाटक के निर्देशक रवि मोहन व उसकी टीम को भी यादगार स्वरूप पौधा भेंट किया। इस मौके पर जिला रेडक्रॉस सचिव श्याम सुंदर शर्मा, कर्नल आरके यादव, कैप्टन मामराज, रामस्वरूप सूबेदार, सुरेंद्र सिंह, हवलदार सतपाल, नारायण सिंह, गुगन सिंह, युद्धवीर सिंह, हवलदार जिले सिंह, वसुदेव आर्य मौजूद रहे।
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आज भी गर्व से याद की जाती है रेजांगला सैनिकों की वीरता
रेजांगला 18 नवंबर 1962 के उस आखिरी दिन की शौर्य गाथा पर आधारित नाटक है जिसमें 13 कुमाऊ की चार्ली कंपनी के मुट्ठी भर जवानों ने अपने मन में उठी मानवीय व्यथा को अपनी भावनाओं से व्यक्त किया था। मेजर शैतान सिंह की अगुवाई में वे सभी जवान वीरता की ऐसी कहानी रच गए थे जिसे देश आज भी गर्व से याद करता है।