{"_id":"6341b5df444c38415d1bc33f","slug":"rain-havoc-8500-mt-millet-soaked-in-mandis-farmers-worried-narnol-news-rtk6603019116","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश का कहर : मंडियों में भीगा 8500 एमटी बाजरा, किसान चिंतित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश का कहर : मंडियों में भीगा 8500 एमटी बाजरा, किसान चिंतित
विज्ञापन
नारनौल। जिले में शनिवार को हुई बारिश से मंडियों में बड़े पैमाने पर बाजरा भीग गया है। वहीं खेतों में खड़ी बाजरे और कपास की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका से किसान चिंतित हैं। जिले में अबतक 12500 एमटी बाजरे की खरीद हुई है जिसमें मात्र चार एमटी का उठान हुआ है। जबकि मंडियों में पड़ा 8500 एमटी भीग गया। मंडियों में तिरपाल की व्यवस्था नहीं होने से किसान खुद अपनी फसल को पानी से बचाने में जुटे रहे। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी प्रशासन की ओर से मंडियों में फसल के बचाव की व्यवस्था नहीं की गई थी।
पिछले दिनों जिले के प्रशासक एवं श्रम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वी.राजाशेखर ने मंडियों का दौरा कर मंडियों में फसल को भीगने से बचाने के लिए तिरपाल की व्यवस्था करवाने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया गया। मंडियों में किसानों को बाजरे के बैग खुले में पड़े हैं। जलभराव से नीचे से बैग पानी से गीले हो गए हैं। बारिश की वजह से सारा बाजरा भीग गया है। अब बाजरा खरीदा जाएगा या नहीं, इसको लेकर किसान असमंजस में हैं।
एक सप्ताह में हैफेड ने जिले में 12500 मीट्रिक टन बाजरे की खरीद की है। इनमें से मात्र चार हजार एमटी बाजरे का उठान हुआ है। नारनौल मंडी में अब तक 3650 एमटी बाजरा खरीदा गया है और एक हजार एमटी बाजरे का उठान हुआ है जबकि 2650 एमटी बाजरा मंडी में ही पड़ा हुआ है। मार्केट कमेटी एवं हैफेड के बीच तालमेल नहीं होने से कई किसानों का बाजरा नहीं बिका और उनका बाजरा बारिश में भीग गया।
विज्ञापन
मंडी अटेली : मंडी में शनिवार को बारिश की वजह से साढ़े चार हजार क्विंटल बाजरा भीग गया है। शनिवार को दिनभर बारिश के चलते खरीद नहीं हो सकी। अनाज मंडी में लगभग 40 हजार क्विंटल बाजरे की सरकारी खरीद हो चुकी है। शनिवार व रविवार को अवकाश होने के कारण खरीद बंद रही। अनाज मंडी में 4 हजार क्विंटल बाजरा पड़ा है जिसकी ब्रिकी होनी बाकी है। मंडी में जलभराव हो गया है।
नांगल चौधरी : शुक्रवार रात से शुरू हुई बारिश का सिलसिला शनिवार को देर सायं तक होती रही। किसानों ने सरसों व चने की फसल के लिए इस बारिश को लाभदायक बताया है। लेकिन अगर बरसात का जोर ज्यादा रहा तो फसलों की बिजाई करने में तीन से चार दिन की देरी हो सकती हैं।
बाक्स:
मंडियों में तिरपाल एवं टिन शेड की व्यवस्था नहीं
जिले की मंडियों में टिन शेड और तिरपाल की व्यवस्था नहीं है। नारनौल की नई अनाज मंडी में मात्र एक फड़ पर टिन शेड है, बाकी सभी खुले हैं। टिन शेड में रखे बाजरे का उठान तीन दिनों से नहीं हो रहा जिससे किसानों के पास बाजरा रखने की जगह नहीं है। इसके अलावा महेंद्रगढ़, सतनाली एवं कनीना मंडी में भी टिन शेड नहीं है, वहां भी सरकार द्वारा खरीदे गए बाजरे के बैग खुले में रखे हुए हैं। तिरपाल की व्यवस्था मार्केट कमेटी सचिव को आढ़तियों को आदेश देकर करवानी होती है लेकिन सचिव ने तिरपाल की व्यवस्था नहीं करवाई।
क्या बोले किसान
जब बाजरे की खरीद नहीं करनी थी तो उनका बाजरा मंडी में क्यों मंगवाया गया। तिरपाल की भी प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। हमने अपना स्वयं के तिरपाल से बाजरा ढका है। नीचे से तो पूरा बाजरा गिला हो गया है।- संतोष
-
बाजरा लेकर आए थे लेकिन कल बाजरे की खरीद नहीं की गई। मंत्री से दो बार फोन करवाने के बाद भी बाजरा नहीं खरीदा गया। पूरा बाजरा गीला हो गया है। प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं। आखिर किसान कहां जाए।- विश्वास सिंह, पूर्व सरपंच
वर्जन:
अब तक 12500 एमटी बाजरे की खरीद हुई है। 4 हजार एमटी का उठान हुआ है। तीन दिनों में सभी मंडियों में ज्यादा बाजरा आया है और उठान का कार्य चल रहा है। जो बाजरा भीगा है उनको मौसम खुलने के बाद सूखा देंगे। तिरपाल की व्यवस्था करवाने का काम मार्केट कमेटी का होता है।- नीरज त्यागी, डीएम, हैफेड, जिला महेंद्रगढ़।
बारिश से बाजरे को बचाने में जुटे रहे किसान
फोटो संख्या: 68 से 71
महेंद्रगढ़ मंडी में खुले आसमान तले भीगते रहे 6 हजार बैग
सतनाली क्षेत्र में खुले आसमान तले रखे गए हैं करीब 3500 बैग
संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़/कनीना/सतनाली। बारिश ने मंडियों में अव्यवस्था की पोल खोल दी। तीन मंडियों में टिनशेड के अभाव में खुले आसमान में रखी बाजरे की फसल भीगती रही। किसान अपनी फसल को बचाने के प्रयास में जुटे रहे। समय रहते तिरपाल आदि की व्यवस्था नहीं करा पाने के बाद अब हालात देख मंडी कमेटी ने आढ़तियों पत्र जारी कर उपज बचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं करने पर चेतावनी दी।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी मंडियों से बाजरे का पूरा उठान नहीं किया गया। महेंद्रगढ़ मंडी में करीब 6 हजार बैगों को तिरपाल से ढका गया लेकिन मंडी में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से फड़ के चारों ओर जलभराव हो गया। बाजरे से भरे जो कट्टे खुले में रखे थे वे भीग गए। वहीं सतनाली मंडी में भी दो दिन में खरीदे गए करीब 3400 बैगों को भी तिरपाल से ढका गया। यहां भी टिनशेड के अभाव में बाजरा खुले आसमान के नीचे पड़ा भीगता रहा।
कनीना अनाज मंडी में बारिश से फसल को बचाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बाजरा भीगता रहा। मंडी में जलभराव से बाजरे के बैगों के नीचे भी पानी भर गया। मंडी के व्यापारियों की मानें तो तय समय में जिम्मेदार उठान भी नहीं करा पाए जिससे भीगने से बाजरा खराब होने की आशंका है।
विज्ञापन
पिछले दिनों जिले के प्रशासक एवं श्रम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वी.राजाशेखर ने मंडियों का दौरा कर मंडियों में फसल को भीगने से बचाने के लिए तिरपाल की व्यवस्था करवाने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया गया। मंडियों में किसानों को बाजरे के बैग खुले में पड़े हैं। जलभराव से नीचे से बैग पानी से गीले हो गए हैं। बारिश की वजह से सारा बाजरा भीग गया है। अब बाजरा खरीदा जाएगा या नहीं, इसको लेकर किसान असमंजस में हैं।
विज्ञापन
एक सप्ताह में हैफेड ने जिले में 12500 मीट्रिक टन बाजरे की खरीद की है। इनमें से मात्र चार हजार एमटी बाजरे का उठान हुआ है। नारनौल मंडी में अब तक 3650 एमटी बाजरा खरीदा गया है और एक हजार एमटी बाजरे का उठान हुआ है जबकि 2650 एमटी बाजरा मंडी में ही पड़ा हुआ है। मार्केट कमेटी एवं हैफेड के बीच तालमेल नहीं होने से कई किसानों का बाजरा नहीं बिका और उनका बाजरा बारिश में भीग गया।
विज्ञापन
मंडी अटेली : मंडी में शनिवार को बारिश की वजह से साढ़े चार हजार क्विंटल बाजरा भीग गया है। शनिवार को दिनभर बारिश के चलते खरीद नहीं हो सकी। अनाज मंडी में लगभग 40 हजार क्विंटल बाजरे की सरकारी खरीद हो चुकी है। शनिवार व रविवार को अवकाश होने के कारण खरीद बंद रही। अनाज मंडी में 4 हजार क्विंटल बाजरा पड़ा है जिसकी ब्रिकी होनी बाकी है। मंडी में जलभराव हो गया है।
नांगल चौधरी : शुक्रवार रात से शुरू हुई बारिश का सिलसिला शनिवार को देर सायं तक होती रही। किसानों ने सरसों व चने की फसल के लिए इस बारिश को लाभदायक बताया है। लेकिन अगर बरसात का जोर ज्यादा रहा तो फसलों की बिजाई करने में तीन से चार दिन की देरी हो सकती हैं।
बाक्स:
मंडियों में तिरपाल एवं टिन शेड की व्यवस्था नहीं
जिले की मंडियों में टिन शेड और तिरपाल की व्यवस्था नहीं है। नारनौल की नई अनाज मंडी में मात्र एक फड़ पर टिन शेड है, बाकी सभी खुले हैं। टिन शेड में रखे बाजरे का उठान तीन दिनों से नहीं हो रहा जिससे किसानों के पास बाजरा रखने की जगह नहीं है। इसके अलावा महेंद्रगढ़, सतनाली एवं कनीना मंडी में भी टिन शेड नहीं है, वहां भी सरकार द्वारा खरीदे गए बाजरे के बैग खुले में रखे हुए हैं। तिरपाल की व्यवस्था मार्केट कमेटी सचिव को आढ़तियों को आदेश देकर करवानी होती है लेकिन सचिव ने तिरपाल की व्यवस्था नहीं करवाई।
क्या बोले किसान
जब बाजरे की खरीद नहीं करनी थी तो उनका बाजरा मंडी में क्यों मंगवाया गया। तिरपाल की भी प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। हमने अपना स्वयं के तिरपाल से बाजरा ढका है। नीचे से तो पूरा बाजरा गिला हो गया है।- संतोष
-
बाजरा लेकर आए थे लेकिन कल बाजरे की खरीद नहीं की गई। मंत्री से दो बार फोन करवाने के बाद भी बाजरा नहीं खरीदा गया। पूरा बाजरा गीला हो गया है। प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं। आखिर किसान कहां जाए।- विश्वास सिंह, पूर्व सरपंच
वर्जन:
अब तक 12500 एमटी बाजरे की खरीद हुई है। 4 हजार एमटी का उठान हुआ है। तीन दिनों में सभी मंडियों में ज्यादा बाजरा आया है और उठान का कार्य चल रहा है। जो बाजरा भीगा है उनको मौसम खुलने के बाद सूखा देंगे। तिरपाल की व्यवस्था करवाने का काम मार्केट कमेटी का होता है।- नीरज त्यागी, डीएम, हैफेड, जिला महेंद्रगढ़।
बारिश से बाजरे को बचाने में जुटे रहे किसान
फोटो संख्या: 68 से 71
महेंद्रगढ़ मंडी में खुले आसमान तले भीगते रहे 6 हजार बैग
सतनाली क्षेत्र में खुले आसमान तले रखे गए हैं करीब 3500 बैग
संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़/कनीना/सतनाली। बारिश ने मंडियों में अव्यवस्था की पोल खोल दी। तीन मंडियों में टिनशेड के अभाव में खुले आसमान में रखी बाजरे की फसल भीगती रही। किसान अपनी फसल को बचाने के प्रयास में जुटे रहे। समय रहते तिरपाल आदि की व्यवस्था नहीं करा पाने के बाद अब हालात देख मंडी कमेटी ने आढ़तियों पत्र जारी कर उपज बचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं करने पर चेतावनी दी।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी मंडियों से बाजरे का पूरा उठान नहीं किया गया। महेंद्रगढ़ मंडी में करीब 6 हजार बैगों को तिरपाल से ढका गया लेकिन मंडी में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से फड़ के चारों ओर जलभराव हो गया। बाजरे से भरे जो कट्टे खुले में रखे थे वे भीग गए। वहीं सतनाली मंडी में भी दो दिन में खरीदे गए करीब 3400 बैगों को भी तिरपाल से ढका गया। यहां भी टिनशेड के अभाव में बाजरा खुले आसमान के नीचे पड़ा भीगता रहा।
कनीना अनाज मंडी में बारिश से फसल को बचाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बाजरा भीगता रहा। मंडी में जलभराव से बाजरे के बैगों के नीचे भी पानी भर गया। मंडी के व्यापारियों की मानें तो तय समय में जिम्मेदार उठान भी नहीं करा पाए जिससे भीगने से बाजरा खराब होने की आशंका है।