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जागरूकता के अभाव में फेल हो रहा सिस्टम

Sun, 08 May 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला Updated Sun, 08 May 2016 11:40 PM IST
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rain water harvesting sustem, no awereness, narnaul
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
तीन-चार वर्षों से मानसून रुठा हुआ है। इस कारण जिले में पेयजल किल्लत बनी हुई है। दक्षिणी हरियाणा का भी हाल कुछ लातुर जैसा ही है। यहां पर भूमिगत जलस्तर साल दर साल गिरता जा रहा है। नांगल चौधरी क्षेत्र में तो हालात यह हैं कि जमीन में पानी 1500 फुट तक नीचे चला गया है। ऐसे में पानी की कमी से लोग बेहाल हैं। लोग और प्रशासन बरसात के दिनों में बरसाती पानी का सही संरक्षण करें तो काफी लाभ मिल सकता है। बरसाती पानी के संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सबसे उपयुक्त है, मगर जिले में कुछ एक सरकारी और एक दो
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प्राइवेट स्थानों के अलावा कहीं भी यह सिस्टम नहीं बना है।

तीन-चार सालों से बरसात नहीं होने के कारण जल स्रोत सूखते जा रहे हैं। ऐसे में लोगों को पानी बचाने और वर्षा के जल का भंडारण की याद आई है। मगर जिला महेंद्रगढ़ में ऐसा कोई सख्त कानून नहीं बनाया गया कि वर्षा के जल को एकत्र किया जाए। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) द्वारा हालांकि सेक्टरों में 100 गज से अधिक क्षेत्र में भवन बनने वाले मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की शर्त है, मगर यहां यह भी कारगर सिद्ध नहीं हो रहा है। सरकारी रूप से दबाव न होने के कारण लोग रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
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क्या है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
बरसात के मौसम में पानी यहां-वहां बहकर चला जाता है। ऐसे में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से घर की छतों से आने वाले पानी का संरक्षण कर सकते हैं। इसके लिए छतों का पानी एक नाले से एक बड़े हौद में जमा कर लिया जाता है। इसको बरसात के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है।
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सरकार को उठाना होगा ठोस कदम
जिला में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लागू करने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गया है। कृषि विभाग द्वारा हालांकि तीन-चार जगह रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं, मगर उनका फंड भी विभाग को अलग से मंगाना पड़ता है। इसके लिए भी सरकारी भवन की छत का एरिया कम से कम 500 वर्ग मीटर होना भी अनिवार्य है। ऐसे में फंड न आने तथा शर्तें ज्यादा होने के कारण कृषि विभाग ने केवल दो-चार जगह ही उक्त सिस्टम लगाए हैं। जिनमें केवल सरकारी इमारतें ही शामिल हैं।

शहर में 500 गज से अधिक पर लागू है शर्त
शहर के अंदर यदि कोई 500 गज से अधिक में अपना मकान बनाता है तो उसे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाना होगा। वह जब अपने भवन निर्माण के लिए नगर परिषद में नक्शा पास कराएगा तो उसको नक्शे में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी दर्शाना होगा।

हुडा में लागू है यह शर्त
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा अपने सेक्टरों में भवन बनाते समय नक्शा पास कराते वक्त केवल बड़े शहरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाने की शर्त रखी गई है। यह शर्त हुडा के अंदर 100 वर्ग गज या इससे अधिक में बने मकानों के लिए है। मगर यहां शहर के सेक्टर में रहने वाले लोगों को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

कृषि विभाग करता है जागरूक
कृषि विभाग भू-जल स्थिति में सुधार लाने के लिए इस बारे में लोगों को जागरूक करता है। वहीं सरकारी इमारतों में इसके प्रदर्शनी प्लांट लगाए गए हैं, ताकि लोग इनको देख सकें तथा इनको अपनाएं। ऐसे प्रदर्शनी प्लांट लघु सचिवालय, आईटीआई, पालीटेक्निक, राजकीय कालेज व डीसी कार्यालय में लगाए गए हैं।


कुछ इमारतों में लगे हैं ये सिस्टम
कुछ जागरूक लोगों ने इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया हुआ है। इनमें सिटी मैरिज पैलेस, हुडा में कई इमारतों व कई व्यवसायिक इमारतों में इस सिस्टम को लगाया गया है।
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