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Mahendragarh-Narnaul News: शहादत पर गर्व... छुट्टी लेकर घर लौट रहे हर सैनिक में दिखता है बेटा

Sun, 15 Jun 2025 12:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sun, 15 Jun 2025 12:39 AM IST
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Proud of martyrdom... Every soldier who returns home on leave sees a son
फोटो संख्या:51- गांव सिहोर में कारगिल के शहीद अशोक कुमार की माता भतेरी देवी को  सम्मानित करते भ - फोटो : स्रोत स्वयं
कनीना।
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गांव सीहोर की भतेरी देवी को कारगिल युद्ध में शहीद हुए अपने बेटे पर अशेाक कुमार पर नाज है। वो कहती हैं बेटे ने देश के लिए कुर्बानी देकर उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। बेटा आज उनके साथ नहीं है, पर छुट्टी लेकर घर लौटते हर सैनिक में उन्हें अपना बेटा नजर आता है।
शहीद अशोक कुमार की मां भतेरी देवी ने बताया कि जब किसी जवान को छुट्टी आता देखती है तो उसको अशोक के नाम से बुलाती है। यह कहकर बूढ़ी मां के आंखों से अश्रु धारा बहने लग जाती है। भतेरी देवी ने बताया कि कारगिल युद्ध में बेटे के शहीद हुए 26 वर्ष बीत गए लेकिन कल की ही बात लगती है।
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शनिवार को कारगिल शहीद सैन्य सेवा मेडल से सम्मानित शहीद अशोक कुमार के परिजनों को भारतीय सेना के जवानों ने सम्मानित किया। इस दौरान हर चेहरा गर्व से भरा हुआ था। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों एवं सेना के जवानों ने भारत माता की जय और वीर जवान अमर रहे के नारे लगाए। सेना की ओर से पहुंचे नायब सूबेदार कमलकांत ने बताया कि कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय सेना शहीदों के घर-घर पहुंचकर वीर सैनिकों के परिजनों तथा देश के नागरिकों को वीरों के अदम्य साहस और शौर्य की गाथा तथा बलिदान से अवगत करा रही है।
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उन्होंने अपने भावों को दर्शाया है कि हम अपने वीर साथियों को कभी नहीं भूलते और न कभी भूलेंगे। यह हमारा कर्तव्य और हमारी भावना है कि हम उनके परिजनों को बताएं कि हमारे वीर सेनानियों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया है। बलिदानियों का परिवार अकेला नहीं है, भारतीय सेना उसका परिवार है और हमेशा उनके साथ खड़ी है।


कभी नहीं भूलेंगे अपने वीर साथियों को
नायब सूबेदार कमल कांत और जवानों ने परिजनों के साथ कारगिल युद्ध की गौरव गाथा साझा की। सेना का यह कदम स्वजनों को सम्मान देने के साथ-साथ यह बताने का भी है कि देश अपने वीर बलिदानियों को कभी नहीं भूलता। अशोक कुमार का जन्म 1 नवंबर 1977 को हुआ था। जुलाई 1997 को 13 कुमाऊं रेजिमेंट रानीखेत में भर्ती हुए। प्रशिक्षण के बाद एक सप्ताह के लिए वह गांव आया था। अशोक कुमार की ड्यूटी विश्व के सबसे ऊंचे युद्ध स्थल सियाचिन ग्लेशियर में थी। सियाचिन ग्लेशियर से जब बटालियन नीचे उतरी उसके बाद उसको सीधे कारगिल की लड़ाई में भेज दिया गया था। शहीद अशोक कुमार की रेजीमेंट ने 5685 पॉइंट पर पहाड़ी पर दुश्मनों को ढेर कर कब्जे में लिया था। अशोक कुमार 6 सितंबर 1999 को शहीद हुए। मरणोपरांत उन्हें सैन्य सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। शहीद अशोक कुमार का नाम राष्ट्रीय स्मारक राजपथ नई दिल्ली में वाल नंबर 2-सी रॉ नंबर 6 पर कॉलम नंबर 1530 पर में वार ऑपरेशन विजय प्राप्त करने पर नाम दर्ज है।

फोटो संख्या:51- गांव सिहोर में कारगिल के शहीद अशोक कुमार की माता भतेरी देवी को  सम्मानित करते भ

फोटो संख्या:51- गांव सिहोर में कारगिल के शहीद अशोक कुमार की माता भतेरी देवी को  सम्मानित करते भ- फोटो : स्रोत स्वयं

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